Rice Export Ban: भारत के चावल के बिना भूखे रह जाएंगे कई देश
27 सितंबर को जिनेवा में डब्लूटीओ की कृषि समिति की बैठक थी। समिति में शामिल अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, यूरोपीय संघ, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड, थाईलैंड, यूके आदि देशों ने भारत को गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक को लेकर डब्लूटीओ में घसीटा है। सबका एक ही तर्क है यदि भारत ने चावल निर्यात पर पाबंदी नहीं हटाई तो लोगों को भोजन कराना मुश्किल होगा।

20 जुलाई 2023 को भारत ने गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगाने की घोषणा की थी। तब से लेकर अब तक चावल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में आग लगी हुई है। चावल की कीमत बाजार में अब तक की सबसे ज्यादा महंगी हो गई है। भारत ने डब्लूटीओ मंच पर साफ कर दिया है कि उसे पहले अपने 140 करोड़ नागरिकों की खाद्य सुरक्षा को देखना है, उसके बाद ही वह किसी और देश को चावल बेच सकेगा। हालांकि भारत ने फिर भी कुछ देशों को चावल दिए हैं।
प्रतिबंध की आवश्यकता
20 जुलाई 2023 को भारत ने गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। खाद्य मंत्रालय का कहना है कि फिलहाल इस निर्यात नीति में कोई बदलाव नहीं होगा, क्योकि नई फसल आने में अभी तीन माह की देरी है और भारत अपने नागरिकों की खाद्य सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकता।
क्यों मचा है भारत के चावल को लेकर इतना घमासान
चावल उत्पादन में चीन के बाद भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है, लेकिन निर्यात में भारत नंबर एक पर है। भारत में चावल की घरेलू खपत भी बहुत अधिक है। भारत की लगभग आधी जनसंख्या मुख्य रूप में चावल पर निर्भर है। भारत में उपजाये जाने वाले चावल की लगभग 6000 किस्में हैं। जिनमें बासमती, गंधकसाला (गैर बासमती), गोबिंदभोग, पोक्कलिक, जीराफूल, नवरा, पालक्कदन माता, बोका, अंबेमोहर, कतरनी, चोकुवा (जादुई चावल), कैपड़, वायनाड़ जीराकसाला, अजरा घनसाल, कालानमक, तुलाईपांजी आदि चावल की किस्में दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं।
पिछले 40 वर्षों में चावल के कृषि क्षेत्रफल में जहां करीब 38.55 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं चावल का उत्पादन तीन गुणा से भी ज्यादा बढ़ गया। वर्ष 2021-22 में 465 लाख हेक्टेयर भूमि से 1303 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ। अनुमान है कि वर्ष 2023-24 में भारत में लगभग 1340 लाख टन चावल का उत्पादन होगा।
भारतीय चावल की दीवानी दुनिया
दुनिया भर के कुल चावल आयात का लगभग 40 प्रतिशत चावल भारत से ही आयात होता है। भारत लगभग 40 लाख टन चावल का निर्यात करता है। भारत के कुल चावल निर्यात में से करीब 75 प्रतिशत बासमती चावल व 25 प्रतिशत गैर-बासमती चावल होता है। लगभग 160 देशों को हम चावल निर्यात करते हैं। भारत सबसे अधिक चावल सऊदी अरब, ईरान, इराक, इटली, थाइलैंड, स्पेन, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, सिंगापुर, हांगकांग, मलेशिया, यमन और अमेरिका को करता है। इसीलिए जब भारत ने गैर बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया तो कई देशों में चावल के लिए मारामारी मच गई। यहां तक कि अमेरिका भी परेशान हो गया। अमेरिका, सिंगापुर, इंडोनेशिया और फिलीपींस सहित कई देशों ने नई दिल्ली से इस निर्यात प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटाने का आग्रह किया है।
संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार, भारत द्वारा चावल निर्यात पर प्रतिबंध की अचानक घोषणा से चावल की कीमत लगभग 12 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। नेपाल और वियतनाम में चावल की कीमतें एक दशक में सबसे अधिक हैं। थाई राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक थाईलैंड में भी हाल के हफ्तों में घरेलू चावल की कीमतों में काफी उछाल देखा गया है।
चावल का संकट
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध और इस साल अल नीनो जलवायु असर के कारण विश्व में खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला काफी हद तक बाधित है। पूरे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में, अप्रत्याशित मौसम के कारण चावल की आपूर्ति खतरे में है। इधर अरब अमीरात ने भी चावल के पुन: निर्यात को चार महीने के लिए निलंबित कर दिया है। म्यांमार ने कहा है कि वह अस्थायी रूप से चावल निर्यात को रोकने की योजना बना रहा है, और इंडोनेशिया ने कहा है कि वह अपने बफर स्टॉक को बढ़ाने के लिए पड़ोसी देशों से अधिक आयात करना चाहता है। फिलीपींस में, सरकार ने सबसे गरीब उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए चावल की कीमत पर लिमिट लगा दी है।
इधर रूस भी काला सागर अनाज समझौते से बाहर निकल गया है। यूक्रेन से अनाज के निर्यात की भी कोई संभावना नहीं है। इसलिए अनाज की उपलब्धता के बारे में वैश्विक चिंता बढ़ गयी है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या लाखों लोग भूखे रहेंगे, क्योंकि दुनिया की आधी से अधिक आबादी का मुख्य भोजन चावल ही है।












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