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होलियाना मूड में अरविंद केजरीवाल का स्वप्न साक्षात्कार

आज होलियाना मूड में हमारे स्टूडियो में उपस्थित हैं आम आदमी प्रोडक्शन हाउस के मालिक अरविंद केजरीवाल। केजरीवाल की पहली फिल्म ‘शीला की कहानी' दिल्ली के सिनेमाहालों में सिर्फ 49 दिनों तक चल पायी थी। यह फिल्म कारोबार तो ज्यादा नहीं कर पायी थी पर दूसरों के कारोबार को ठप करने का काम जरूर किया था। फिल्म के हीरो केजरीवाल लगातार संघर्ष करते रहे। फुटपाथ पर सोये, विरोध का सामना किया।

Holi Special: Satirical Interview of Arvind Kejriwal in dream

आखिरकार उनकी अगली फिल्म 'पांच साल केजरीवाल' ने चुनावी बॉक्स ऑफ‍िस पर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये। सारे फिल्म समीक्षक सकते में आ गए। एक तरफ फिल्म बम्पर चल रही है, तो दूसरी तरफ फिल्म निर्माता केजरीवाल साहब पर होलियाना मूड में आ गये हैं। और इसी मूड में वो मेरे सपने में आये। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनका साक्षात्कार कर डाला। प्रस्तुत हैं साक्षात्कार के कुछ अंश-

प्रश्न- पहले तो फिल्म की नायाब सफलता की शुभकामनाएं।

उत्तर- जी धन्यवाद। भारत माता की जय।

प्रश्न- पहले तो इस फिल्म में आपके गेटअप की बात करते हैं। दोनों फिल्मों में विलेन बदले लेकिन आपका गेटअप वही रहा। वो क्यों?

उत्तर- आपकी बात गलत है। लगता है आपने गौर नहीं किया। इस बार मैंने दो मफलर बांधे थे। एक गले में बांधा था दूसरा कान में।

प्रश्न- अरे वाह पर दो मफलर बाँधने के पीछे कोइ विशेष कारण था?

उत्तर- जी हाँ। स्क्रिप्ट की डिमांड थी। पिछली फिल्म में हमने एक मफलर बांधा था तो फिल्म 28 सिनेमाहालों में चली थी। इस बार दो मफलर बांधे तो हमने दोगुने सिनेमा हॉल कवर किये हैं। मफलर तो सिम्बोलिक स्टंट था। गले वाला मफलर भाजपा का प्रतीक था। जो उनके गले की फांस साबित हुआ। कान वाला मफलर फिल्म के दुसरे विलेन कांग्रेस के चुनाव चिन्ह का प्रतीक था। इन्होने सालों साल जनता के कानों के नीचे अपना चुनाव चिन्ह रसीद किया है। इस बार हमने कानों को ऐसा बांधा कि विलेन छू तक नहीं पाया।

प्रश्न- आप इस बार कई टीवी चैनलों पर फिल्म का प्रमोशन करने गए। वहां के एसी स्टूडियो में भी आपने मफलर नहीं उतारा?

उत्तर- जी अब प्रमोशन का ट्रेंड बदला है। हमको उसी गेटअप में प्रमोशन करने के लिए जाना होता है, जो फिल्म में रहता है। और हम तो धुन के पक्के हैं साब। एक बार जो मफलर बाँध लिया तो क्लाइमेक्स (शपथ ग्रहण) में ही उतारते हैं।

प्रश्न- अभी एक फिल्म आयी थी ‘अच्छे दिन'। उसके हीरो नरेन्द्र मोदी ने ‘आयो रे आयो रे म्हारो रंगीलो मेहमान' गीत में जो कोट पहना था वह चार करोड़ में नीलाम हुआ। आपके अन्दर मफलर को लेकर हीन भावना नहीं आयी कभी?

