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Kenya Plantation: एक देश, जो पेड़ लगाने के लिए लोगों को दे रहा है अवकाश

Kenya Plantation: दुनिया में पर्यावरण को बचाने के लिए अलग अलग स्तर पर बहुत काम हो रहे हैं। कहीं कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाया जा रहा है तो कहीं ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल पर जोर। इन सबके साथ पेड़ लगाने और हरियाली बढ़ाने पर भी लगभग सभी देश अभियान चला रहे हैं। लोगों को इससे जोड़ने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने के लिए अफ्रीकी देश केन्या ने एक अनोखा प्रयास किया है। यह देश लोगों को पेड़ लगाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सार्वजनिक छुट्टी प्रदान कर रहा है। सही स्थान पर सही पेड़ लगाने के उद्देश्य को ध्यान रख कर ऐसा किया जा रहा है। पिछले हफ्ते ही इस अभियान की शुरुआत की गयी।

15 अरब पेड़ लगाने का लक्ष्य

केन्या में 10 वर्षों में 15 अरब पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार के लक्ष्य के पहले हिस्से के रूप में केन्यावासियों को 100 मिलियन पेड़ लगाने हैं और इसी के लिए विशेष छुट्टी दी गई है। केन्या के पर्यावरण मंत्री सोइपान तुया के अनुसार, यह अवकाश हर केन्याई नागरिक को इस अभियान से जोड़ने की पहल के रूप में दिया गया है। हर केन्याई को कम से कम दो पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि 100 मिलियन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। 2023 के अनुमान के अनुसार केन्या की जनसंख्या पांच करोड़ इक्यावन लाख है, जो कि विश्व की कुल जनसंख्या के 0.68% के बराबर है। जनसंख्या के आधार पर केन्या विश्व के 26वें स्थान पर है।

Kenya Plantation: A country which is giving leave to people to plant trees

मुफ्त में पौधे

केन्या ने वृक्षारोपण के लिए व्यापक तैयारियां की है। वहां की सार्वजनिक नर्सरियों में लगभग 150 मिलियन पौधे तैयार कराये गये हैं। सरकार अपने लोगों को सार्वजनिक क्षेत्रों में रोपण के लिए मुफ्त में पौधे उपलब्ध कराएगी। साथ ही हर केन्यावासी को अपनी जमीन पर रोपण के लिए कम से कम दो पौधे खरीदने के लिए भी प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। राष्ट्रपति विलियम रूटो स्वयं इस अभियान का नेतृत्व आकर रहे हैं। देश के पूर्व में मकुनी में वे पौधारोपण के लिए लोगों को प्रत्साहित करते हुए देखे गए हैं। उनके साथ ही कैबिनेट मंत्रियों और काउंटी गवर्नरों को भी जिम्मेदारी दी गयी है। पूरा केन्याई कैबिनेट इस प्रक्रिया का नेतृत्व अलग लग क्षेत्रों में कर रहा है।

निगरानी इंटरनेट ऐप से

वृक्षारोपण अभियान की निगरानी एक इंटरनेट ऐप के माध्यम से की जा रही है। यह ऐप व्यक्तियों और संगठनों को पौधों की प्रजातियों की उपलब्धता से लेकर, लगाए जाने की तारीख, संख्या सहित तक का रिकॉर्ड सरकार तक पहुंचाता है। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, जाज़ा मिटी ऐप लोगों को उपयुक्त प्रजातियों के साथ साइट का मिलान करके उचित पौधे लगाने में भी मदद कर रहा है। पर्यावरण मंत्री सुश्री तुया ने मीडिया को बताया कि ऐप जारी होते ही इस पर दो मिलियन लोगों का पंजीकरण करा लिया। केन्या के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में फ़िलहाल रोपण नहीं होगा, क्योंकि वहां बाढ़ आई है।

अभी कई देश अल नीनो से प्रभावित है। केन्या में भी अल नीनो बारिश के कारण दर्जनों लोग मारे गए हैं, हजारों लोग विस्थापित हुए हैं और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। केन्या का उत्तरी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।

कुछ दशकों में अंधाधुंध पेड़ों की कटाई

केन्या कुछ उन देशों में शामिल है जहां पिछले कुछ दशकों में अंधाधुंध पेड़ों की कटाई हुई है। लगातार वन क्षेत्र के सिकुड़ने से जीव और वनस्पति दोनों पर खतरा मंडरा रहा है। 1963 में केन्या की आजादी के समय देश का वन क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का 10 प्रतिशत था, जो अब घटकर 6 प्रतिशत हो गया है। सालाना लगभग 12,000 हेक्टेयर भूमि से जंगल गायब हो रहे हैं। अब जाकर होश आया है कि वनों को बेदखल करने का क्या हश्र हो सकता है। इसलिए बड़े पैमाने पर वे परंपराएँ शुरू की गयी हैं, जिनसे देश के जंगलों को बचाया जा सकता है। आम केन्याई ने भी व्यापक रूप से वृक्षारोपण पहल का स्वागत किया है। हालाँकि कुछ चुनौतियों भी हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है जब केन्या की अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है और बहुत से लोग आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जब तक सार्वजनिक वनों में अवैध कटाई को नहीं रोका जाता तब तक वृक्षारोपण की वकालत करना उचित नहीं है।

इस बात के लिए सरकार की आलोचना भी की जा रही है कि हाल ही में कटाई पर से कई प्रकार के प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। सरकार का तर्क है कि केवल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ही वन में कटाई की अनुमति दी गयी है। स्थानीय लकड़ी की मांग को पूरा करने और रोजगार पैदा करने के लिए यह जरूरी था। सरकार अन्य जंगलों में अवैध कटाई करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। सरकार ने उम्मीद जताई है कि दिसंबर में बरसात के मौसम के अंत तक 500 मिलियन पेड़ लगाए जाएंगे।

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