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Predator Drone: प्रीडेटर ड्रोन हासिल करने की सभी बाधाएं खत्म, जाने कितना घातक है यह अमेरिकी हथियार

Predator Drone: बिडेन प्रशासन ने भारत को 31 एमक्यू 9बी प्रीडेटर ड्रोन देने का आधिकारिक पत्र भेज दिया है। यानी अब अमेरिका ने करीब 4 अरब डॉलर के प्रीडेटर ड्रोन के सौदे को अंतिम रूप दे दिया है और भारत इस घातक हथियार का अधिग्रहण कर सकता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वाशिंगटन ने अंतिम एलओए, 11 मार्च को भारतीय रक्षा मंत्रालय को भेज दिया है। उल्लेखनीय है कि खालिस्तानी कट्टरपंथी जीएस पन्नून की हत्या की भारत द्वारा कथित साजिश को लेकर अमेरिका ने पहले इस सौदे पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब अमेरिकी सांसदों की आपत्तियां खत्म हो गई हैं, और इस सौदे को मंजूरी मिल गई है। भारत के साथ इस अमेरिकी समझौते के खिलाफ किसी भी अमेरिकी सांसद ने कोई वीटो नहीं लगाया है।

Predator Drone

गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की चीनी सेना के जवानों के साथ झड़प के बाद, सरकार ने अमेरिका एमक्यू-9बी ड्रोन खरीदने का फैसला किया था। जून 2023 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान प्रीडेटर ड्रोन सौदे की घोषणा की गई थी।

भारत कहां करेगा प्रीडेटर ड्रोन की तैनाती

एमक्यू 9बी प्रीडेटर ड्रोन के अधिग्रहण में सबसे ज्यादा भारतीय नौसेना की रुचि थी। समझौते के अनुसार भारतीय नौसेना को 31 में से 15 सी गार्जियन ड्रोन मिलेंगे, जो कि प्रीडेटर का नौसैनिक संस्करण है। भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना को आठ-आठ ड्रोन मिलेंगे।

भारत ने इन प्रीडेटर ड्रोन के साथ 171 हेल-फायर एजीएम 114 आर मिसाइलों, लेजर गाइडेड बम, मिसाइल लॉन्चर, ग्राउंड स्टेशन, पनडुब्बी रोधी सोनोबॉय और पूर्ण एन्क्रिप्शन को भी खरीदने का सौदा किया है। इस प्रीडेटर ड्रोन के जरिए एक कैमरा और जमीन से सिर्फ 250 मीटर ऊपर से ही 2,000 किमी दूर अपने दुश्मनों पर नजर रखना अब भारत के लिए आसान हो जाएगा। इस प्रीडेटर ड्रोन के कंट्रोलर पर केवल एक बटन क्लिक करके, लक्ष्य पर मिसाइलों की बौछार की जा सकेगी।

दुनिया के सबसे घातक मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) में से एक एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन भारत की रक्षा प्रणाली को बेहद मजबूती प्रदान करेगा। इस ड्रोन का इस्तेमाल हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी गतिविधि पर नजर रखने के लिए मुख्य रूप से किया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय सेना आतंकवादी ठिकानों पर रिमोट-नियंत्रित अभियान शुरू करने में भी सक्षम होगी।

प्रीडेटर ड्रोन इतना घातक क्यों है?

