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Protests in Gilgit Baltistan: गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ क्यों बढ़ रहा गुस्सा?

इस बार गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग शांत होने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। वो पिछले दो सप्ताह से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।

Protests in Gilgit and Baltistan against pakistan government and army

Protests in Gilgit Baltistan: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ लोग फिर से सड़कों पर आ गए हैं। कारगिल का द्वार खोलकर भारत में मिलाए जाने की बात की जा रही है। इस बार विरोध कर रहे गिलगित-बाल्टिस्तान के नागरिकों ने उनके इलाके को भारत में शामिल करने के नारे लगाये हैं। उनके नारे हैं कि आर-पार जोड़ दो, कश्मीर का द्वार खोल दो। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हमारे फैसले इस्लामाबाद की सरकार नहीं लेगी, और न हम उनको इजाजत देंगे। गिलगित बाल्टिस्तान के बारे में फैसला यहां की जनता करेगी।

आखिर क्या है विवाद का कारण

पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि सन 1947 से ही पाकिस्तान सरकार उनके लोगों पर अत्‍याचार कर रही है। यहां की सेना ने गैर-कानूनी तरीके से उनकी जमीनों पर कब्‍जा कर लिया है। गिलगित-बाल्टिस्‍तान में 1974 को एक कानून खत्‍म करके पाकिस्‍तान के हर नागरिक को यहां पर जमीन खरीदने का अधिकार दे दिया गया था। साथ ही लोग अवैध टैक्स, बढ़ती महंगाई और कम होते रोजगार के विरोध में भी सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

वहीं गिलगित-बाल्टिस्तान में खालसा सरकार टैक्स थोपा गया है, जिसका मतलब है कि गिलगित-बाल्टिस्तान की कोई भी बंजर भूमि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के शिविर स्थापित करने के लिए स्वचालित रूप से गिलगित-बाल्टिस्तान सरकार को दे दी जाएगी। वहीं पाकिस्तानी सरकार द्वारा दैनिक उपयोग की 135 से अधिक वस्तुओं पर भारी टैक्स लगाया गया है। यहां के स्थानीय लोग अपनी जमीनों को बचाने के लिए अब खुलकर पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसके वीडियो रोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

गिलगित-बाल्टिस्तान के संगठनों की भारत से आस

पाकिस्तान के खिलाफ वहां के कई संगठनों ने भारत से लगातार मदद करने की गुहार लगाई है। मीडिया खबरों के मुताबिक स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी सरकार को चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि वे इस बार लाहौर या इस्लामाबाद की ओर नहीं बढ़ेंगे। वे लद्दाख और कारगिल (भारत की तरफ) की ओर आगे बढ़ेंगे। इसमें गिलगित-बाल्टिस्तान की अवामी एक्शन कमेटी, अंजुमन-ए-इमामिया, अहल-ए-सुन्नत वल जमात, मजलिस-ए-वहदत-उल-मुस्लिमीन, नागरिक समाज और जमात-ए-इस्लामी जैसे दल शामिल हैं।

बीते दिन नेशनल इक्वेलिटी पार्टी जम्मू कश्मीर गिलगित बाल्टिस्तान और लद्दाख (एनईपी जेकेजीबीएल) के अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा कि GilgitBaltistan के लोगों ने लगातार 8वें दिन Skardu में पाकिस्तान के खिलाफ अवैध जमीन पर कब्जे, सब्सिडी में कटौती, बिजली की कीमतों में वृद्धि के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किया। पाकिस्तान द्वारा काले कानून और अनुचित टैक्स लगाये गए हैं। पाकिस्तानी सरकार और मीडिया ने अपनी आंखें और कान बंद कर लिए हैं।

पाकिस्तान में खूनी संघर्ष जारी

प्रदर्शन कर रही भीड़ पर पाकिस्तानी सेना ने फायरिंग भी की है लेकिन मारे गए लोगों की संख्या का खुलासा नहीं किया। मार्च 2022 में भी इसी तरह पाकिस्तान के कब्जे वाले मुजफ्फराबाद शहर में एक स्वतंत्रता-समर्थक रैली के दौरान भीड़ पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था, तब दो लोगों की मौत और 80 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। तब भी इस मामले को दबा दिया गया था।

गिलगित-बाल्टिस्तान पर भारत का स्टैंड

गिलगिट-बाल्टिस्तान को लेकर भारत का रूख साफ है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में अधिकारिक बयान दिया है कि गिलगिट-बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा है। वहीं जब-जब पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान समेत PoK को पाकिस्तान में मिलाने की चाल चली, भारत ने कड़ा ऐतराज जताया। 11 मार्च 2020 को भारत सरकार ने संसद में कहा था कि पूरे जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न अंग रहे हैं, हैं और रहेंगे। वहीं 27 अक्टूबर 2022 को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर कहा था कि वह हमेशा से भारत की आधिकारिक लाइन है। अब तो भारत ने 'उत्तर दिशा की ओर चलना प्रारंभ' कर दिया है और यात्रा तो तब संपन्न होगी, जब हम बाकी बचे हिस्से पाक के कब्जे वाले कश्मीर, गिलगित और बाल्टिस्तान तक पहुंचेंगे।

मई 2020 में भी विदेश मंत्रालय ने साफ-साफ कहा था कि चूंकि गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का अभिन्न हिस्सा है, लिहाजा पाकिस्तान इसे फौरन खाली कर दे। उसका यहां कब्जा गैरकानूनी है। तब भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि हमने पाकिस्तान के एक सीनियर डिप्लोमैट को तलब कर उन्हें अपना पक्ष बता दिया है। वहीं 1 नवंबर, 2020 को तत्कालीन पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने इस क्षेत्र को 'प्रॉविजनल प्रॉविंशियल स्टैटस' देने की घोषणा की थी लेकिन यह भी हवा-हवाई निकला। जिस पर उस समय के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था कि पाकिस्तान का यह कदम 'अवैध कब्जे को छिपाने' के लिए है, लेकिन यह 'छिपाया' नहीं जा सकता है। हम पाकिस्तान से उसके अवैध कब्जे वाले सभी इलाकों को तत्काल खाली करने का आह्वान करते हैं। वहीं इस समय जो गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रदर्शन हो रहे हैं इस पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से कोई बयान नहीं आया है।

गिलगित-बाल्टिस्तान पर UN, OIC, चीन सब चुप

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    गौरतलब है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान सेना द्वारा जमकर वहां के स्थानीय लोगों का दमन किया जा रहा हैं। वहां के लोग पाकिस्तानी आर्मी से संघर्ष कर रहे हैं तो यूनाइटेड नेशन्स (UNO), इस्लामिक मुल्कों का सबसे बड़ा संगठन (OIC) सहित अमेरिका और यूरोप के सभी देशों ने अभी तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सब चुप्पी साध कर बैठे हुए हैं।

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