उत्तर- क्यूँ आयेगी सर जी, आपको बता दूँ कि जल्द ही हम अपने मफलरों की प्रदर्शनी लगायेंगे। जहाँ मेरे सारे मफलर रखे रखे जायेंगे। जहाँ पर जनता मेरा मफलर बाँध कर फोटो खिंचवा सकेगी। सिर्फ सौ रूपये में। मैं अपने मफलरों को कतई नहीं बेचूंगा। किराए पर उठाऊंगा। मफलर टिकाऊ होता है। मैं इसके टिकाऊपन का फायदा उठाऊंगा। हमारा प्रोडक्शन हाउस तो गरीब है सर इसमें उद्योगपतियों का पैसा नहीं लगा नहीं है। हमारी माली हालत ‘थाली' से काफी दुरुस्त हुयी थी। अब मफलर से होगी।

प्रश्न- आजकल स्वाइन फ्लू फ़ैल रहा है। सुनने में आया है आप की कोई योजना है?

उत्तर- जी हाँ, मैं जनता से अनुरोध करता हूँ की वह मास्क की जगह मफलर पहनना शुरू करें। इससे दो फायदे हैं। एक तो आप खुल कर खांस लेंगे और दूसरा कीटाणु भी बाहर नहीं निकल पायेंगे।

प्रश्न- आपके प्रोडक्शन हाउस पर आरोप लगता है कि यह पुरुषवादी हैं। इस बार राखी बिड़ला को आपने मंत्री से दूर रखा। क्यों?

उत्तर- ये आरोप पिछली बार राखी सावंत से लगाए थे। क्योंकि हमने पिछली फिल्म में राखी सावंत की जगह राखी बिड़ला को साइन कर लिया था। हम विवादों में नहीं पड़ते। इसलिए राखी को बाहर रखा। जहाँ तक पुरुषवादी मानसिकता की बात है। तो हमारा तो आम आदमी प्रोडक्शन हाउस है। और औरत खुद को आम नहीं समझती। आप ही बताइये क्या हम 'आम आदमी ख़ास औरत प्रोडक्शन हाउस' खोलते?

प्रश्न- अरविन्द जी, आप के ऊपर आरोप लगाया जाता है कि आप कसमें बहुत खाते हैं। आपने बच्चों की कसम खाई थी की न समर्थन दूंगा और न समर्थन लूँगा उसके बावजूद आपने कांग्रेस के प्रोडक्शन हाउस से मदद ली। क्या सफाई देंगे आप?

उत्तर- ये हमारा रियलिस्टिक अप्रोच है। मैं यह साबित करना चाहता था की कसम-वसम में कोई दम नहीं होता। अगर कोइ नेता या हीरो कसम खाता है तो आप कभी भी विश्वास मत करियेगा।

प्रश्न- देश के बड़े सुपर स्टार मोदी के बारे में कुछ कहना है आपको?

उत्तर- मैं उनका बहुत सम्मान करता हूँ। उन्होंने झाड़ू लगाकर देश भर में मेरी फिल्म का प्रमोशन किया है। बड़ी बहन किरण बेदी को विपक्ष की हीरोइन बना कर उन्होंने हमारी फिल्म को हिट करवाया है।

प्रश्न- आपकी अगली फिल्म कौन सी आने वाली है?

उत्तर- अभी तो हम ‘पांच साल केजरीवाल' की सक्सेज पार्टी इंजॉय कर रहे हैं। लेकिन हमारी अगली फिल्म की पूरी स्क्रिप्ट तैयार है। फिल्म का नाम है -‘फ्रॉम लोकपाल टू लोकसभा' इसका एक गीत भी कम्पोज हो चुका है -‘हाथी घोड़ा पालकी जय हो केजरीवाल की। लोकसभा हमको पहुँचाओ जय हो जन लोकपाल की...

प्रश्न- इस फिल्म में आप अपना गेट अप बदलेंगे या वही रखेंगे?

उत्तर- इस बार हीरो मफलर की ही पेंट-शर्ट सिलवायेगा। और पूरे शरीर पर मफलर बांधेगा। क्योंकि इस बार पूरे देश के सिनेमा हालों में छा जाने की इरादा है।

प्रश्न- अबकी होली पर क्या प्लान है आपका?

उत्त्र- मुझे तो कीचड़ उचालना है। क्या होली क्या दीवाली। यह कीचड़ तब तक चलेगा जब तक की हमारी अगली फिल्म ‘फ्रॉम लोकपाल टू लोकसभा' देश भर में रिलीज नहीं हो जाती।

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