आधुनिक सुविधाओं, गति और मारक क्षमता के कारण एमक्यू-9बी की दुनिया में सबसे अधिक मांग है। इसकी पिन-ड्रॉप साइलेंस के साथ काम करने की क्षमता इसे प्रतिस्पर्धा से सबसे अलग बनाती है। ड्रोन जमीन से 250 मीटर के करीब तक उड़ सकता है और आम तौर पर इसके बारे में किसी को पता भी नहीं चलता कि वह वहां है।

यही नहीं यह ड्रोन किसी वाणिज्यिक विमान से भी ऊंची उड़ान भर सकता है। जमीन से लगभग 50,000 फीट ऊपर तक। इसकी अधिकतम गति 275 मील यानी 442 किमी प्रति घंटा है। यह किसी भी मौसम में लंबे मिशन पर तैनाती के लिए उपयुक्त है।

एक प्रीडेटर ड्रोन चार मिसाइलों और लगभग 450 किलोग्राम बम सहित लगभग 1,700 किलोग्राम पेलोड ले जा सकता है, और बिना ईंधन भरे 2,000 मील तक की यात्रा कर सकता है। यह ड्रोन लगातार उड़ान भर सकता है और लक्ष्य पर 35 घंटे तक मंडरा सकता है। हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के अलावा, ड्रोन हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों से भी लैस हो सकता है।

खुफिया जानकारी जुटाने और हवाई हमलों के लिए प्रीडेटर ड्रोन का उपयोग इन दिनों काफी बढ़ गया है। इसके विस्तृत रेंज सेंसर, मल्टी-मोड संचार प्रणाली और सटीकता के कारण यह सबसे घातक हथियार के रूप में स्थापित हो चुका है।

कैसे काम करता है यह ड्रोन

प्रीडेटर के संचालन के लिए विमान को नियंत्रित करने और मिशन को कमांड करने के लिए रेटेड पायलट होते हैं। चालक दल लाइन-ऑफ़-विज़न डेटा लिंक या लाइन-ऑफ़-विज़न संचालन और उपग्रह के डेटा लिंक के जरिए ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन के अंदर से विमान का संचालन करता है। प्रीडेटर में मल्टी-स्पेक्ट्रल टारगेटिंग सिस्टम है, जो एक इंफ्रारेड सेंसर, कलर/मोनोक्रोम डेलाइट टीवी कैमरा, इमेज-इंटेंसिफाइड टीवी कैमरा, लेजर डिज़ाइनर और लेजर इल्यूमिनेटर से लैस होता है। प्रत्येक इमेजिंग सेंसर से फुल-मोशन वीडियो को अलग-अलग वीडियो स्ट्रीम या फ़्यूज़ के रूप में देखा जा सकता है।

प्रीडेटर ग्राउंड डेटा टर्मिनल एंटीना के साथ 5,000 गुणा 75 फुट के रनवे से उड़ान भर सकता है। खास बात यह है कि एक ही स्थान पर विभिन्न उड़ानों का नियंत्रण किया जा सकता है। इस तरह कमांड और नियंत्रण के साथ-साथ हथियार प्रणाली के लिए रसद आपूर्ति भी सरल हो जाती है। 31 एमक्यू 9बी प्रीडेटर ड्रोन में उन्नत टर्बोचार्ज्ड इंजन होता है। नोकदार पूंछ, स्प्लिट इंजन काउलिंग, ब्रेडेड स्टील होज़ और बेहतर इंजन ब्लॉक इसमें शामिल होते हैं।

भारत की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी

अमेरिका के जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स द्वारा निर्मित इन 31 स्काईगार्डियन ड्रोन की कीमत 1.70 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जबकि प्रौद्योगिकी और उपकरण सहित बाकी सेवाओं की लागत 2.29 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। इस सौदे को अंतिम रूप देने पर अमेरिकी सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिका ने भारत को अपनी अपेक्षाओं से अवगत करा दिया है कि एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साजिश के लिए जो कोई भी जिम्मेदार हो, उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

आरोप की जांच करने और अमेरिकी सरकार की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए भारत ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाने की घोषणा पहले ही कर दी है। स्पष्ट है कि प्रीडेटर ड्रोन भारत के दुश्मनों के खिलाफ गेम-चेंजर साबित होगा। अमेरिकी प्रीडेटर एमक्यू-9बी सशस्त्र ड्रोन हासिल करने में नरेंद्र मोदी सरकार की यह एक और कूटनीतिक सफलता है।

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