Hindus in Pakistan: पाकिस्तान के सोढ़ा राजपूत: देश अलग, लेकिन रिश्ते में "साथ साथ हैं"
Hindus in Pakistan: भारत और पाकिस्तान के नक़्शे 1947 से ही अलग-अलग हैं, लेकिन पाकिस्तान में रह रही कई हिंदू जातियां आज भी भारत के सांस्कृतिक रीति रिवाज का ही पालन करती हैं। कई जातियां तो शादी विवाह के लिए भारत की ओर ही रुख करती हैं। पाकिस्तान के सोढ़ा राजपूत भी अपने समाज के बीच ही शादी करना पसंद करते हैं।
राजस्थान की पाकिस्तान के साथ 1070 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। पश्चिम और उत्तर-पश्चिम तक यह पाकिस्तान में सिंध और पंजाब के प्रांतों से घिरा है। पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिलों जैसे बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर तथा अन्य जिलों जैसे जोधपुर, पाली, जालोर इत्यादि के निवासियों का पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मीरपुर खास, थारपारकर, अमरकोट और चाचरो के लोगों के साथ आज भी खून का रिश्ता है। हर साल क्षेत्र में लगभग एक दर्जन सीमा पार विवाह होते हैं। पाकिस्तानी महिलाओं की ससुराल भारत में है तो है तो भारतीय लड़कियों की ससुराल पाकिस्तान में। इसी तरह की प्रथा चारण, माली और मेघवाल जैसे अन्य समुदायों में भी है।

नाम अलग पर संस्कृति एक
पाकिस्तान के सिंध और भारत के मारवाड़ के निवासियों का न केवल साझा सांस्कृतिक और सामाजिक इतिहास है, बल्कि उनके बीच सीमा पार रक्त संबंध भी हैं। भाषा, वेशभूषा और संस्कृति के आधार पर किसी भी पक्ष के लोगों के बीच अंतर नहीं किया जा सकता, क्योंकि दोनों क्षेत्रों में सांस्कृतिक समानताएं हैं। सीमा के दोनों ओर सिंधी, धाती और मारवाड़ी बोली जाती हैं। सीमा के दोनों ओर सोढ़ा राजपूत और सिंधी मुसलमान रहते हैं। बाजरा अभी भी दोनों ओर का मुख्य भोजन है। दोनों तरफ थार रेगिस्तान का वही सूखा विस्तार मौजूद है। अधिकांश पारंपरिक और धार्मिक अनुष्ठान भी समान हैं। अक्सर सीमा पार के रिश्तेदारों की शोक सभाएं देखी जा सकती हैं।
जहां विभाजन ने लोगों को शारीरिक रूप से दूर कर दिया है, वहीं खून के संबंधों ने उन्हें भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़े रखा है। सोढा राजपूत वंश सिंध के थारपारकर जिले तथा राजस्थान व गुजरात के मूल निवासी है। वर्तमान में पाकिस्तान में 25 से 30 हजार परिवार हैं, जिनके सात-आठ सौ परिवार भारत आते ही रहते हैं।
अलग कुल गोत्र में विवाह करने की मजबूरी
सनातन धर्म के नियमों के तहत अन्य हिंदू जातियों की तरह सोढ़ा क्षत्रियों में भी अपने कुल और गोत्र में शादियाँ नहीं होती हैं। इसलिए वे शादियों के लिए मुख्यत: राजस्थान और गुजरात के अन्य क्षत्रिय कुलों पर निर्भर होते हैं। वे परिवार में शादी योग्य लड़के और लड़कियों का रिश्ता खोजने के लिए भारत आते हैं।
पाकिस्तान के सोढ़ा क्षत्रिय परिवार के लगभग हर घर की रिश्तेदारी भारत में है। सोढ़ा समाज की कुलदेवी पाकिस्तान स्थित हिंगलाज माता हैं, जो हिंदुओं का सिद्ध शक्तिपीठ हैं। शादी के बाद सोढ़ा परिवार का लड़का या लड़की सबसे पहले अपनी कुलदेवी हिंगलाज माता का दर्शन करने पाकिस्तान जाते हैं। वैसे ही पाकिस्तान में विवाहित हिंदू भी राजस्थान में अपनी कुलदेवी के दर्शन के लिए आते हैं।
वीजा ने बढ़ाई परेशानी
सोढा राजपूत के अलावा पाकिस्तान में निवास कर रहे सिंधी मुसलमानों के कुछ वर्ग भी इसी परिपाटी का पालन करते हैं। शादी में बारातें आती हैं। इसी के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली थार एक्सप्रेस को "मैरिज एक्सप्रेस" का उपनाम दिया गया था। हालांकि अभी इस ट्रेन का संचालन बंद है। जिसके कारण आवागमन पर अंकुश लगा है। दूसरी ओर वीजा की समस्याओं के चलते दोनों ओर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर सोढ़ा राजपूत परिवारों को। भारत सरकार ने 900 सोढ़ाओं को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। उन्हें भारत आने के लिए अब वीजा नहीं दिया जाएगा।
पिछले चार - पांच वर्षों में सोढ़ा राजपूतों को केंद्र सरकार वीजा नहीं दे रही है, क्योंकि पाकिस्तानी हिंदू भारत आते हैं तो तय अवधि से अधिक समय तक रह जाते हैं। सोढ़ा राजपूतों का कहना है कि भारत में रिश्ता खोजने और तय करने में समय लग जाता है, इसलिए वे कुछ अधिक समय तक रह जाते हैं। हालाँकि इसके लिए वे कानूऩन वीजा बढ़वाते हैं। वे भारत में गैर-कानूनी तरीके से नहीं रहते। मगर गत 5 पाँच वर्षों से सरकार द्वारा अपनाई गई इस वीजा नीति के कारण भारत और पाकिस्तान के कई लोग अपने परिवार के उत्सव और दुख में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।












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