Sanchar Saathi: फोन चोरी हो जाये या आपकी आईडी पर बनी हो फेक सिम, तो काम आएगा संचार साथी पोर्टल

दूरसंचार विभाग ने मोबाइल फोन यूजर्स को सशक्त बनाने के लिए संचार साथी ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है, जो यूजर को अपने खोए या चोरी हुए फोन को रिपोर्ट और ट्रैक करने के साथ-साथ फर्जी सिम कार्ड का पता लगाने में भी मदद करेगा।

how to use Sanchar Saathi portal for track lost mobile and sim information

Sanchar Saathi: केंद्र सरकार ने मोबाइल डिवाइस की चोरी और फर्जी सिम कार्ड जारी करने से रोकने के लिए संचार साथी ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है। दूरसंचार विभाग के इस पोर्टल पर मोबाइल फोन यूजर्स अपना फोन खोने या चोरी होने पर रिपोर्ट कर सकेंगे। साथ ही, अपने नाम से कितने सिम कार्ड जारी हुए हैं उसका भी पता लगा सकेंगे। सरकार लंबे समय से इस पोर्टल को लाने की तैयारी में थी। इसका ट्रायल काफी लंबे समय से चल रहा था। पिछले कुछ सालों में बढ़ रहे ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों को देखते हुए इस तरह की सर्विस लाना बेहद जरूरी हो गया था।

क्या है संचार साथी?

दूरसंचार विभाग का संचार साथी ऑनलाइन पोर्टल TAFCOP (टेलीकॉम एनालिटिक्स फॉर फ्रॉड मैनेजमेंट एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन) और CEIR जैसी एजेंसियों के सहयोग से ऑपरेट होगा। इसमें यूजर्स अपने खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक या ट्रैक कर सकेंगे। TAFCOP पोर्टल को सबसे पहले केरल और आंध्र प्रदेश में ट्रायल के तौर पर लॉन्च किया गया था। बाद में यह ट्रैकिंग सिस्टम संचार साथी के जरिए पूरे भारत में उपलब्ध हो गया है।

मोबाइल फोन खोने या चोरी होने पर यह पोर्टल CEIR प्रणाली का इस्तेमाल करके खोए हुए डिवाइस को ट्रैक या ब्लॉक कर सकेंगे। इसके लिए यूजर्स को पोर्टल पर दिए जाने वाले दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। केन्द्र सरकार के महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया मिशन को इस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए मजबूती मिलेगी। साथ ही, यूजर्स को अब फोन चोरी होने या गुम होने पर उसके गलत इस्तेमाल की टेंशन नहीं होगी।

डिवाइस की वास्तविकता की जांच

भारत सरकार द्वारा लॉन्च किया गया संचार साथी ऑनलाइन पोर्टल दूरसंचार विभाग (DoT) और प्रौद्योगिकी विकास शाखा (C-DoT) द्वारा विकसित किया गया है। यह एक नागरिक केंद्रित पोर्टल है, जिसका लक्ष्य ग्राहकों को सशक्त बनाना है और सुरक्षा को मजबूत बनाना है। संचार साथी के द्वारा न सिर्फ फोन के चोरी होने या खोने पर रिपोर्ट की जा सकती है, बल्कि यूजर द्वारा खरीदे हुए डिवाइस की वास्तविकता की भी जांच की जा सकती है। यूजर्स को कम कीमत में ऐसे सस्ते रिफर्बिश्ड फोन बेचे जा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल किसी अपराध के लिए किया गया है। इस पोर्टल के जरिए डिवाइस के IMEI (इंटरनेशन मोबाइल इक्वीपमेंट इंफॉर्मेशन) नंबर की जांच की जा सकती है। साथ ही, अगर किसी ने फोन बाहर से इंपोर्ट करके मंगाया है, तो भी यहां उसे चेक किया जा सकता है।

संचार साथी ऑनलाइन पोर्टल फर्जी सिम कार्ड के बाजार पर विराम लगा सकता है। इस पोर्टल के जरिए किसी एक मोबाइल नंबर से लिंक सभी सिम कार्ड की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए यह पोर्टल TAFCOP (टेलीकॉम एनालिटिक्स फॉर फ्रॉड मैनेजमेंट एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन) प्रणाली का इस्तेमाल करता है। इसके जरिए जो नंबर यूजर से संबंधित नहीं हैं, उन्हें ब्लॉक या रिपोर्ट किया जा सकता है। ऐसे में फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर सिम कार्ड जारी कराने पर रोक लग सकती है।

धोखाधड़ी पर लगेगी रोक

पिछले दिनों आई इंडियन साइबर क्राइम कार्डिनेशन सेंटर I4C की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2018 से लेकर अब तक 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए लूटा गया है। साइबर क्रिमिनल्स अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी तरीके से जारी हुए सिम कार्ड का इस्तेमाल कम्युनिकेशन के लिए करते हैं। यही नहीं, क्रिमिनल्स चोरी किए गए मोबाइल डिवाइस का इस्तेमाल कई तरह के आपराधिक कामों के लिए करते हैं। इस पोर्टल के जरिए यूजर बिना जानकारी के अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल नंबर को रिपोर्ट कर सकते हैं। साथ ही, अपने डिवाइस को चोरी होने या खोने के बाद ब्लॉक कर सकेंगे। इसकी वजह से डिवाइस और सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने हाल ही में सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स से यूजर्स को आने वाले फर्जी कॉल्स और मैसेज पर भी लगाम लगाने के लिए कहा है। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियां AI बेस्ड फिल्टर लगाने की तैयारी कर रही हैं, जिससे फर्जी कॉल्स और मैसेज को रोका जा सकेगा। दूरसंचार विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर महीने करीब 1,000 से लेकर 1,500 करोड़ रुपये का ऑनलाइन फ्रॉड किया जा रहा है।

केवल भारत में है ऐसा सिस्टम

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    इस तरह का सिस्टम फिलहाल केवल भारत में ही है। अमेरिका की फेडरल कम्यूनिकेशन कमीशन (FCC) को रिपोर्ट करके खोए या चोरी हुए डिवाइस को ब्लॉक करने की सुविधा है, लेकिन यह संचार साथी की तरह आसान और ईजी टू यूज नहीं है। इसके अलावा टेलीकॉम कंपनियों के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके भी चोरी या खोए हुए डिवाइस को रिपोर्ट किया जा सकता है। यूरोप में भी इस तरह का ईजी-टू-यूज ऑनलाइन पोर्टल नहीं है। इसके लिए ग्राहकों को टेलीकॉम कंपनियों को रिपोर्ट करना होगा है या फिर वो मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्ट में मौजूद डिवाइस ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं।

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