Pinaka: अमेरिका के रॉकेट लॉन्चर जितना मजबूत और शक्तिशाली है भारत का पिनाका
पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर को स्वदेशी तकनीक पर विकसित किया गया है। इसका निर्माण भारत की ही एक सरकारी और दो प्राइवेट कंपनियां टाटा समूह और लार्सन एंड टुब्रो मिलकर करती हैं।
भारत के पहले स्वदेशी डिजाइन वाले पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की पहली खेप आर्मेनिया पहुंच चुकी है। इसे लेकर आर्मेनिया के दुश्मन देश अजरबैजान ने इसकी सप्लाई पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि मोदी सरकार को गुटनिरपेक्ष नीति से काम लेना चाहिए। जबकि अजरबैजान वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान के पक्ष में कश्मीर को लेकर बयानबाजी करता रहता है।
भारत की पिनाका को अमेरिका के हिमार्स के बराबर माना जाता है। वहीं, 26 जुलाई 2023 को अजरबैजानी मीडिया ने दावा किया कि भारतीय मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की पहली खेप ईरान के रास्ते आर्मेनिया पहुंच गई है। क्या है पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम?

पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर को स्वदेशी तकनीक पर विकसित किया गया है। इस रॉकेट लॉन्चर की डिजाइन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के लैब आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने तैयार की है। जबकि इसका निर्माण भारत की ही एक सरकारी और दो प्राइवेट कंपनियां टाटा समूह और लार्सन एंड टुब्रो मिलकर करती हैं।
पिनाका का विकास डीआरडीओ द्वारा 1980 के दशक के अंत में शुरू किया गया था। इसे रूस के मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (जिसे ग्रैड भी कहा जाता है) के विकल्प के रूप में विकसित किया गया था। दरअसल, भारतीय सेना कई दशकों से रूसी BM-21 ग्रेड रॉकेट लॉन्चर को ऑपरेट करती थी। यह रॉकेट लॉन्चर ताकतवर तो है लेकिन इसका लक्ष्य सही नहीं था। एक लक्ष्य को साधने के लिए कई रॉकेट छोड़ने पड़ते थे।
इन्हीं कमियों को दूर करने भारतीय रक्षा मंत्रालय ने 1981 में दो परियोजनाओं को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य था कि भारतीय सेना के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाले आर्टिलरी सिस्टम को स्वदेशी रुप से विकसित करना। जुलाई 1983 में भारतीय सेना ने 1994 के बाद से स्वदेशी आर्टिलरी सिस्टम के साथ हर साल एक रेजिमेंट को शामिल करने की योजना को मंजूरी दे दी। इसे रूसी ग्रैड रॉकेट लॉन्चर की जगह तैनात किया जाना था।
तभी साल 1990 के अंत में पिनाका मार्क-1 के सफल परीक्षण किये गये। वहीं साल 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान पहली बार युद्ध के मैदान में पिनाका मार्क-1 का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया था। इसके बाद 2000 के दशक में सिस्टम के कई रेजिमेंट्स लाये गये।
क्या है इसकी ताकत?
पिनाका के लॉन्चर से 44 सेकंड में 72 रॉकेट को फायर किया जा सकता है। इसकी खास बात यह है कि हर मौसम और परिस्थिति में इसका इस्तेमाल संभव है। इसको लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से चलाना जितना आसान है उतना ही मरुस्थलीय या सूखे पहाड़ों वाले क्षेत्रों में सरलता से इस्तेमाल किया जा सकता है।
पिनाका भगवान शिव के धनुष का नाम था क्योंकि वह अचूक था। इसलिए इसका नाम पिनाका दिया गया है क्योंकि इसका निशाना भी अचूक और विध्वंसक है। गाइडेड तकनीकों से लैस यह लांचर अपने दुश्मनों को संभलने का जरा भी मौका नहीं देता है।
'द इकोनॉमिक्स टाइम्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2014 तक हर साल पिनाका रॉकेट लॉन्चर की लगभग 5000 मिसाइलों का उत्पादन किया जा रहा था। हालांकि 2019 से भारत पिनाका के मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर के एक अपग्रेडेड गाइडेड वेरिएंट का परीक्षण कर रहा है। इस नये वेरिएंट की रेंज करीब 90 किलोमीटर है। इस रॉकेट लॉन्चर को पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर प्रमुख रूप से तैनात किया गया है। टाट्रा ट्रक पर माउंट होने के कारण पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर को एक जगह से दूसरी जगह पर बड़ी तेजी से तैनात किया जा सकता है।
पिनाका के कई वेरिएंट
- पिनाका एमके-I और पिनाका एडीएम: इन दोनों की मारक क्षमता (37.5 किमी), लंबाई 4.88 मीटर (16 फीट), वारहेड का वजन 100 किलोग्राम यानी लगभग हर मामले में बराबर है।
- पिनाका एमके- II: इसकी बात करें तो इसकी मारक क्षमता 60 किमी है। इसकी लंबाई 5.17 मीटर (17 फीट) है। वारहेड का वजह 100 किलोग्राम के करीब है।
- पिनाक एमके-I उन्नत: इसकी मारक क्षमता लगभग 45 किमी है। वहीं इसकी लंबाई 15.5 फीट के करीब है। जबकि वारहेड का वजह 100 किलोग्राम के करीब है।
- गाइडेड पिनाका: इसकी मारक क्षमता की बात करें तो लगभग 75 किमी है। वहीं इसकी लंबाई 17 फीट के करीब है। जबकि वारहेड की वजह की बात करें तो मार्गदर्शन, नेविगेशन और नियंत्रण किट के लिए 100 किलोग्राम (220 पाउंड), इसके साथ अतिरिक्त 15 किग्रा (33 पाउंड) भी वहन किया जा सकता है।
- ईआरआर 122: इसकी मारक क्षमता 40 किमी के करीब है। जबकि लंबाई बाकी सभी पिनाका के वेरियंट से कम है। केवल 9 फिट 7 इंच ही है। जबकि इसका वारहेड का वजन 21 किलोग्राम ही है। पिनाका एमके- II और पिनाक एमके- III के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि, पिनाका एमके- II का परीक्षण हुआ था। जिसमें इसकी मारक क्षमता 90 किमी आंकी गई थी।
कारगिल युद्ध में पिनाका
साल 1999 में भारत-पाकिस्तान (कारगिल युद्ध) जंग के दौरान भारतीय सेना ने पिनाका मार्क-1 संस्करण का जमकर इस्तेमाल किया था। तब पिनाका मार्क-1 ने ऊंचे पहाड़ों पर तैनात पाकिस्तानी बंकरों और चौकियों पर सटीकता से निशाना बनाया था। इसकी अचूक क्षमता देख, सेना इससे बहुत प्रभावित हुई थी। तभी 2000 के बाद पिनाका के और वेरिएंट लाने और इसे उन्नत करने का काम किया गया। पिनाका मार्क-1 ने कारगिल युद्ध में दुश्मन को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था।
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