BJP के 'चाणक्य' अमित शाह हुए 54 के, 36 साल पुराना हुआ मोदी संग याराना

नई दिल्ली। आज बीजेपी के 'चाणक्य' कहे जाने वाले अमित शाह ने जीवन का 54वां बसंत पूरा किया है, अमित शाह की छत्रछाया में आज भाजपा ना केवल हिंदी भाषी प्रदेशों में सरकार चला रही है, बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों में भी आज भगवा फहर रहा है। शाह की रणनीति के ही चलते आज भारत के 14 राज्यों में कमल खिला हुआ है। ये शाह का ही दिमाग था जिसके चलते भाजपा का 14 साल का वनवास यूपी में खत्म हुआ। हर चुनाव को एक चुनौती की तरह लेने वाले अमित शाह की कामयाबी के पीछे उन पर पीएम मोदी का भरोसा है, दोनों की दोस्ती अवसरवादी नहीं बल्कि विश्वास और वचन की ताजा मिसाल है जो कि पिछले 36 सालों से फल-फूल रही है।

राजनीति के जय और वीरू कहलाते हैं अमित शाह और पीएम मोदी

राजनीति के जय और वीरू कहलाते हैं अमित शाह और पीएम मोदी

ये राजनीति के जय और वीरू कहलाने वाले अमित शाह और नरेंद्र मोदी का यराना ही है,जिसके आगे पूरा भारत तब नतमस्तक हो गया जब यूपी में अंतिम सांसों में सिसक रही भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की, लोगों ने इस जीत को मोदी-शाह सुनामी नाम दिया।

36 साल पुराना है शाह-मोदी का याराना

36 साल पुराना है शाह-मोदी का याराना

यूं तो मोदी और शाह की उम्र में बहुत अंतर है लेकिन दोनों की दोस्ती पर उम्र का फासला भी मायने नहीं रखता है। मोदी के करीबी कहते हैं कि पीएम मोदी बहुत कम लोगों पर भरोसा करते हैं और बहुत कम लोग ही उनके निकट हैं लेकिन उन कम लोगों में सबसे ऊपर नाम अमित शाह का है जो उनके हमराज और राजनीति के हमसफर बन चुके हैं। मोदी और अमित शाह की दोस्ती 36 साल पुरानी है।

गम और खुशी में रहे हमेशा साथ-साथ

गम और खुशी में रहे हमेशा साथ-साथ

इन 36 सालों में मोदी और अमित शाह ने देश की राजनीति को बेहद करीब से देखा है। अगर शाह के साथ मोदी ने गुजरात में हैट्रिक पूरी की थी तो वहीं साल 2002 के दंगो का गम और दंश भी झेला है। यही नहीं अमित शाह जब जेल में थे तो उनके परिवार को भी संभालने का काम मोदी ने ही किया था। यह आपस में दोनों की समझदारी और प्यार ही था जिसके चलते मोदी ने सभी लोगों को दरकिनार करते हुए साल 2014 के आम चुनावों में यूपी का चुनाव प्रभारी अमित शाह को बनाया और अमित शाह ने मोदी को पार्टी की जीत का तोहफा दिया।

मोदी-शाह की जोड़ी ने रचा इतिहास

मोदी-शाह की जोड़ी ने रचा इतिहास

उत्तर प्रदेश में तीन चौथाई बहुमत, बीजेपी का ही नहीं बल्कि संघ के लिए भी ख्वाब के सच होने जैसा था। इसके साथ ही मोदी और शाह की जोड़ी ने भारत की चुनावी सियासत में सबसे बड़ी लकीर भी खींच दी, अटल-आडवाणी के दौर में बनी इस जोड़ी ने राजनीति के पटल पर इतिहास रच डाला है।

तो ये है अमित शाह की सफलता का राज

तो ये है अमित शाह की सफलता का राज

अमित शाह की कामयाबी का सबसे बड़ा कारण उनका निरंतर काम करना है। एक आंकड़े के मुताबिक अमित शाह अपने कार्यकाल के दौरान अब तक साढ़े पांच लाख किमी की यात्रा कर चुके हैं, वो लगातार लोगों और पार्टी के कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहते हैं, जिसका नतीजा ये है कि आज 20 राज्यों में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार है। यानी देश के कुल 29 राज्यों में सिर्फ 9 राज्य में ही दूसरी सरकारें हैं और जिसके चलते देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस हाशिए पर आ गई है।

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