National Youth Day 2023: "मेरे अमेरिकी बहनों-भाइयों"..कहकर स्वामी विवेकानंद ने जीता था दिल, जानिए खास बातें
Swami Vivekananda Chicago Speech: स्वामी विवेकानंद ने साल 1893 में शिकागो की धर्म संसद में हिंदी में भाषण देकर सभी का दिल जीत लिया था।

Swami Vivekananda Jayanti Chicago Speech (राष्ट्रीय युवा दिवस) : पूरा देश आध्यात्मिक गुरु , दार्शनिक, समाज-सुधारक स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाता है। ये पंरपरा साल 1985 से चली आ रही है। यूं तो स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी बहुत सारी बातें हैं, जो आपको जीवन का सही महत्व समझाती हैं। बहुत ही कम उम्र में ज्ञान का भंडार अर्जित करने वाले विवेकानंद की हर बात काफी निराली थी, अगर सच में इंसान उनके बताए रास्तों पर चले तो उसे ना तो कोई दुख घेरेगा और ना ही उसे कभी कोई तनाव होगा।
भारत की अलौकिक और अमिट छाप
विवेकानंद की बातें तब तक अधूरी हैं, जब तक उनके शिकागो वाले भाषण का जिक्र ना किया जाए। उनके उस हिंदी के भाषण ने विश्वपटल पर भारत की एक बेहद ही अलौकिक और अमिट छाप छोड़ी है, जिस पर हर भारतीय को गर्व है। बता दें कि स्वामी विवेकानंद ने साल 1893 में शिकागो की धर्म संसद में हिंदी में स्पीच दी थी, इतना लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी आज भी उनका वो भाषण लोगों के जेहन में जिंदा है और उतना ही प्रासंगिक है, जितना की उस वक्त था।

गौरतलब है कि विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था लेकिन उन्हें राजस्थान के महाराजा अजीत सिंह ने 'विवेकानंद' नाम दिया था और उन्होंने ही सिर पर भगवा पगड़ी पहनाकर उन्हें अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भेजा था। उन्हें पूरा भरोसा था कि इस सम्मेलन में विवेकानंद जैसा ही ज्ञानी जाने योग्य है क्योंकि वो ही देश की संस्कृति और धर्म को समझते हैं और वो ही लोगों को इसका सही महत्व भी बता सकते हैं और यकीन मानिए वो पूरी तरह से सच साबित हुए।
"मेरे अमेरिकी बहनों एवं भाइयों"...
लाखों की संख्या में भरे उस आयोजन स्थल में मात्र 2 मिनट का समय भाषण के लिए मिला था लेकिन जैसे ही विवेकानंद पोडियम पर पहुंचे और उन्होंने कहा कि "मेरे अमेरिकी बहनों एवं भाइयों"... पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा और तालियां तब तक बजती रहीं जब तक विवेकानंद बोलते रहे। उन्होंने इस सम्मेलन में भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म से जुड़ी बातें बताई और सत्य, निष्ठा के मार्ग पर चलने के लिए लोगों को प्रेरित किया।
एक दिन इंसान इसी मिट्टी में मिल जाता है
उन्होंने कहा था कि 'बहुत सारी सभ्यताएं मानवों की जिद की वजह से तबाह हो गईं, मुझे लगता है कि ये धर्म सम्मेलन कट्टरता, हठधर्मिता और दुखों का विनाश करने वाला साबित होगा। आपने जिस प्रेम और सौहार्द से हमारा स्वागत किया है उसे शब्दों में व्याखित करना मुश्किल है। ' रुचीनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम्। नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव॥' अर्थात जिस तरह से अनेक नदियां अंत में समुद्र में मिल जाती हैं, ठीक उसी तरह से एक दिन इंसान इसी मिट्टी में मिल जाता है और ईश्वर में समाहित हो जाता है।'

'इधर-उधर भटकने से अच्छा है कि इंसान खुद के अंदर भगवान को तलाशे। देश, समाज और इंसान में बदलाव तभी संभव है, जब देश का हर एक बालक शिक्षित हो लेकिन उसकी शिक्षा भी ऐसी हो जिससे बालक का शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक विकास हो सके, वो शिक्षित होने का साथ-साथ साक्षर भी हो। देश के युवा ही देश की तरक्की के सूत्रधार हैं इसलिए उन्हें सही और गलत का मार्ग पता होना चाहिए और ये आपको शस्त्र से नहीं शास्त्रों से प्राप्त करना होगा।'












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