LPG Import: एलपीजी में भारत आयात पर कितना निर्भर, जानें कहां से होता है आयात

रक्षाबंधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में 200 रूपये की कटौती करते हुए लोगों को महंगाई से कुछ राहत दी है। इसके साथ-साथ उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली सब्सिडी को भी बढ़ाकर 400 रूपये कर दिया है, जो अभी तक 200 रूपये थी यानि कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की सब्सिडी में भी 200 रूपये का इजाफा हुआ है। इसका मतलब यह हुआ कि आम आदमी को प्रति गैस सिलेंडर में 200 रूपये की छूट व उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 400 रूपये की छूट मिलेगी। इस छूट का फायदा 33 करोड़ घरेलू एलपीजी सिलेंडर धारकों को होगा, जिसमें से लगभग 9.6 करोड़ उज्ज्वला योजना के लाभार्थी भी शामिल हैं।

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एलपीजी में भारत की आयात पर निर्भरता
एलपीजी यानि लिक्विफाइड (द्रवित) पेट्रोलियम गैस को प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल शोधन से प्राप्त किया जाता है। यह अनेक हाइड्रोकार्बन गैसों का मिश्रण होती है और इसको अधिकतर रसोई गैस के रूप में जाना जाता है। यह घरों में खाना बनाने, गरम करने वाले उपकरणों तथा कुछ वाहनों में ईंधन के रूप में प्रयोग होती हैं। भारत में कुल एलपीजी खपत की 90 प्रतिशत एलपीजी घरों में, 8 प्रतिशत औद्योगिक इस्तेमाल में और 2 प्रतिशत वाहनों में प्रयोग होती हैं।

अगर वित्तीय वर्ष 2021-22 की बात करें तो इस वर्ष पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में एलपीजी का कुल हिस्सा लगभग 13 प्रतिशत था। मौजूदा वर्ष भारत में एलपीजी का उत्पादन 12.2 मिलियन मेट्रिक टन और खपत 28.3 मिलियन मेट्रिक टन हुई। यानि इस वर्ष खपत की पूर्ति हेतु 16.1 मिलियन मेट्रिक टन (कुल खपत का 56.5 प्रतिशत) एलपीजी का आयात करना पड़ा।

इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत ने 12.8 मिलियन मेट्रिक टन एलपीजी का उत्पादन किया जबकि खपत 28.5 मिलियन मेट्रिक टन हुई। इसका तात्पर्य यह हुआ कि इस वर्ष भी भारत ने 15.7 मिलियन मेट्रिक टन एलपीजी का आयात किया। यानि कुल मिलाकर भारत अपनी कुल एलपीजी खपत की लगभग 55 प्रतिशत से भी ज्यादा एलपीजी आयात करता है।

अगर पिछले 10 वर्षों का आकलन करें तो वर्ष 2011-12 के दौरान भारत में 15.3 मिलियन मेट्रिक टन एलपीजी की खपत हुई, जो वर्ष 2022-23 तक लगभग 85 प्रतिशत बढ़कर 28.5 मिलियन मेट्रिक टन हो गई। वहीं 2011-12 में एलपीजी उत्पादन लगभग 10 मिलियन मेट्रिक टन था, जो 2022-23 तक सिर्फ 12.8 मिलियन मेट्रिक टन ही हुआ। यानि इन 10-11 वर्षों में जहां खपत में 85 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं उत्पादन में मात्र 30 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई।

क्यों बढ़ रही है खपत
वर्ष 1977 में जहां भारत में सिर्फ 32 लाख घरों में एलपीजी कनेक्शन था, वहीं मात्र 7 वर्षों में यानि 1984 में इसकी संख्या तीन गुना बढ़कर 88 लाख पहुंच गई। इसके साथ-साथ 1990 में 1 करोड़ 96 लाख हो गई और मार्च 2023 तक घरेलू एलपीजी के कनेक्शनों की संख्या लगभग 33 करोड़ पहुंच चुकी है। यानि वर्ष 1977 से वर्ष 2023 तक लगभग 46 वर्षों में एलपीजी गैस कनेक्शनों की संख्या करीब 100 गुणा बढ़ चुकी है। जिसके कारण एलपीजी की खपत बढ़ती जा रही है।

एलपीजी का आयात
भारत अपनी कुल खपत का लगभग 55-60 प्रतिशत एलपीजी आयात पर निर्भर है। भारत में एलपीजी की खपत में तो लगातार वृद्धि हो रही है, परंतु इसके उत्पादन में अपेक्षाकृत वृद्धि बहुत कम है। वर्ष 2010-11 में भारत जहां 41 प्रतिशत एलपीजी आयात पर निर्भर था, वहीं वर्ष 2022-23 में एलपीजी आयात निर्भरता 60 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

एलपीजी के आयात की बात करें तो कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) वित्तीय वर्ष 2012-13 से वर्ष 2022-23 तक भारत के लिए शीर्ष तीन एलपीजी निर्यातक देश बने हुए हैं। वर्ष 2012-13 में भारत की कुल एलपीजी आयात में 32 प्रतिशत हिस्सेदारी कतर देश की थी, जो 2022-23 में गिरकर 27 प्रतिशत हो गई, लेकिन कतर अभी भी भारत का शीर्ष एलपीजी आपूर्तिकर्ता देश बना हुआ है।

वर्ष 2012-13 में सऊदी अरब भारत को एलपीजी आपूर्तिकर्ता (कुल एलपीजी आयात का 25 प्रतिशत) में दूसरे स्थान पर था, जो 2022-23 में इसकी आयात हिस्सेदारी घटकर 19 प्रतिशत आ गई है और यह भारत को एलपीजी बेचने वाले देशों की सूची में तीसरे स्थान पर आ गया है।

इसके साथ-साथ यूएई (संयुक्त अरब अमीरात), जो 2012-23 में भारत के कुल एलपीजी आयात में 21 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था, वह 2022-23 में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

अगर हम एलपीजी आयात पर वित्तीय स्थिति को देखें तो 2022-23 में भारत ने 18.3 मेट्रिक टन एलपीजी आयात किया, जिसका मूल्य 13.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। वहीं एलपीजी का यह आयात पेट्रोलियम उत्पाद के कुल आयात का लगभग 41 प्रतिशत और मूल्य की दृष्टि से 51 प्रतिशत है।

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