Pakistan Crisis: सात दशकों में 23 प्रधानमंत्री, कोई भी पाकिस्तानी पीएम पूरा नहीं कर सका अपना कार्यकाल
पाकिस्तान में हमेशा से सैन्य तानाशाही का बोलबाला रहा है। देश के किसी भी प्रधानमंत्री ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया है।

Pakistan Crisis: अगस्त 1947 में भारत और पाकिस्तान एक साथ आजाद हुए। पिछले 76 सालों में भारत ने एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के तौर पर जहां नये-नये आयाम छू लिए हैं, वहीं पाकिस्तान में कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। इसके अलावा वहां सैन्य प्रशासन का बोलबाला रहा है। पाकिस्तान में अब तक सेना, सत्ता और तख्तापलट की राजनीति चल रही है।
अब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को पाक रेंजर्स ने जबरन गिरफ्तार कर लिया है, जिसके बाद से पाकिस्तान में चारों तरफ अशांति फैली है। इमरान खान के समर्थकों ने पकिस्तान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान एक तरफ जहां महंगाई की मार झेल रहा है। वहीं, दूसरी तरफ देश के राजनीतिक हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
अस्थिर राजनैतिक नेतृत्व
पाकिस्तान में अब तक 23 प्रधानमंत्री और 7 पीएम केयरटेकर के तौर पर सत्ता पर काबिज रहे हैं। इनमें से किसी ने भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया है। वहीं, पाकिस्तान के राष्ट्रपतियों का भी यही हाल रहा है। इसकी मुख्य वजह पाकिस्तान आर्मी और आतंकवादी संगठनों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर राजनीति में दखल देना रहा है। कई प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों को देश छोड़कर बाहर रहना पड़ा है, जिनमें नवाज शरीफ, परवेज मुशर्रफ जैसे नेता शामिल हैं।
पहले पीएम की गोली मारकर हत्या
भारत से विभाजन के बाद पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री के तौर पर लियाकत अली खान ने शपथ ग्रहण की। वह 15 अगस्त 1947 से लेकर 16 अक्टूबर 1951 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री की रावलपिंडी में 16 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई। वो केवल 4 साल तक ही प्रधानमंत्री के पद पर रह सके।
लियाकत अली खान के बाद ख्वाजा नजीमउद्दीन पाकिस्तान के दूसरे प्रधानमंत्री बने, लेकिन उनका कार्यकाल भी महज 2 साल का ही रह सका। 17 अक्टूबर 1951 को पीएम पद की शपथ लेने वाले ख्वाजा नजीमउद्दीन को 17 अप्रैल 1953 को पाकिस्तान के गवर्नर-जनरल गुलाम मोहम्मद ने बर्खास्त कर दिया और मोहम्मद अली बोगरा को नया पीएम नियुक्त किया। फिर मोहम्मद अली बोगरा का भी कार्यकाल केवल 2 साल का ही रहा। 12 अगस्त 1955 को पाकिस्तान के एक्टिंग गवर्नर जनरल इस्कंदर मिर्जा ने क्षेत्रीय मुद्दों का हवाला देकर पद से हटा दिया।
बर्खास्त होते रहे पीएम
शुरुआती तीनों प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल पूरा नहीं होने के बाद चौधरी मोहम्मद अली को नया पीएम बनाया गया। उन्होंने 12 अगस्त 1955 को पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली, लेकिन उनका कार्यकाल केवल 1 साल का रहा और 12 सितंबर 1956 को अपनी पार्टी के दबाब में इस्तीफा दे दिया। चौधरी मोहम्मद अली पाकिस्तानी सेना द्वारा की जाने वाली तानाशाही का विरोध कर रहे थे, जिसकी वजह से उनकी पार्टी के लोग खुश नहीं थे।
फिर पार्टी ने हुसैन सुहरावर्दी को नया पीएम बनाया। उनकी पार्टी अवामी लीग ने 1954 का चुनवा जीता था लेकिन पाकिस्तान के जनरल इस्कंदर मिर्जा के साथ हुए मतभेदों की वजह से 17 अक्टूबर 1957 को उन्हें पीएम का पद छोड़ना पड़ा। पिछले दो पीएम का कार्यकाल एक साल भी नहीं चल पाया। इसके बाद इब्राहिम इस्माइल चुंदरीगर को नया पीएम बनाया गया लेकिन उनका शासन केवल 2 महीनों का रहा।
सैन्य तानाशाही का दौर
17 दिसंबर 1957 को फिरोज खान नून को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाया गया। 7 अक्टूबर 1958 को पाकिस्तान के नये जनरल अयूब खान ने मार्शल लॉ की घोषणा करते हुए नून को पीएम पद से बर्खास्त कर दिया। पाकिस्तान में अगले 13 सालों तक जनरल अयूब खान का मार्शल लॉ लागू रहा। मार्शल लॉ खत्म होने के बाद नुरूल अमीन 7 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान के पीएम बने लेकिन उनका कार्यकाल सबसे छोटा यानी महज 13 दिनों का रहा। 20 दिसंबर 1971 को उन्हें पीएम के पद से हटा दिया गया।
14 अगस्त 1973 तक पाकिस्तान में कोई भी प्रधानमंत्री नहीं था। सेना द्वारा देश का शासन चलाया जा रहा था। 14 अगस्त 1973 को जुल्फिकार अली भुट्टो को नया प्रधानमंत्री बनाया गया। जुल्फिकार अली भुट्टो अगले 4 साल तक देश के पीएम बने रहे। 1977 में हुए आम चुनाव में वह दोबारा पीएम चुनकर आए लेकिन सैन्य तानाशाह जनरल मुहम्मद जिया उल हक ने उन्हें कैद कर लिया। 1979 में जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दे दी गई।
सैन्य तानाशाह जिया उल हक ने अगले 8 साल तक किसी को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने नहीं दिया। 23 मार्च 1985 को मुहम्मद खान जुनेजो को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। 3 साल तक बाद 29 मई 1988 को पीएम जुनेजो को सैन्य शासन ने बर्खास्त कर दिया।
नहीं टिक पा रहे थे एक भी पीएम
जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी बेनजीर भुट्टो 1988 में पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। जनरल जिया उल हक का शासन खत्म होने के बाद हुए चुनाव में बेनजीर भुट्टो जीत कर आई थी लेकिन उनका कार्यकाल भी केवल 2 साल का ही रह सका। 6 अगस्त 1990 को तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने बेनजीर भुट्टो को पीएम के पद से बर्खास्त कर दिया।
बेनजरी भुट्टो के बाद नवाज शरीफ पहली बार 1990 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने लेकिन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने उन्हें 1993 में बर्खास्त कर दिया। उनका कार्यकाल भी केवल 3 साल का ही रहा। हालांकि, पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ की सरकार को बहाल कर दिया, लेकिन पाकिस्तानी सेना के चीफ वाहिद खाखर ने नवाज शरीफ के साथ-साथ राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान को 18 जुलाई 1993 को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।
1993 में बेनजीर भुट्टो एक बार फिर से पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन इस बार भी वो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई। 1996 में उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया गया। 1997 में नवाज शरीफ एक बार फिर से पीएम बने लेकिन इस बार भी उनका कार्यकाल केवल 2 साल का ही रहा। पाकिस्तान के आर्मी चीफ परवेज मुशर्रफ ने 12 अक्टूबर 1999 को आपातकाल की घोषणा की और नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल कर दिया। इसके बाद नवाज शरीफ को पाकिस्तान छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया।
मुशर्रफ का तख्तापलट
मुशर्रफ की तानाशाही के दौर में मीर जफरुल्लाह खान जमाली को देश का नया पीएम बनाया गया, जिनका कार्यकाल भी महज 19 महीने का रहा। मुशर्रफ ने 30 जून 2004 को चौधरी सुजात को देश का नया पीएम बनाया। वह अगले 2 महीनों तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर बने रहे। 28 अगस्त 2004 को शौकत अजीज को पाकिस्तान का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। वह अगले 3 साल तक पाकिस्तान के पीएम बने रहे और 15 नवंबर 2007 को अपना पद छोड़ दिया। शौकत अजीज के बाज यूसुफ रजा गिलानी 2008 में हुए आम चुनाव के बाद पाकिस्तान के 18वें प्रधानमंत्री के तौर पर चुने गए। इस चुनाव में उनकी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने जीत हासिल की। संसदीय प्रक्रिया से चुने हुए प्रधानमंत्री गिलानी भी केवल 4 साल तक ही पीएम बन सके। 2012 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के एक मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए सत्ता से बर्खास्त कर दिया।
गिलानी के पीएम पद से हटने के बाद राजा परवेज अशरफ को प्रधानमंत्री बनाया गया। उनका कार्यकाल 9 महीनों का रहा। 2013 में नवाज शरीफ एक बार फिर से देश के प्रधानमंत्री बने। हालांकि, उनका कार्यकाल भी केवल 4 साल तक ही रहा। 28 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट में नवाज शरीफ के खिलाफ महाभियोग चलने की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उनकी जगह शाहिद खान अब्बासी को नया पीएम बनाया गया। वह भी केवल 9 महीनों तक देश के पीएम बने रहे। 18 अगस्त 2018 को इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने आम चुनाव में जीत हासिल की और वह देश के नए पीएम बने। 10 अप्रैल 2022 को इमरान खान की सरकार अल्पमत में आ गई, जिसके बाद नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बने।
राजनीतिक हत्या के भेंट चढ़े कई पीएम और राष्ट्रपति
पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों को एक तरफ जहां कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया जा रहा था वहीं, सत्ता में रहने के दौरान या सत्ता से बाहर जाने के बाद उनपर जानलेवा हमले होते रहे। इनमें कई पीएम और राष्ट्रपति की जान भी चली गई। देश के पहले पीएम लियाकल अली खान की गोली मारकर हत्या की गई थी। यहां से शुरू हुआ यह सिलसिला इमरान खान पर हुए हमले तक चलता रहा। पाकिस्तान के नौवें प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को तत्कालीन सैन्य तानाशाह जिया उल हक ने फांसी पर चढ़ा दिया।
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इसके बाद पाकिस्तान के छठे राष्ट्रपति जिया उल हक की 17 अगस्त 1988 में एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई। उनकी मौत को भी राजनीतिक साजिश बताया जाता रहा है। आज तक उनकी मौत की गुत्थी नहीं सुलझ पाई है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ पर भी कई बार जानलेवा हमले किए गए। 2000 से लेकर 2007 के बीच उन पर तीन बार हमले किए गए। हालांकि, इन तीनों हमलों में परवेज मुशर्रफ बच गए। इसके अलावा 30 जुलाई 2004 को पाकिस्तान के एक और पूर्व प्रधानमंत्री शौकत अजीज पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें वह बाल-बाल बच गए थे। पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनजरी भुट्टो की 2007 में हत्या की गई। बेनजीर भुट्टो की हत्या भी ठीक उसी जगह हुई जहां पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की हत्या की गई थी।












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