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Govt Schemes: इन सरकारी योजनाओं से युवा हो रहा सशक्त व स्वावलंबी

भारत के पास विश्व का सबसे विशाल युवा जनसंख्या बल (15 से 30 आयु वर्ग) लगभग 40 करोड़ है, जो भारत की कुल आबादी का करीब 28 प्रतिशत है। वहीं एक अनुमान के अनुसार भारत में प्रति माह 9 लाख युवा 18 वर्ष की आयु पार कर रहे हैं।

इतनी बड़ी जनसंख्या को रोजगार देना, खासकर सरकारी नौकरी दे पाना, किसी भी देश के लिए अत्यंत कठिन कार्य है। युवाओं को रोजगारपरक, स्वावलंबी, उद्यमी बनाने तथा उनके कौशल विकास हेतु केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा अनेक योजनाएं चलाई रही हैं। केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही ऐसी कुछ योजनाओं के बारे में जानते हैं, जो युवाओं को स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाने में कारगर हो रही हैं।

Govt Schemes Youth are becoming strong and self-reliant through these government schemes

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना
कृषि क्षेत्र के बाद सबसे ज्यादा रोजगार सृजन 'सूक्ष्म व लघु उद्योग' क्षेत्र से होता है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या धन का अभाव है। इस समस्या को देखते हुए मोदी सरकार द्वारा इस क्षेत्र को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 'प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना' को प्रारंभ किया गया। 7 अप्रैल 2015 को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इसे गैर-बैंकिंग वित्त संस्थान के रूप में पंजीकृत किया गया तथा इस योजना की शुरूआत प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 8 अप्रैल 2015 में की गई।
इस योजना का लाभ लेने के लिए अधिकारिक वेबसाइट https://www.mudra.org.in/ पर जाकर ऑनलाईन आवेदन कर 50 हजार से 10 लाख रूपये तक का लोन लिया जा सकता है। इस योजना के तीन चरण है - 1. शिशु मुद्रा योजना (व्यवसाय के प्रारंभिक 5 वर्ष, 50 हजार रू. तक का लोन), 2. किशोर मुद्रा योजना (50 हजार से 5 लाख रू. तक का लोन) तथा 3. तरूण मुद्रा योजना (3 लाख से 10 लाख रू. लोन)।

अगर इसकी सफलता को देखें तो इसके प्रारंभिक वित्तीय वर्ष 2015-16 में इस योजना के तहत लगभग 1.33 लाख करोड़ रूपये का लोन दिया गया, वहीं वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस योजना के अंतर्गत लोन की राशि बढ़कर 5.13 लाख करोड़ पहुंच गई। यह दर्शाता है कि इस योजना के अंतर्गत लोन लेकर भारत के युवा सशक्त जीवन और स्वावलंबन की ओर बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना
इस योजना के अंतर्गत युवाओं को कौशल विकास हेतु मुफ्त प्रशिक्षण प्रदान कर उनको रोजगार के योग्य बनाना और आजीविका में वृद्धि करना है। इस योजना को प्रधानमंत्री यूथ ट्रेनिंग प्रोग्राम के नाम से भी जाना जाता है, जिसकी शुरूआत जुलाई 2015 में हुई।

इसके पहले चरण में ही करीब 19.86 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। इसके प्रथम चरण की उपलब्धि को देखते हुए इसका दूसरा चरण (वर्ष 2016-2020 तक) चलाया गया। इस चरण में 1.1 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

इसकी सफलता के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 15 जनवरी 2021 से इसके तीसरे चरण की घोषणा की। इस चरण में 9 दिसंबर 2023 तक करीब 7.95 लाख युवाओं ने आवेदन किया, जिसमें से लगभग 7.38 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

अगर इस योजना के तीनों चरणों का आकलन करें तो करीब 1.42 करोड़ युवाओं ने इस योजना में नामांकन किया तथा लगभग 1.37 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।

राष्ट्रीय कैरियर सेवा (एनसीएस) परियोजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 20 जुलाई 2015 को इस परियोजना को प्रारंभ किया गया। जिसके तहत डिजिटल मंच के माध्यम से कैरियर परामर्श, व्यावसायिक मार्गदर्शन, कौशल विकास हेतु जानकारियां, प्रशिक्षुता और इंटर्नशिप सहित विभिन्न रोजगार-संबंधित सेवाएं प्रदान की जा रही है।

एनसीएस मंच पर नवंबर 2023 तक 3.64 करोड़ से अधिक नौकरी चाहने वालों ने पंजीकरण किया है। 19.15 लाख नौकरी देने वाले नियोक्ता भी इस मंच पर रजिस्टर्ड हैं तथा 1.92 करोड़ से अधिक रिक्तियों यानी नौकरियों की सूची इस मंच पर है।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयू-जीकेवाई)
यह योजना सितंबर, 2014 से प्रारंभ की गई, जिसके तहत गरीब ग्रामीण युवाओं को नौकरियों में नियमित रूप से न्यूनतम मजदूरी के बराबर या उससे ऊपर मासिक मजदूरी प्रदान कराना है। यह ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलों में से एक है। इस योजना से लाखों गरीब ग्रामीण युवाओं को लाभ पहुंच रहा है।

पीएम स्वनिधि योजना
स्ट्रीट वेंडर्स को स्वावलंबी बनाने, उनके रोजगार को बढ़ाने व उनकी आय में बढ़ोत्तरी हेतु मोदी सरकार ने 1 जून 2020 को 'पीएम स्वनिधि योजना' शुरू की। जिसमें बिना गारंटी और कम ब्याज दरों पर 10,000 से 50,000 रूपये तक का आसान लोन केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है। इस योजना के तहत करीब 81 लाख लोगों को 11 हजार करोड़ रूपये आवंटित हो चुके है।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी)
यह एक प्रमुख क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम है, जिसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और बेरोजगार युवाओं की मदद करके गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना कर स्व-रोजगार के अवसर पैदा करना है। इस कार्यक्रम के द्वारा वर्ष 2022-23 तक 20,379 ईकाइयां स्थापित की गई, जिनसे 2,02,960 लोगों को रोजगार मिला। इन सरकारी योजनाओं के अलावा भी अनेक ऐसे गैर-सरकारी, आर्थिक, सामाजिक व शैक्षिक संगठन है, जो युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित व प्रशिक्षित कर स्वावलंबी बना रहे हैं।

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