Women Cricket: महिला क्रिकेट का इतिहास, कितना अंतर है पुरुषों की क्रिकेट से?
पुरुष क्रिकेट के साथ-साथ भारत सहित दुनिया में महिला क्रिकेट को भी तवज्जों मिलनी शुरू हो गयी है। हाल के वर्षों में इस खेल की मीडिया कवरेज सहित लोकप्रियता में इजाफा हुआ है।

Women Cricket: महिला क्रिकेट दुनियाभर में लोकप्रिय हो गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भारत, पाकिस्तान, वेस्टइंडीज और श्रीलंका सहित कई देशों द्वारा क्रिकेट के इस फॉरमेट को खेला जाता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ही महिला टीमों के लिए अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट आयोजित करवाता है, जिसमें महिला क्रिकेट विश्वकप और महिला T-20 विश्वकप शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अलावा महिला क्रिकेट क्लब और घरेलू स्तर पर भी खेला जाता है।
महिला क्रिकेट का क्या है इतिहास
पुरुष क्रिकेट 16वीं शताब्दी से और महिलाओं द्वारा क्रिकेट 18वीं शताब्दी से खेला जा रहा हैं। महिला क्रिकेट का पहला रिकॉर्डेड मैच 1745 में इंग्लैंड के ससेक्स में खेला गया था। 20वीं शताब्दी में यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला जाना शुरू हुआ और महिलाओं द्वारा खेला गया पहला रिकॉर्डेड अंतरराष्ट्रीय मैच 1934 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ था। वह एक टेस्ट मैच था।
हालांकि, 1926 में महिला क्रिकेट संघ की स्थापना हो गयी थी। जबकि पहला महिला क्रिकेट विश्वकप 1973 में इंग्लैंड में आयोजित किया गया। 1993 में जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) का गठन हुआ तो महिला क्रिकेट को आधिकारिक रूप से मान्यता दी गयी।
भारत में महिला क्रिकेट का सफर
भारत की महिला क्रिकेट टीम ने अपना पहला टेस्ट मैच 1976 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था। भारत, 1978 के विश्वकप की मेजबानी कर चुका है, जहां भारत महिला टीम ने अपना वनडे डेब्यू भी किया। भारत का पहला T-20 मैच 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ था। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने दो मौकों - 2005 और 2017 में महिला क्रिकेट विश्वकप के फाइनल में जगह बनाई है और रिकॉर्ड 7 बार महिला एशिया कप जीता है। ICC की ODI रैंकिंग के अनुसार फिलहाल दुनिया की 10 सबसे सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटरों में दो भारतीय हैं। रैंकिंग के अनुसार छट्ठे नंबर पर हरमनप्रीत कौर और सातवें नंबर पर स्मृति मंधाना है।
महिला क्रिकेट कैसे अलग है पुरुषों के फॉरमेट से
गेंद का वजन: महिला और पुरुष क्रिकेट दोनों फॉरमेट में जिन गेंदों का प्रयोग किया जाता हैं, उनका वजन अलग-अलग होता हैं। महिला क्रिकेट में जिस गेंद से खेला जाता है उसका वजन कम जबकि पुरुष क्रिकेट में उसका वजन ज्यादा रखा जाता है। महिला क्रिकेट में गेंद का भार 140-151 ग्राम के बीच होता है, वहीं पुरुष क्रिकेट में गेंद का वजन 155.9-163 ग्राम के बीच होता है।
बाउंड्री और इनर सर्कल की दूरी: महिला और पुरुष क्रिकेट में बाउंड्री साइज में फर्क होता है। महिला क्रिकेट में यह लगभग 54 से 70 गज तक होती है, जबकि पुरुषों के लिये यह 65 से 90 गज तक। महिला क्रिकेट में ग्राउंड का इनर सर्कल पिच से लगभग 25 गज की दूरी पर होता है, वही पुरुष क्रिकेट में लगभग 30 गज की दूरी होती है।
DRS: डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) को पहले महिला क्रिकेट में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी लेकिन मार्च 2022 में ICC ने डीआरएस की अनुमति दे दी है।
सैलरी: पुरुषों के फॉरमेट में क्रिकेटर अधिक पैसा कमाते हैं। हालांकि, BCCI ने हाल ही में घोषणा कर बताया है कि दोनों फॉरमेट में सैलरी बराबर दी जायेगी। फिलहाल टेस्ट मैच में ₹15 लाख, वनडे मैच में ₹6 लाख और टी-20 मैच में ₹3 लाख सैलरी दी जाती है। भारत से पहले न्यूजीलैंड में भी महिला क्रिकेटर को पुरुष खिलाड़ियों के समान पेमेंट देने की घोषणा हो चुकी है, मगर ICC के अधीन आने वाले अन्य देशों की क्रिकेट संस्थाओं में ऐसा प्रावधान अभी नहीं किया गया है।
टेस्ट मैच: महिला और पुरुष क्रिकेटरों के टेस्ट मैच में भी अंतर होता है। महिलाओं का टेस्ट मैच पांच की बजाय चार दिन का होता है और हर दिन 90 की जगह 100 ओवर किए जाते हैं। इस तरह से पूरा मैच अधिकतम 450 ओवरों की जगह 400 ओवरों का होता है।
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फील्डर एब्सेंट: यदि किसी फील्डर को चोट या अन्य परिस्थितियों के कारण मैदान छोड़ना पड़ता है, तो इसे "फील्डर एब्सेंट" कहा जाता है। महिला टेस्ट क्रिकेट में, इस स्थिति में एक खिलाड़ी के लिए मैदान पर लौटने के लिए अधिकतम समय सीमा 110 मिनट है, जबकि पुरुषों के टेस्ट क्रिकेट में समय सीमा 120 मिनट है।
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