Simranjit Singh Mann: कौन हैं सांसद सिमरनजीत सिंह मान, जो भगत सिंह को ‘आतंकी’ कहते हैं?
संगरूर से लोकसभा सांसद सिमरनजीत सिंह मान अकसर खालिस्तान के समर्थन में विवादित बयान देते रहे हैं। दरअसल, 1945 में जन्में सिमरनजीत का पूरा जीवन ही दर्जनों विवादित किस्सों और कहानियों से भरा हुआ है।

Simranjit Singh Mann: पंजाब के संगरूर से लोकसभा सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने 'वारिस पंजाब दे' प्रमुख और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को लेकर हैरान करने वाला एक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमृतपाल को सरेंडर नहीं करना चाहिए बल्कि उसे तो रावी नदी को पार कर पाकिस्तान भाग जाना चाहिए। ऐसा हम पहले 1984 में भी कर चुके हैं।
खालिस्तान के समर्थन में इस तरह की बातें शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के प्रमुख और लोकसभा सांसद सिमरनजीत सिंह ने पहली बार नहीं की है। सिमरनजीत सिंह की पहचान एक कट्टर खालिस्तान समर्थक की रही है।
आईपीएस रह चुके हैं सिमरनजीत सिंह
20 मई 1945 में शिमला में पैदा हुये सिमरनजीत सिंह मान पूर्व आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी है। उनके पिता जोगिंदर सिंह मान सेना में लेफ्टिनेट कर्नल थे। सेना से रिटायर होने के बाद 1967 में पंजाब विधानसभा के स्पीकर बने। सिमरनजीत सिंह की पढ़ाई-लिखाई शिमला और चंडीगढ़ में हुई थी। उन्होंने साल 1966 में यूपीएससी पास की और 1967 में पंजाब कैडर के आईपीएस बने।
आईपीएस रहकर उन्होंने पुलिस अधीक्षक (सतर्कता), एसपी (मुख्यालय), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), फिरोजपुर; एसएसपी फरीदकोट और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के ग्रुप कमांडेंट के पदों पर काम किया।
आईपीएस से दिया इस्तीफा
1 जून से 10 जून 1984 के बीच भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गये 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' के विरोध में सिमरनजीत ने 18 जून 1984 को बंबई में सीआईएसएफ के ग्रुप कमांडेंट के तौर पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दरअसल, वह जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थक थे। उन्होंने अपना इस्तीफा तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को सौंपा था।
नेपाल बॉर्डर पर पकड़े गये
इस्तीफा देने के बाद सिमरनजीत कुछ समय के लिए अंडरग्राउंड हो गये। जिसके बाद उनके खिलाफ एक वॉरंट जारी किया गया। काफी खोजबीन के बाद 29 नवंबर 1984 को उन्हें बिहार-नेपाल (जोगबानी चेक पोस्ट) बॉर्डर पर तीन साथियों समेत गिरफ्तार कर लिया गया। गौरतलब है कि उनका नाम इंदिरा गांधी हत्याकांड से जुड़ा था। इसके अलावा, खालिस्तान चरमपंथी गतिविधियों से जुड़े कई मामलों में भी सिमरनजीत सिंह मान का नाम सामने आया था। वैसे अभीतक सिमरनजीत सिंह मान को लगभग 30 बार गिरफ्तार या हिरासत में लिया जा चुका है। मगर आजतक उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सका।
जेल से लड़ा सांसद का चुनाव
साल 1984 से 1989 तक सिमरनजीत सिंह जेल में रहे। यहीं से उन्होंने 1989 का लोकसभा चुनाव का पर्चा तरनतारन से भरा। यह चुनाव उन्होंने साढ़े चार लाख से अधिक वोटों से जीता। फिर जेल से बाहर आने के बाद सिमरनजीत को संसद में प्रवेश नहीं करने दिया गया। क्योंकि वह सदन में कृपाण लेकर जाना चाहते थे। इसके विरोध में उन्होंने सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया।
साल 1999 में वह फिर से लोकसभा का चुनाव लड़कर संसद पहुंचे। फिर सीधे 2022 में संगरूर से लोकसभा का उपचुनाव लड़ा और आम आदमी पार्टी के गुरमेल सिंह को 5,822 वोटों से हरा दिया। इस सीट पर 2019 में आम आदमी पार्टी के भगवंत मान जीते थे जोकि उनके सीएम बनने के बाद खाली हुई थी।
खुलकर की 'भिंडरावाले' की तारीफ
संगरूर लोकसभा सीट से उपचुनाव जीतने के बाद सिमरनजीत सिंह मान ने अपनी जीत का श्रेय अपने कार्यकर्ताओं और जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तालीम को दिया। उन्होंने कहा था कि जरनैल सिंह भिंडरांवाले ने शांतिपूर्ण संघर्ष के जरिए जीने का जो रास्ता बताया था, यह उसी की जीत है। इससे पहले 6 जून 2019 को उन्होंने भिंडरावाले को शहीद बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं 6 जून 2022 को ऑपरेशन ब्लू स्टार की 38वीं बरसी पर सिमरनजीत सिंह के समर्थकों ने स्वर्ण मंदिर परिसर में खालिस्तान समर्थन में अलगाववादी नारे लगाये थे।
भगत सिंह को कहा 'आतंकवादी'
जुलाई 2022 में करनाल में पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि उन्होंने अतीत में भगत सिंह को 'आतंकवादी' क्यों कहा था? जबकि वह तो देश के लिए शहीद हुए थे। इस पर सिमरनजीत सिंह मान ने कहा कि सरदार भगत सिंह ने एक युवा अंग्रेज अधिकारी को मारा था, उन्होंने एक अमृतधारी सिख कांस्टेबल चन्नन सिंह की हत्या की थी। उसके बाद उन्होंने उस समय नेशनल असेम्बली में बम फोड़ दिया था। अब आप मुझे बताइये कि भगत सिंह आतंकवादी थे या नहीं?
भारतीय सेना को बताया 'दुश्मन'
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अगस्त 2022 में केंद्र सरकार के "हर घर तिरंगा" अभियान चलाया तब सिमरनजीत सिंह ने इसका बहिष्कार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को तिरंगा नहीं खालसा झंडा फहराएं। सिख स्वतंत्र और एक अलग समुदाय है। इस दौरान उन्होंने भारतीय सुरक्षाबलों को दुश्मन तक करार देते हुए कहा कि जरनैल सिंह भिंडरांवाले 'दुश्मन' की सेना से लड़ते हुए शहीद हो गये थे।
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