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Credit Card Portability: मोबाइल नंबर की तरह अब पोर्ट करा सकेंगे डेबिट और क्रेडिट कार्ड नेटवर्क

Credit Card Portability: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए डेबिट-क्रेडिट और प्रीपेड कार्ड से जुड़े नियमों में एक अक्टूबर से बदलाव कर दिया है। अब ग्राहकों को अपनी पसंद के क्रेडिट-डेबिट कार्ड नेटवर्क से जुड़ने का विकल्प मिल गया है। यह सुविधा भी मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह ही होगी। आरबीआई के डाटा के मुताबिक भारत में 86 मिलियन क्रेडिट कार्ड और 945 मिलियन से अधिक सक्रिय डेबिट कार्ड हैं।

क्या होगा बदलाव

*कार्ड धारकों को अपने क्रेडिट, डेबिट और प्रीपेड कार्ड के लिए अपने कार्ड नेटवर्क को पोर्ट या स्विच करने की स्वतंत्रता होगी।

*कार्ड जारीकर्ताओं को एक से अधिक नेटवर्क पर कार्ड जारी करने की आवश्यकता होगी, ताकि ग्राहकों के पास अपना कार्ड नेटवर्क चुनने का विकल्प हो।

* ग्राहक जारी होने के समय या बाद में कार्ड नेटवर्क चुन सकते हैं।

Now you can port your debit and credit card network like your mobile number

क्या है क्रेडिट कार्ड नेटवर्क

अगर कोई भी व्यक्ति क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करता है तो उस कार्ड पर मास्टरकार्ड, अमरीकन एक्सप्रेस, वीजा, रूपे, डायनर्स क्लब आदि नाम लिखे होते हैं, जिनका बैंको से टाई-अप होता है। ये नेटवर्क ही कार्ड से लेन-देन को संभव बनाते हैं। अब आरबीआई ने निर्देश दिया है कि ग्राहकों को अपना पसंदीदा क्रेडिट कार्ड नेटवर्क चुनने की सुविधा मिलनी चाहिए। बैंकों और एनबीएफसी क्रेडिट-डेबिट और प्री-पेड कार्ड किसी खास कार्ड नेटवर्क के लिए जारी न करें। उन्हें लोगों को अपनी पसंद से नेटवर्क चुनने का ऑप्शन देना होगा। बैंकों को ग्राहकों से पूछना होगा कि उन्हें किस नेटवर्क का क्रेडिट-डेबिट कार्ड चाहिए।

पुराने ग्राहकों को कार्ड रिन्यू कराते समय मिलेगा विकल्प

हर क्रेडिट कार्ड की एक वैलिडिटी होती है, जो एक, दो, तीन साल या इससे अधिक की हो सकती है। पोर्ट कराने वाले ग्राहक इसके लिए अपने कार्ड की एक्सपायरी डेट देख सकते हैं। पुराने ग्राहकों को कार्ड रिन्यू कराते समय नेटवर्क बदलने का विकल्प मिलेगा। वहीं नए ग्राहक बैंक खाता खुलवाते समय या नया क्रेडिट कार्ड लेते समय कार्ड नेटवर्क प्रोवाइडर चुन सकेंगे। अलग-अलग नेटवर्क अपने कार्ड पर अलग-अलग फीचर और सुविधाएं देते हैं। किसी की फीस कम होती है, तो कोई ज्यादा रिवार्ड देता है। हर नेटवर्क के कैशबैक व यूजेज रिवार्ड अलग होते हैं। ट्रांजैक्शन फीस भी अलग-अलग होती है। नेटवर्क बदलने की सुविधा मिलने पर यूजर अपने इस्तेमाल के हिसाब से उपयुक्त कार्ड नेटवर्क चुन सकेंगे और अधिक सुवधाओं का लाभ ले सकेंगे।

भारतीय रिज़र्व बैंक के डेटा से पता चलता है कि भारत में क्रेडिट कार्ड का उपयोग पिछले वर्ष में काफी बढ़ गया है। अप्रैल 2023 में भारत में 8.6 करोड़ (86 मिलियन) से अधिक क्रेडिट कार्ड थे, जो अप्रैल 2022 में 7.5 करोड़ (75 मिलियन) से 15% अधिक है। यह संख्या 2024 की शुरुआत तक 10 करोड़ (100 मिलियन) के मील के पत्थर तक पहुंच सकती है। वहीं जनवरी 2023 में भारत में 945 मिलियन से अधिक सक्रिय डेबिट कार्ड थे। भारत में कार्ड से भुगतान 2023 में सालाना आधार पर 28.6 प्रतिशत बढ़कर 27.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

कैश में अब कम लेनदेन

भारत परंपरागत रूप से कैश से चलने वाली अर्थव्यवस्था रहा है। हालांकि, किसी पेमेंट के लिए कैश का इस्तेमाल अब घट रहा है। व्यापारी सेवा शुल्क को कम करना और प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) टर्मिनल स्थापित करने के लिए व्यापारियों को सब्सिडी प्रदान करना जैसे सरकार के क़दमों से देश में कार्ड भुगतान बाजार की वृद्धि के पीछे कुछ प्रमुख कारक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में पॉइंट ऑफ सेल्स भुगतान के लिए कार्ड के उपयोग में जोरदार वृद्धि हुई है। इसमें दुकानों पर पीओएस टर्मिनल और ऑनलाइन दोनों शामिल हैं। साथ ही भारतीयों द्वारा एटीएम से कैश निकासी धीरे-धीरे कम हो रही है।

2023 में एटीएम से कैश निकासी केवल 4.6 प्रतिशत बढ़कर 34.4 लाख करोड़ रुपये (416.2 अरब डॉलर) तक पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा कोरोना महामारी ने बिना संपर्क में आये भुगतान के तरीकों पर भी जोर दिया है, जिससे कार्ड से पेमेंट का चलन बढ़ा है।

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