J&K Reservation: इन चार विधेयकों से बदल जायेगी जम्मू और कश्मीर में आरक्षण नीति, पढ़ें पूरी डिटेल
J&K Reservation: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में आरक्षण से संबंधित बड़ा बदलाव करने की तैयारी केंद्र सरकार कर चुकी है। इसके लिए जल्द ही संसद में जम्मू कश्मीर से जुड़े चार संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किए जायेंगे। ये चार विधेयक हैं -
● जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2023
● संविधान (जम्मू कश्मीर) अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) विधेयक 2023
● संविधान (जम्मू कश्मीर) अनुसूचित जाति आदेश (संशोधन) विधेयक 2023
● जम्मू कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023
जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2023
केंद्र सरकार 'जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक-2023' को जल्द ही लोकसभा में पेश करने वाली है। दरअसल हाल ही में जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की विधानसभा में सीटों की संख्या अब 107 से बढ़कर 114 हो गयी है। जिसमें 9 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। जबकि इस विधेयक के तहत अब विधानसभा की दो सीटें कश्मीर से विस्थापितों के लिए और एक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के विस्थापित लोगों के लिए आरक्षित की जायेंगी।

दरअसल इस नये विधेयक में मौजूदा अधिनियम की धारा 14 में संशोधन करके दो नयी धाराएं - 15A और 15B शामिल की जायेंगी। जहां धारा 14 में संशोधन अधिनियम में 107 सीटों को 114 सीटों से प्रतिस्थापित करेगा। वहीं धारा 15A और धारा 15B इन तीन नयी आरक्षित सीटों के बारे में जानकारी देगी। वहीं इन तीनों सीटों के लिए जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल ही उन संबंधित व्यक्ति को नामित कर सकते हैं। यानि यह विधेयक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर विधानसभा में प्रवासियों के लिए सीटों का आरक्षण करेगा।
संविधान (जम्मू कश्मीर) अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) विधेयक 2023
केंद्र सरकार इस विधेयक के तहत जम्मू कश्मीर में अनुसूचित जनजातियों की सूची में गड्डा ब्राह्मण, कोली, पद्दारी जनजाति और पहाड़ी समुदायों को शामिल करने के लिए प्रावधान किये गये है। दरअसल, न्यायमूर्ति जीडी शर्मा आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर ही केंद्र सरकार ने पहाड़ी जातीय जनजाति, पद्दारी जनजाति और कोली और गड्डा ब्राह्मण को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने को मंजूरी दी है। वहीं इससे जुड़े सभी संबंधित मंत्रालय और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुके थी।
पद्दारी जनजाति ज्यादातर कश्मीर के किश्तवाड़ जिले और डोडा जिले के सबसे दूरदराज इलाकों में बसे हुए है। जबकि कोली और गड्डा ब्राह्मण विभिन्न क्षेत्रों में फैले हुए है। पहाड़ी जातीय समूह के लोग ज्यादातर जम्मू क्षेत्र में राजौरी और पुंछ और कश्मीर डिवीजन में बारामूला और कुपवाड़ा के जुड़वां सीमावर्ती जिलों में स्थित है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 9 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। जिसमें जम्मू में 5 और कश्मीर में 4 है।
संविधान (जम्मू कश्मीर) अनुसूचित जाति आदेश (संशोधन) विधेयक 2023
अनुसूचित जाति सूची में नये समूहों को शामिल करने के लिए केंद्र सरकार इससे संबंधित संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इस विधेयक के तहत पूरे वाल्मिकी समुदाय को जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जाति के रूप में शामिल किया जायेगा। क्योंकि इस समुदाय को पूरे देश में अनुसूचित जाति के रूप में आरक्षण प्राप्त था, जबकि जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं है। सरकार अब सभी वाल्मिकियों को एससी समुदाय में शामिल करेगी और उन्हें इस श्रेणी के विभिन्न लाभों का हकदार बनायेगी।
जम्मू कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2023
इस विधेयक के तहत केंद्र सरकार, जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में बदलाव पेश करती है। जिसमें कमजोर और वंचित वर्गों (सामाजिक जातियों) की शब्दावली को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में बदला गया है। इस प्रकार इसका दायरा काफी हद तक बढ़ जाता है। क्योंकि, वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में ओबीसी के लिए कोई आरक्षण नहीं है।
यह विधेयक सरकारी नौकरियों और छात्रवृत्ति में ओबीसी को आरक्षण देने से संबंधित हैं। वर्तमान में, देश के बाकी हिस्सों में ओबीसी कुछ विशेषाधिकारों के हकदार हैं। जबकि इस नये केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में उन्हें पहली बार इसका लाभ मिलेगा।
जबकि आर्थिक रूप से वंचित अल्पसंख्यक समुदाय, जो ज्यादातर जम्मू में रहते हैं। संसद द्वारा विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद वे भी इस आरक्षण के हकदार होंगे। वहीं इस ओबीसी श्रेणी में जम्मू-कश्मीर में रहने वाले जाटों को भी शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया था। वैसे ओबीसी को वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर और कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 27 प्रतिशत आरक्षण का मिलता है।












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