GST on Petrol: अगर जीएसटी लागू हो तो लगभग 18 रुपये पेट्रोल और 12 रुपये डीजल सस्ता हो सकता है
पेट्रोल-डीजल के बिना देश-दुनिया की रफ्तार थम सकती है। जरुरत के इस दौर में पेट्रोल और डीजल के भावों पर हर देशवासी की नजर बनी रहती है। गौरतलब है कि जीएसटी लागू होने पर इसके दामों में भारी कमी आ जायेगी।

GST on Petrol: पेट्रोल और डीजल की कीमतें लंबे समय से आसमान छू रही हैं। हालांकि, पिछले दिनों सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। इसके बावजूद अनेक शहरों में पेट्रोल के रेट 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास बने हुए हैं। इसे लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा इशारा किया है। वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य यदि तैयार हों तो पेट्रोलियम प्रोडक्ट को माल एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाया जा सकता है। राज्यों के बीच सहमति होने पर ही इस पर फैसला लिया जायेगा।
बता दें कि पांच तरह के पेट्रोलियम उत्पाद - कच्चा तेल, पेट्रोल, हाई स्पीड डीजल, प्राकृतिक गैस और विमान ईंधन फिलहाल जीएसटी के दायरे से बाहर है। जीएसटी परिषद की अगली बैठक 18 फरवरी 2023 को नई दिल्ली में होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाते हैं तो उनकी कीमतों में भारी गिरावट आएगी और जनता को सस्ता पेट्रोल, डीजल मिलेगा। अब सवाल है कि यह कैसे संभव होगा?
जीएसटी लगने से पेट्रोल और डीजल के भाव क्या होंगे?
इस पूरी व्यवस्था को पेट्रोल के वर्तमान भाव से समझने की कोशिश करते है। अब मान लीजिये कि दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल के लिए ग्राहकों को 96.76 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। अब उसमें भाड़े के साथ पेट्रोल की लागत 57.38 रुपये, एक्साइज ड्यूटी 19.90 रुपये, डीलर कमीशन 3.76 रुपये, और वैट (दिल्ली में) 15.72 रुपये शामिल होंगे।
दिल्ली में अगर जीएसटी लागू होता है तो भाड़े के साथ पेट्रोल की लागत 57.38 रुपये, डीलर कमीशन 3.76 रुपये और जीएसटी (अधिकतम 28 प्रतिशत) 17.11 रुपये होने पर अंत में खुदरा कीमत 78.25 रुपये रह जायेगी।
इस प्रकार जीएसटी लागू होते ही एक्साइट ड्यूटी और वैट को हटा दिया गया। सीधे-साधे आम जनता को एक लीटर पेट्रोल पर तकरीबन 18.51 रुपये की बचत हुई। यानि 96.76 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला पेट्रोल 78.25 रुपये में मिलने लगेगा।
इसी प्रकार एक लीटर डीजल के मौजूदा दामों का विश्लेषण करें तो भाड़े के साथ लागत 58.20 रुपये, एक्साइज ड्यूटी 15.80 रुपये, डीलर कमीशन 2.55 रुपये और वैट (दिल्ली में) 13.11 रुपये होने पर खुदरा कीमत 89.66 रुपये होती है।
दिल्ली में जीएसटी लगने के बाद भाड़े के साथ डीजल लागत 58.20 रुपये, डीलर कमीशन 2.55 रुपये, जीएसटी (28 प्रतिशत अधिकतम) 17.01 रुपये लगने के बाद खुदरा कीमत 77.76 रुपये रह जायेगी।
इस प्रकार दिल्ली में डीजल पर जीएसटी लागू हो जाये तो 89.66 रुपये प्रति लीटर से डीजल 77.76 रुपये प्रति लीटर मिलने लगेगा। मतलब इसमें 11.90 रुपये प्रति लीटर की कटौती हो सकती है। अब सवाल ये है कि लोगों को सीधे-सीधे इतना फायदा है तो सरकार जीएसटी क्यों नहीं लगा रही है?
पेट्रोलियम पर जीएसटी अब तक क्यों नहीं लगा?
पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स लगाना केंद्र और राज्य सरकारों के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत रहा है। यही एक प्रमुख कारण है कि राज्य सरकारें इसे जीएसटी के तहत नहीं लाना चाहती हैं। जीएसटी आने के बाद राज्यों के पास टैक्स उगाही के संसाधन पहले ही सीमित रह गये है। शराब, पेट्रोलियम उत्पाद, बिजली और जमीन जैसे कुछ माध्यम हैं जो अब राज्यों की कमाई के मुख्य जरिये बचे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों ने साल 2020-21 में पेट्रोल डीजल से कुल 2 लाख करोड़ से ज्यादा की कमाई की है। राज्य सरकारें मनचाहे तरीके से टैक्स बढ़ा-घटा सकती है पर जीएसटी लगाने पर ऐसा नहीं हो सकता है। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में वैट की दर अलग है। इसलिए पेट्रोलियम पदार्थों समेत जीएसटी से बाहर की चीजों की कीमतें भी अलग-अलग हैं।
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अब यहां सवाल यह उठता है कि अगर पेट्रोलियम उत्पादों पर जीएसटी लागू होती है तो राज्यों को होने वाले लाखों रुपये के नुकसान की भरपाई कैसे होगी? एक संसदीय रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 में पेट्रोल पदार्थों की बिक्री से राज्यों को लगभग 142092 करोड़ रुपये का टैक्स मिला था। यह आंकड़ा 7 दिसंबर 2022 तक का है।
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