कानपुर रेल हादसे की ये छह कहानियां यकीनन रुला देंगी आपको
इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में मरने वालों का आंकड़ा 145 के पार पहुंच चुका है और ये संख्या आगे भी बढ़ेगी।
बैंगलोर। कहते हैं एक सफर जो शुरू होता है वो कहीं ना कहीं खत्म जरूर होता है लेकिन इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन के मुसाफिरों का सफर इस तरह खत्म होगा, ऐसी कल्पना कभी किसी ने नहीं की थी। जिस समय टिकट लेकर यात्रीगण ट्रेन में चढ़े होंगे उस वक्त उनमें से किसी ने भी ये नहीं सोचा होगा कि उनकी ये यात्रा उनकी लाइफ की अंतिम यात्रा साबित होगी।
इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में मरने वालों का आंकड़ा 145 के पार पहुंच चुका है और ये संख्या आगे भी बढ़ेगी क्योंकि अभी भी इस हादसे के शिकार काफी लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस दुखद त्रासदी की कुछ कहानियां तो ऐसी हैं जिन्हें पढ़कर यकीनन आपकी आंखें भी छलक उठेंगी और रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
आगे की बात तस्वीरों में...

बाबुल भी रोए, बिटिया भी रोई
ट्रेन पर लदी लाशों के पास बिखरे सामान और बैगों में फटे कपड़े मुसाफिरों के दिल का फसाना बयां कर रहे थे।इस ट्रेन के कई यात्री ऐसे थे जो या तो शादी में शरीक होने जा रहे थे और कुछ ऐसे जिनके यहां शादी थी। ऐसे ही एक यात्री थे गाजीपुर के विनोद सोनी जिनका बैग तो मिला लेकिन वो कहां है किसी को पता नहीं, उनके बैग से उनके बेटे की शादी का कार्ड मिला जो शायद वो किसी को देने के लिए जा रहे थे, ऐसे बहुत सारी लड़कियों की लाशें मिली हैं जिनके हाथों की मेंहदी बता रही है कि शायद ये मेंहदी उनके हाथ में इसलिए सजी थी क्योंकि वो किसी की दुल्हन बनने जा रही थी लेकिन शादी के फेरों से पहले उनका मौत से विवाह हो गया। इस त्रासदी में बाबुल भी रो रहा है और बिटिया भी। (दैनिक जागरण, कानपुर के ईपेपर में छपी खबर के मुताबिक,फोटो भी पेपर से)

जिसे पहनना था शादी का जोड़ा उसने पहना कफन
ऐसा ही दुखद परिवार है राकेश का. जो कि इंदौर में नौकरी करते हैं और पांच दिन बाद उनका गाजीपुर में तिलक था और 3 दिसंबर को शादी। राकेश अपनी मां और भतीजी संग अपने पैतृक निवास गाजीपुर जा रहे थे अपने भावी जीवन के सपनों को संजोए हुए लेकिन इससे पहले उनके सिर पर सेहरा बंधता वो दुनिया से चले गए, उनकी मां और भतीजी लापता हैं।

पांच दिन बाद तिलक उजड़ गया पूरा परिवार
अमर उजाला कानपुर में छपी ये खबर तो रोंगटे खड़ी कर देने वाली है क्योंकि यहां तो एक पूरा परिवार ही मौत के हत्थे चढ़ गया। इंदौर के श्रवण सोनी जो कि इस समय आईसीयू में हैं उनका पूरा परिवार पत्नी, बेटी, छोटा भाई, मां मौत के शिकार हो गए हैं। उनके छोटे भाई का तिलक 26 तारीख को था और उसके बाद बनारस में शादी, लेकिन जहां शादी की शहनाई बजनी थीं और जिसके लिए बजनी थी वो सफेद कफन में लिपट गया और उसका शव कहां है ये भी किसी को पता नहीं है।

12 घंटे तक मेडिकल स्टूडेंट मोबाइल से बताती रही हाल, मौत
इस ट्रेन में एक मेडिकल स्टूटेंड भी थी जो कि मोबाइल पर अपने घरवालों को अपने बारे में भी बता रही थी, होश आता तो whatsapp पर मैसेज भी करती। वो पूरे 12 घंटे तक मौत से लड़ती रही और जैसे ही एनडीआरएफ की टीम ने भारी मशक्कत के बाद उसे ट्रेन से बाहर निकाला उसकी सांसे थम गईं। बक्सर की तीस साल की कोमल भोपाल में मेडिकल की छात्रा थी। एक्सीडेंट में उसके कमर के नीचे का हिस्सा ट्रेन में फंस गया था और वो 12 घंटे तक वैसे ही दर्द में कराहती रही और इस दौरान उसने घरवालों से बात भी की लेकिन जब वो बाहर आई तो दुनिया छोड़ चुकी थी। (अमर उजाला कानपुर में छपी खबर)

बेटी मां बनने वाली थी और चल बसी
इस एक्सीडेंट में एक बच्चा तो जिंदगी में आने से पहले ही गुजर गया क्योंकि उसकी 28 साल की मां ने आंखें बंद कर ली। 28 साल की रितिका शर्मा बक्सर जा रही थी अपने भाई की शादी में। वो तीन महीने की गर्भवती थी, अपने पति संग वो अपनी भाई की शादी की बातें कर रही थीं तभी अचानक से जोरदार धमाका हुआ और वो पेट के बल अपनी सीट से गिर पड़ी कभी ना उठने के लिए। उसका पति सिद्धार्थ शर्मा इस समय अस्पताल में अपने टूटे हाथ को लेकर सदमें में है।

ढाई साल के बच्चे के मां-बाप गुजर गए
इस हादसे में एक ढाई साल का बच्चा ऋषि तो बच गया लेकिन उसके मां-बाप इस दुनिया में नहीं है। उसे तो खबर ही नहीं कि उसके साथ क्या हो गया। वो टुकुर-टुकुर रोते हुए अपने मां-बाप को खोज रहा है जो अब कभी नहीं आएंगे। ( दैनिक भास्कर)












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