एनएसए सर्विलांस पर भाजपा- इसके पीछे राहुल गांधी तो नहीं?

इस खबर ने खूब हल्ला मचाया किसी को नहीं मालूम कि यह सब कैसे हुआ लेकिन बीजेपी और इसके कुछ नेताओं को राहुल गांधी पर शक है। पढ़िए यह रिपोर्ट और जानिए कि क्या है शक की अहम वजह।
भारत का वॉटरगेट स्कैंडल
वर्ष 1972 में जब अमेरिका में मशहूर वॉटरगेट स्कैंडल पूरी दुनिया के सामने आया तो हर कोई हैरान रह गया था। स्कैंडल के तहत उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने विपक्षी विपक्षी पार्टी के कुछ नेताओं को सर्विलांस के दायरे में रखने के लिए कुछ लोगों को अधिकार दिया था।
यह उस समय के एक बहुत बड़े स्कैंडल के तौर पर सामने आया क्योंकि कहीं न कहीं राजनीतिक विपक्षियों पर निशाना साधने के लिए सत्ता और ताकत का दुरुपयोग किया गया था।
अगर उस समय निक्सन ने विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिका के लिए बड़ा खतरा बताने के बजाय अगर जर्मना या फिर रूस को बड़ा खतरा बताया होता तो शायद हालात कुछ और होते।
इस तरह का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार साफ बताता है कि कैसे ताकत का दुरुपयोग राजद्राेह और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए किया जा सकता है।
भारत में यही हुआ। सत्ताधारी पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता की ओर से विदेशी ताकत को बताया गया कि विपक्षी पार्टी देश के लिए बड़ा खतरा है न कि पड़ोसी मुल्क में स्थित खतरनाक आतंकी संगठन।
इसके बाद इस विदेशी ताकत की ओर से सत्ताधारी पार्टी के बहकावे में आकार विपक्षी पार्टी को सर्विलांस के तहत ला दिया जाता है।
शक की सुई राहुल गांधी पर
अमेरिका के अग्रणी समाचार पत्रों में से एक वाशिंगटन पोस्ट की ओर से खुलासा किया गया है कि अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी यानी एनएसएस बीजेपी पर नजर रख रही थी।
सवाल है कि यह सबकुछ हुआ कैसे होगा? फिलहाल बीजेपी की ओर से शक की सुर्इ राहुल गांधी की ओर ही घूमती नजर आती है।
विकीलीक्स केबल के मुताबिक 20 जुलाई 2009 को सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी ने उस समय अमेरिका के राजदूत को बताया था कि बीजेपी देश के लिए लश्कर-ए-तैयबा की तुलना में ज्यादा बड़ा खतरा है।
एक नजर डालिए कि उस समय विकीलीक्स केबल में क्या सामने आया था।
भारत में अमेरिकी राजदूत की ओर से जब राहुल गांधी से भारत जारी लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधयों से जुड़ा एक सवाल पूछा गया तो राहुल गांधी ने कहा कि भारत में मुसलमान समुदाय की ओर से इस आतंकी संगठन का समर्थन करने के कुछ सुबूत मिले हैं ।
लेकिन साथ ही राहुल ने चेतावनी भी दी कि देश के अंदर धीरे-धीरे अपनी पकड़ को मजबूत बनाते कुछ हिंदु संगठन भी एक बड़े खतरे के तौर पर सामने आ रहे हैं।
यह संगठन मुसलमान समुदाय के साथ धार्मिक तनाव और राजनीतिक मतभेद पैदा कर तनाव पैदा कर रहे हैं (राहुल गांधी का इशारा इस जवाब में बीजेपी में मजबूत होती कुछ शख्सियतों जैसे उस समय के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से था)।
राहुल गांधी ने कहा देश में पनपने वाला चरमपंथ भारत में बढ़ता हुआ खतरा है और इस पर ज्यादा ध्यान देने की बात पर राहुल ने जोर दिया।
इसके बाद अमेरिका के राजदूत की ओर से सत्ताधारी दल के सदस्य से लश्कर-ए-तैयबा के बारे में पूछा जो कि भारत के लिए सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से हैं।
इस संगठन की ओर से भारत में कई आतंकी वारदातों को अंजाम दिया गया है जिसमें मुंबई हमला भी शामिल है।
वर्ष 2010 में मिली एनएसए को मंजूरी
वर्ष 2010 में एनएसए को अमेरिका की एक अदालत से बीजेपी की जासूसी करने के लिए मंजूरी हासिल हुई थी। 26/11 यानी मुंबई हमला और भारत अभी तक इसके दर्द से उबर नहीं पाया है।
इस हमले के बाद देश की सुरक्षा और रक्षा को और मजबूत करने और इसे और अति संवेदनशील बनाने पर जोर दिया जाने लगा।
अमेरिका ने भी इस हमले के बाद भारत की सुरक्षा को एक संवेदनशील मुद्दा करार दिया था।
लेकिन इन सबसे अलग कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका के राजदूत के लश्कर-ए-तैयबा पर जाहिर किए गए उनकी राय से अलग अपनी राय जाहिर की।
जहां अमेरिका के राजदूत ने लश्कर को देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा करार दिया तो वहीं राहुल गांधी ने दावा किया कुछ हिंदु ग्रुप खासतौर पर विपक्षी पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी को देश के लिए बड़ा खतरा बताया।
यह अपने आप मे काफी हैरान करने वाला सच है। उन्होंने इस सच को अमेरिका के सामने बढ़ा-चढ़ाकर बताया कि भारत में होने वाले आतंकी हमले के लिए होने वाली प्रतिक्रिया जोर-शोर से होती है।
देश में ही किसी संगठन की ओर से हमले के खिलाफ आवाज दब जाती है। यह सबकुछ सामने नहीं आता अगर एडवर्ड स्नोडेन वाला प्रकरण दुनिया में उजागर नहीं होता।
स्नोडेन ने अमेरिका के कई राज पर से पर्दा उठाया और इसी के तहत राहुल गांधी से जुड़ा यह सच भी सामने आया।
हैरान करने वाला सच
वर्ष 2010 यानी इस बातचीत के सिर्फ एक वर्ष के अंदर अमेरिका की टॉप जासूस एजेंसी को बीजेपी की जासूसी का लाइसेंस मिल गया। यह पूरा प्रकरण हैरान करने वाला है।
इस प्रकरण से तो लगता है कि भारत की सत्ताधारी पार्टी अमेरिका जैसी विदेशी ताकत के साथ जुड़कर आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाने के इरादे से काम कर रही थी। यह बिल्कुल उस तरह से ही है जैसे कि अमेरिका अल-कायदा को यह कहे कि अमेरिका के क्रिश्चियन संगठन अमेरिका के लिए बड़ा खतरा हैं और इन पर लगातार ध्यान दिया जाना चाहिए।
राजद्रोह जैसा संगीन अपराध
अगर देखा जाए तो 'एनएसएगेट' वॉटरगेट स्कैंडल से दस गुना ज्यादा गंभीर है। इस पूरे प्रकरण की सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए साथ ही राजद्रोह और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोपों के तहत लोगों से पूछताछ की जानी चाहिए।
भारत की सुरक्षा के लिए यह काफी संवदेनशील है। आगे किसी भी राजनीतिक पार्टी को यह मौका नहीं मिलना चाहिए कि वह विदेशी ताकतों के साथ शामिल होकर घरेलू राजनीतिक झगड़ों की वजह से देश की सुरक्षा करें।












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