आज भी पाक नहीं मानता है कि 65 की जंग में उसे मिली थी हार
बेंगलुरु। वर्ष 1965 की जंग ने भारत और भारतीय सेना को एक नई पहचान दी थी। भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान और इसकी सेनाओं को एक बड़ा सबक दिया था। वहीं पाक आज तक इस बात को नहीं मानता है कि 65 की जंग में उसे हार मिली थी। आज तक पाक मानता है कि 65 की जंग भारत के साथ खेला गया एक ऐसा 'टेस्ट मैच' था जिसे उसने ड्रॉ करा लिया था। लेकिन विशेषज्ञ कुछ और बात कहते हैं।

तो गलत बोल रहा है पाक
भारत के रक्षा विशेषज्ञों और उस समय युद्ध में शामिल रहे पूर्व सैनिकों की मानें तो पाक को सेना ने तगड़ा जवाब दिया था। चीन और ब्रिटेन के समर्थन के बाद भी अगर पाक सेनाओं को उल्टे पैर वापस लौटना पड़ा तो इसकी वजह सिर्फ भारतीय सेनाएं थीं।
भारत ने हवा, जमीन और समंदर के रास्ते पाक को घेरा था। आर्मी के आधिकारिक थिंक टैंक सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज की ओर से एक किताब लांच होने वाली है।
इसका टाइटल है, '1965, टर्निंग द टाइड: हाउ इंडिया वन द वॉर।' इसे देश के लीडिंग डिफेंस एनालिस्ट नितिन गोखले लिख रहे हैं। इस किताब के जरिए रक्षा मंत्रालय सभी युद्ध और बड़े ऑपरेशंस के इतिहास को फिर से प्रकाशित करेगी।
एक सितंबर को रिलीज हो रही इस किताब में बताया गया है कि भारत ने पाक को न सिर्फ सीमाओं से बाहर खदेड़ा बल्कि पाक की सेना को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया था। इस युद्ध की वजह से देश में कई बड़े राजनीतिक बदलाव आए।
क्या कहते हैं पाक विशेषज्ञ
पाक के लीडिंग जर्नलिस्ट महमूद शाम ने वर्ष 2005 में पाक न्यूजपेपर जंग में एक एडीटोरियल लिखा था। इस एडीटोरियल में उन्होंने कहा था कि भारत नहीं बल्कि पाक को युद्ध में विजय मिली थी। महमूद की मानें तो युद्ध पाक नहीं बल्कि कश्मीर में भारत की अव्यवस्थाओं का नतीजा था।
इस युद्ध की शुरुआत में पाक की सेना की तो कोई भूमिका ही नहीं थी बल्कि कश्मीर के लोग ही भारत के खिलाफ खड़े हो गए थे। उनकी मानें तो इस मुद्दे को अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया गया था। महमूद शाम के मुताबिक यह युद्ध पाक के इतिहास का एक अहम पड़ाव था और पाक को इसमें एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई थी।












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