ब्रिटेन में डर्टी बम बनाने की तैयारी! चोरी से परमाणु बम बनाने का मैटेरियल भेजने पर क्या बोला पाकिस्तान?
पाकिस्तान परमाणु बम बनाने का सामान तस्करी करने के लिए कुख्यात रहा है और चोरी से ही पाकिस्तान ने परमाणु बम बनाने का ब्लूप्रिंट भी हासिल किया था। लिहाजा, पाकिस्तान सबसे बड़ा आरोपी है।

Uranium Seized Britain Airport: ब्रिटेन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर परमाणु बम बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला यूरेनियम मिलने के बाद पूरी दुनिया के निशाने पर पाकिस्तान है और दावा किया जा रहा है, कि ओमान के रास्ते पाकिस्तान कई किलो यूरेनियम की तस्करी कर रहा था। हालांकि, ब्रिटिश एयरपोर्ट पर ये सामान पकड़ा गया। बताया जा रहा है, कि ब्रिटिश एयरपोर्ट अधिकारियों ने कई किलो यूरेनियम से भरा शिपमेंट जब्त किया है, जिसका इस्तेमाल डर्टी बम बनाने के लिए किए जाने की आशंका है।

यूरेनियम का पाकिस्तान कनेक्शन
ब्रिटिश अखबार द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरेनियम युक्त पैकेज ओमान के मस्कट से लाया जा रहा था और उसे पाकिस्तान से भेजा गया था। टर्मिनल चार पर उतरने वाले यात्री को गिरफ्तार कर लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना 29 दिसंबर 2022 की है, जहां एयरपोर्ट के अधिकारियों ने रेडियोएक्टिव मैटेरियल यूरेनियम जब्त की है। हीथ्रो के कार्गो सेक्शन में पाया गया है, कि यूरेनियम पैकेज ब्रिटेन में ईरान से जुड़ी एक फर्म को भेजा जा रहा था, जिसके बाद इस घटना को आतंकवाद से जोड़कर जांच की जा रही है। हालांकि, पाकिस्तान ने यूरेनियम भेजे जाने के मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि यूरेनियम के पाकिस्तान के कनेक्शन को लेकर जो रिपोर्ट आ रही है, वो सच नहीं है। वहीं, पाकिस्तान ने कहा है, कि अभी तक ब्रिटिश सरकार की तरफ से पाकिस्तान के साथ कोई आधिकारिक रिपोर्ट साझा नहीं किया गया है।

शक के दायरे में क्यों है पाकिस्तान?
ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI-6 और स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने आधिकारिक तौर पर इस बारे में अभी तक कुछ नहीं कहा है, लेकिन इस स्मगलिंग में शामिल लोगों की खोज में जुट गई है। फिलहाल अभी तक किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि ब्रिटेन में होने वाले एक बड़े खतरे को तत्काल टाला जा चुका है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने पाकिस्तान में परमाणु सामग्री के प्रबंधन को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है। पाकिस्तान फिलहाल आर्थिक संकट से गुजर रहा है और वो आर्थिक मदद पाने के लिए कुछ भी कर सकता है। पाकिस्तान इससे पहले भी उत्तर कोरिया को परमाणु बम बनाने की जानकारी पैसों को लेकर दे चुका है, लिहाजा पाकिस्तान सीधे तौर पर शक के घेरे में है।

PAK ने भी चोरी से बनाया था परमाणु बम
पाकिस्तान का परिमाणु सामग्री और तकनीक को लेकर एक काला इतिहास रह चुका है। आपको बता दें कि पाकिस्तान पर पहले भी एटमी हथियारों की तकनीक और पार्ट्स स्मगलिंग का आरोप लग चुका है। 2004 में, दुनिया यह जानकर चौंक गई थी कि पाकिस्तान के परमाणु बम के जनक अब्दुल कादिर खान एक दशक से भी अधिक समय से परमाणु तकनीक का काला बाजार चला रहे था। पाकिस्तानी वैज्ञानिक ने ईरान, लीबिया, और उत्तर कोरिया जैसे खतरनाक देशों को परमाणु रहस्य प्रदान किया था। हालांकि इस खुलासे के बाद कादिर को कैद कर लिया गया था। लेकिन, उत्तर कोरिया परमाणु बम बनाने में पाकिस्तान की मदद से ही कामयाब हो गया था।

ब्रिटेन पर आ गया था बड़ा खतरा?
कई रिपोर्ट्स में शक जताते हुए कहा गया है, कि ब्रिटिश एयरपोर्ट पर मिले यूरेनियम से डर्टी बम बनाने की प्लानिंग थी। ऐसे में सवाल ये उठता है, कि आखिर डर्टी बम क्या है और ये कितना खतरनाक होता है? अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक 'डर्टी बम डायनामाइट जैसे विस्फोटकों का रेडियोऐक्टिव पाउडर या छर्रों के साथ एक मिश्रण है। जब डायनामाइट या दूसरे विस्फोटकों में विस्फोट होता है, तो धमाके की वजह से रेडियोऐक्टिव पदार्थ आसपास के इलाके में पहुंच जाते हैं।' 'डर्टी बम' और 'रेडियोलॉजिकल डिसपर्सल डिवाइस' जैसे नाम अक्सर एक-दूसरे की जगह पर इस्तेमाल होते हैं। । 'डर्टी बम' पूर्ण रूप से अलग तरीके से काम करता है और परमाणु विस्फोट नहीं कर सकता। एक 'डर्टी बम' में डायनामाइट या दूसरे विस्फोटकों (मौजूदा केस में प्लूटोनियम का दावा) का इस्तेमाल करके रेडियोऐक्टिव धूल, धुएं और बाकी पदार्थों को फैलाया जाता है, जिससे कि रेडियोऐक्टिव प्रदूषण फैल सके।
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कितना खतरनाक होता है डर्टी बम?
'डर्टी बम' का सबसे ज्यादा खतरा इसके विस्फोट से है। इससे गंभीर चोटें लग सकती हैं और संपत्तियों को भारी नुकसान हो सकता है। विस्फोट के बहुत नजदीक रहने वाले लोगों को छोड़कर 'डर्टी बम' में इस्तेमाल हुआ रेडियोऐक्टिव पदार्थ तत्काल इतना रेडियएशन नहीं पैदा करता, जिससे फौरन गंभीर बीमारी का खतरा हो। लेकिन, इसका धुआं और धूल दूर तक फैलता है, जो सांस में जाने पर बाद में स्वास्थ्य को बहुत ही ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि, लोग इसे तत्काल ना तो देख सकते हैं, ना ही इसका गंध महसूस होता है और ना ही रेडिएशन का स्वाद पता चलता है। लेकिन, बाद में रेडिएशन फैलने के बाद डर्टी बम काफी ज्यादा खतरनाक हो जाता है और काफी खतरनाक बीमारियां उत्पन्न करता है।
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