IC 814 Hijack: 23 साल पहले अपहरण हुआ था इंडियन एयरलाइन्स का विमान, जानें कहां हैं रिहा हुए आतंकी
विमान हाईजैक करने वाले आतंकवादियों ने यात्रियों को छोड़ने के बदले भारतीय जेल में बंद अपने साथियों को छोड़ने की मांग रखी थी, जिसे यात्रियों के परिजनों के दवाब में वाजपेयी सरकार को स्वीकार करना पड़ा।

IC 814 Hijack: आईसी 814, शायद आपको याद नहीं हो, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंडियन एयरलाइन्स की इसी फ्लाइट को दिसंबर 1999 में काठमांडू से हाइजैक कर कंधार ले जाया गया था।
आप सोच रहे होंगे यह बात हम आज क्यों कर रहे हैं? तो बता दें कि ठीक 23 साल पहले दिसंबर के अंतिम सप्ताह में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा इस विमान अपहरण को अंजाम दिया गया था। विमान में मौजूद यात्रियों की सुरक्षा के बदले भारत सरकार को 3 आतंकियों को रिहा करना पड़ा था। इन आंतकियों में मौलाना मसूद अजहर, अहमद ज़रगर और शेख अहमद उमर सईद का नाम शामिल था। आखिर 23 साल पहले छोड़े गये ये आतंकी आजकल कहां है और क्या कर रहे हैं? इससे पहले हम जान लेते हैं कैसे हुआ था वह प्लेन हाईजैक?
कब और कैसे हुआ था हाईजैक?
24 दिसंबर 1999 को काठमांडू के त्रिभुवन हवाईअड्डे से IC814 ने 176 यात्रियों समेत विमान में सवार चालक दल के 15 सदस्यों को लेकर दिल्ली के लिये उड़ान भरी, लेकिन भारतीय वायु क्षेत्र में पहुंचते ही पता चला कि यह विमान हाईजैक हो गया है। चूँकि विमान में दिल्ली पहुंचने तक का ही ईधन बचा था लेकिन विमान को हाइजैक करने वाले आतंकी उसे कांधार ले जाना चाहते थे। इसलिये आपातकालीन स्थिति में विमान को अमृतसर में उतारा गया। हालांकि अमृतसर में भी विमान में ईधन नहीं भर सका। अमृतसर का सबसे करीबी हवाई अड्डा पाकिस्तान का लाहौर था। आतंकियों ने विमान के पायलटों को लाहौर जाने के लिये विवश कर दिया। मगर अभी विमान में सवार यात्रियों के लिये मुश्किलें शुरू ही हुई थीं।
दरअसल, इस दौरान आतंकियों ने एक यात्री रूपिन कात्याल को क्रूरता पूर्वक मार दिया और विमान के चालक दल के सदस्यों को भी घायल कर दिया था। दूसरी तरफ खाने-पीने का सामान भी लगभग खत्म हो चुका था। भूखे-प्यासे यात्रियों के साथ जब विमान ने लाहौर में उतरने का प्रयास किया तो पाकिस्तान सरकार ने इसी अनुमति नहीं दी। अतः भारत सरकार ने पाकिस्तान से अनुरोध किया तब जाकर पाकिस्तान में विमान में ईधन भरवाया गया। इसके बाद यह तुरंत वहां से ओमान के लिये रवाना हो गया।
इस हाइजैक हो चुके विमान को ओमान में भी उतरने की अनुमति नहीं दी गयी। जिसके बाद आतंकियों ने उसे दुबई में उतारने का प्रयास किया। शुरुआत में दुबई प्रशासन ने इसके लिये साफ़ इनकार कर दिया मगर बाद में यात्रियों की बुरी हालत और भारत सरकार के प्रयासों के चलते वहां विमान उतारा गया। दुबई में खाने-पीने के सामान के साथ दवाइयां विमान में भेजी गयी। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों सहित 27 यात्रियों को रिहा किया गया। साथ ही रूपिन कात्याल के पार्थिव शरीर को भी प्रशासन को सौंपा गया।
दुबई के बाद, विमान ने एक बार फिर से उड़ान भरी और 25 दिसंबर 1999 की सुबह यह कांधार पहुंच गया। उस समय आफगानिस्तान में तालिबान का शासन था। इस घटना को हरकत उल मुजाहिद्दीन के आतंकियों ने अंजाम दिया था। आतंकवादियों ने यात्रियों को छोड़ने के बदले भारतीय जेल में बंद अपने साथियों मौलाना मसूद अजहर, अहमद ज़रगर और शेख अहमद उमर सईद को छोड़ने की मांग रखी। इसके बाद 31 दिसंबर को भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यात्रियों को छुड़ाने के बदले 3 आतंकवादियों को छोड़ने का निर्णय लिया। बाद में ये तीनों आतंकी भारत के लिए नासूर बनकर उभरे, जिन्होंने भारत को कई बार जख्म दिये।
मसूद अजहर और जैश-ए-मोहम्मद
