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Healthy Food: खाने से है आपके जीने का संबंध, कार्बोहाइड्रेट और फैट को लेकर नई खोज

Healthy Food: आप कितना जिएंगे, यह आपके खाने पर निर्भर करता है। जापान में नागोया यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक नए अध्ययन से पता चला है कि जो लोग ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और वसा का ज्यादा सेवन करते हैं, उनका जीवनकाल कम हो सकता है। यह बात महिलाओं और पुरुषों के साथ अलग अलग लागू होती है। हम भारतीय कार्बोहाइड्रेट, शर्करा और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करते हैं और प्रोटीन, फल और सब्जियां कम खाते हैं।

हाल ही में प्रकाशित नागोया यूनिवर्सिटी की अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन पुरुषों ने बहुत कम कार्बोहाइड्रेट खाया, उनमें भी मृत्यु दर का खतरा बढ़ गया और जो महिलाएं बहुत कम फैट का सेवन करती थीं, उन्हें कैंसर से संबंधित मृत्यु का जोखिम अधिक था।

Healthy Food: research over carbohydrates and fat how much taken in food

कितना खाएं कार्ब्स और फैट

शोधकर्ताओं के अनुसार जो पुरुष अपनी दैनिक कैलोरी का 40 प्रतिशत से कम कार्बोहाइड्रेट लेते हैं उनमें औसत से कम उम्र में ही मृत्यु का जोखिम होता है। इसी तरह से जो महिलाएं अपनी कुल कैलोरी का 65 प्रतिशत से अधिक कार्बोहाइड्रेट से प्राप्त करती हैं, उनमें भी कम उम्र में मृत्यु का जोखिम अधिक था।

अध्ययन के अनुसार जो पुरुष अपनी 35 प्रतिशत से अधिक कैलोरी फैट से प्राप्त करते हैं, उनमें कैंसर और हृदय संबंधी रोग का खतरा अधिक होता है। इसके विपरीत महिलाओं में अधिक वसा के सेवन करने से कैंसर दर का जोखिम कम हो गया। इस अध्ययन में 35 से 69 वर्ष की उम्र के 34,893 पुरुषों और 46,440 महिलाओं को शामिल किया गया था। पुरुषों के लिए औसत बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 23.7 था, और महिलाओं के लिए 22.2 ।

अध्ययन के बाद की चेतावनी

कार्डियोलॉजी आहार विशेषज्ञ मिशेल रूथेंस्टीन के अनुसार आहार में कम कार्बोहाइड्रेट और महिलाओं के वजन घटाने वाले कम वसा वाले आहार उम्र को कम कर सकते हैं। पोषण महामारी विशेषज्ञ प्रोफेसर लिंडा वान हॉर्न ने चिंता व्यक्त की कि अमेरिकी इसके निष्कर्षों से गलत संदेश ले सकते हैं। अमेरिका में मोटे लोगों की संख्या अधिक है, क्योंकि वे ज्यादातर अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं, पोषक तत्वों का कम। अमेरिका में लगभग हर तीन में से एक वयस्क अधिक वजन वाले हैं और पांच में से दो मोटापे से ग्रस्त हैं।

संतृप्त और असंतृप्त वसा के स्रोत

संतृप्त वसा के स्रोतों में लाल मांस, नारियल तेल, मक्खन, पाम ऑयल और पूर्ण वसा वाले डेयरी उत्पाद शामिल हैं। संतृप्त वसा पशु स्रोतों से प्राप्त होते हैं। असंतृप्त वसा के कुछ स्रोतों में एवोकाडो, जैतून, पेकान और कद्दू के बीज शामिल हैं। इसके अलावा मक्का का तेल, सामान्य रूप के मेवे और बीज भी असंतृप्त वसा के स्रोत हैं।

पुरुषों में कम कार्बोहाइड्रेट से खतरा

आहार में आवश्यकता से कम कार्बोहाइड्रेट का मतलब है फाइबर और मैग्नीशियम, पोटेशियम, विटामिन सी और विटामिन बी जैसे पोषक तत्वों की कमी, जो कि हमारे शरीर के विकास के लिए आवश्यक हैं। जब हमारे पास इन सुरक्षात्मक पोषक तत्वों की कमी होती है, तो इससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पौधों के स्रोतों से प्राप्त आहार की कमी से अधिक तेजी से जैविक उम्र बढ़ने और ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। जिससे मानव शरीर में ऑक्सीकरण की प्रक्रिया, कोशिका झिल्ली और सेलुलर प्रोटीन, लिपिड और डीएनए सहित अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है।

महिलाओं को है अधिक वसा वाले आहार की आवश्यकता

प्रोफेसर वान हॉर्न ने सुझाव दिया कि महिला प्रतिभागियों के कम बीएमआई को देखते हुए, यह संभावना हो सकती है कि वे कम चीनी खाएं और कम शराब पीएं, परन्तु पुरुषों की तुलना में उच्च प्रतिशत वसा का सेवन करें, क्योंकि महिलाओं में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन, जो कि कार्डियोप्रोटेक्टिव हैं, का उत्पादन करने के लिए एक निश्चित मात्रा में वसा की आवश्यकता होती है।

भारत में ज्यादा कार्ब तो कम प्रोटीन का करते हैं सेवन

हमारे देश के पोषण विशेषज्ञ प्रतिदिन 282 ग्राम कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने की सलाह देते हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले भारतीय औसतन लगभग 432 ग्राम कार्बोहाइड्रेट का सेवन करते हैं। शहरी इलाकों में रहने वाले भारतीय औसतन लगभग 347 ग्राम कार्बोहाइड्रेट का सेवन करते हैं। हमें प्रति दिन लगभग 459 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता है, किंतु ग्रामीण भारतीय औसतन केवल 194 ग्राम प्रोटीन लेते हैं और शहरी भारतीय औसतन प्रति दिन 242 ग्राम प्रोटीन का ही सेवन करते हैं ।

कीमत और अनुपलब्धता दोनों जिम्मेदार

अध्ययन हमें बताता है कि प्रमुख कार्बोहाइड्रेट स्रोत मनुष्यों में 0 से 60 प्रतिशत ऊर्जा प्रदान करते हैं जबकि प्रोटीन खाद्य पदार्थ केवल 15 प्रतिशत ऊर्जा का योगदान देते हैं। कार्बोहाइड्रेट स्रोत वाले खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होती हैं, यही कारण है कि लोग भूख मिटाने के लिए ज्यादा से ज्यादा कार्ब फ़ूड खाते हैं और स्वस्थ आहार लेने में असमर्थ होते हैं। फल और सब्जियाँ विशेष रूप से महंगे हैं। जानवरों का मीट भी महंगा है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों में रहने वाले लोग कार्ब स्रोतों की तुलना में पर्याप्त प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थ खरीदने में असमर्थ हैं।

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