कई आतंकी संगठनों से जुड़े रहे मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं कि मसूद उनके देश में छिपा है। जबकि मसूद पाकिस्तानी सोशल मीडिया नेटवर्क लगातार जहर उगलता नजर आता है। युवाओं को कट्टरता के रास्ते पर चलने के लिये भी उकसाता है। भारतीय जेल से रिहा होने के बाद मसूद अजहर ने पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया। जिसके माध्यम से उसने भारत के खिलाफ कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया। इसमें भारतीय संसद पर हमला, मुंबई हमला, पठानकोट एयरबेस हमला और पुलवामा जैसे हमले शामिल हैं।
फिलहाल मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का चीफ है और इसकी स्थापना 2000 में उसने खुद की थी। गौरतलब है कि ISI, तालिबान और अलकायदा ने मसूद को इस आतंकी संगठन को खड़ा करने में मदद की। 2002 में एक अमेरिकी अखबार के मुताबिक मसूद अजहर और ओसामा बिन लादेन के पुराने रिश्ते थे। इसके आतंकी जम्मू-कश्मीर समेत भारत के कई हिस्सों में आतंकी हमलों में शामिल रहे हैं। दिसंबर 2001 में इस आतंकी संगठन ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर ही भारतीय संसद पर आत्मघाती हमले को अंजाम दिया था। इसके बाद फरवरी 2002 में अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल की गर्दन काटकर हत्या करने में भी जैश का हाथ था। ग्लोबल टेररिज्म डाटाबेस के अनुसार, इस आतंकी संगठन ने 2000 से 2017 के बीच भारत में 73 आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया। इन 17 सालों में हुये 73 हमलों में 294 लोगों की मौत हो चुकी हैं।
दूसरा आतंकी - मुश्ताक अहमद जरगर
कंधार विमान हाइजैक में मुश्ताक अहमद जरगर को भी रिहा किया गया था। मुश्ताक को लटरम भी कहा जाता है। इस आतंकवादी पर कश्मीर घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने के कई आरोप हैं। श्रीनगर में पैदा हुआ मुश्ताक अहमद 1985 में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हुआ था। 1991 में मुश्ताक ने अल उमर मुजाहिद्दीन नाम से एक आतंकी संगठन खड़ा किया।1989 में इस आतंकी ने भारत के तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का अपहरण किया था। 15 मई 1992 को मुश्ताक को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन 1999 में कंधार कांड के वक्त उसे रिहा करना पड़ा।
2017 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने थाईलैंड दौरे में पाकिस्तान को 154 आतंकियों की सूची सौंपी थी। इनमें लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद और मसूद अजहर सहित मुश्ताक जरगर का नाम भी शामिल था। आजकल मुश्ताक अहमद जरगर जैश ए मोहम्मद के साथ मिलकर काम कर रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का मुजफ्फराबाद शहर इस वक्त उसका ठिकाना बना हुआ है।
तीसरा आतंकी - अहमद उमर सईद शेख
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अहमद उमर सईद शेख पाकिस्तानी मूल का ब्रिटिश आतंकी है। उमर शेख लंदन में पैदा हुआ था। 11 सितम्बर 2001 अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर जो हमले हुये, उनमें भी उमर शेख का नाम आया था। पाकिस्तान के पूर्व-राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने अपनी आत्मकथा 'इन द लाइन ऑफ फायर' में भी उमर के डबल एजेंट होने का जिक्र किया है। उमर शेख भी डेनियल पर्ल की हत्या में शामिल था और उसे पाकिस्तान में फांसी की सजा भी सुनाई गयी थी। हालांकि, 2020 में पाकिस्तान की सिंध हाईकोर्ट ने उसे रिहा कर दिया। लंदन टाइम्स के अनुसार, उमर शेख कोई छोटा आतंकवादी नहीं है। उसकी पहुंच पाकिस्तान के सैन्य और खुफिया विभाग के उच्च अधिकारियों तक हैं।
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