Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Enemy Property: क्या होती हैं शत्रु संपत्तियां? जानें क्या है इन पर विवाद

जो लोग 1947 में भारत विभाजन अथवा 1965 तथा 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद पाकिस्तान चले गए या फिर 1962 के युद्ध के बाद चीन चले गए, उनकी भारत में रह गई संपत्ति को एनेमी प्रॉपर्टी या शत्रु संपत्ति कहा जाता है।

government e auction enemy properties know what controversy over enemy properties

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की शत्रु संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये वे शत्रु संपत्तियां हैं, जिनके मालिकों ने चीन और पाकिस्तान के युद्धों के बाद भारत छोड़कर इन दोनों देशों की नागरिकता ली थी। अभी ये शत्रु संपत्तियां 'कस्टोडियन ऑफ एनेमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया (सीईपीआई) के अधीन हैं, जो शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत बनाया गया एक प्राधिकरण है। इन शत्रु संपत्तियों की कीमत एक लाख करोड़ रुपए से भी अधिक की बताई जाती है।

केंद्रीय गृहमंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि अगर शत्रु संपत्ति की कीमत एक करोड़ रुपये से कम है, तो सीईपीआई पहले इन पर काबिज लोगों को इस संपत्ति को खरीदने की पेशकश करेगा और यदि कब्जेदार खरीदने से मना कर देता है, तो शत्रु संपत्ति को गृह मंत्रालय द्वारा दी गई गाइडलाइन के तहत निपटाया जाएगा।

गृह मंत्रालय की गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर संपत्ति की कीमत एक करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो शत्रु संपत्तियों की ई-नीलामी सार्वजनिक उद्यम के ई-नीलामी प्लेटफॉर्म 'मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन लिमिटेड' के जरिए की जाएगी। गृह मंत्रालय का कहना है कि सरकार को शत्रु संपत्तियों की बिक्री से अभी तक ₹3,400 करोड़ की आमदनी हुई है। इनमें से ज्यादातार चल संपत्तियां हैं, जिनमें शेयर और सोने की बिक्री शामिल हैं।

क्या है शत्रु संपत्ति?
एक जमाने में जब कोई विजेता किसी क्षेत्र पर कब्जा करता था, तो वहां की सरकार और नागरिकों की संपत्तियों पर भी अधिकार कर लेता था। तब उसे युद्ध में लूटी गई संपत्ति का नाम दिया जाता था। हालांकि, चौथे जेनेवा कन्वेंशन की धारा 147 में इस पर रोकथाम लगा दी गयी।

इसके बाद, शत्रु संपत्ति के लिए कस्टोडियन की नियुक्ति की परंपरा की शुरुआत हुई। यानी जब दो देशों के बीच युद्ध की घोषणा होती है, तो शत्रु देश की सरकार या नागरिकों की जो चल-अचल संपत्तियां दूसरे देश में होती हैं, उसे वहां की सरकार अपने अधिकार में लेकर उसके प्रबंधन के लिए एक कस्टोडियन की नियुक्ति कर देती है।

इसकी शुरुआत यूरोप के कई देशों में हुई। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद साल 1919 में ब्रिटेन ने शत्रु संपत्ति कानून के तहत जर्मनी, पोलैंड, हंगरी, डेनमार्क आदि देशों की सरकारों एवं नागरिकों की ब्रिटिश साम्राज्य के विभिन्न देशों में जो चल-अचल संपत्ति थी, उसे अपने नियंत्रण में ले लिया था। यही कदम 1939 में ब्रिटेन ने जर्मनी, इटली और जापान के साथ युद्ध की घोषणा के बाद भी उठाया था।

नेहरू-लियाकत समझौता
भारत विभाजन के बाद, 1950 में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के बीच एक समझौता हुआ। जिसे नेहरू-लियाकत समझौता कहा जाता है। इस समझौते में यह प्रावधान किया गया था कि 18 अक्टूबर 1949 के बाद यदि कोई व्यक्ति भारत और पाकिस्तान को छोड़कर अन्य देश में जाता है, तो वह उस देश में छोड़ी हुई अपनी संपत्ति को मनमाने ढंग से बेच सकता है और कस्टोडियन को उसकी संपत्ति को कब्जे में लेने का अधिकार नहीं होगा।

इस समझौते का फायदा भारत से पाकिस्तान जाने वाले मुसलमानों ने अपनी संपत्ति को मनमाने ढंग से बेचकर उठाया। जबकि पाकिस्तान सरकार ने वहां से आने वाले हिंदुओं को अपनी संपत्ति बेचने की अनुमति नहीं दी। इस तरह से नेहरू-लियाकत समझौता एकपक्षीय ही रहा।

क्या है शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968
भारत में साल 1968 का जो शत्रु संपत्ति कानून लागू किया गया, वह मोटे तौर पर 1939 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित शत्रु संपत्ति कानून के मॉडल पर ही आधारित है। इस कानून के अनुसार, जो लोग 1947 में भारत विभाजन के बाद या 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध की घोषणा के बाद पाकिस्तान चले गए थे, उनकी संपत्ति को भारत सरकार ने भारत सुरक्षा अधिनियम के तहत शत्रु संपत्ति घोषित करके अपने नियंत्रण में ले लिया था।

इसी तरह से भारत-चीन युद्ध के दौरान 1962 में जो लोग चीन चले गए थे, उनकी संपत्ति को भी भारत सरकार ने शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया था। यह चीन एवं पाकिस्तान द्वारा इसी तरह की गई कार्रवाई के जवाब में उठाया गया कदम था। इस कानून के तहत पहले शत्रु संपत्ति की देखभाल का काम वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय को सौंपा गया था। हालांकि, बाद में इसे गृह मंत्रालय के तहत लाया गया।

दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने 1965 और 1971 के युद्ध में नियंत्रण में ली हुई भारतीय संपत्ति को बाद में बेच दिया था। जबकि भारत सरकार अभी तक इस संबंध में अपनी कोई नीति तय नहीं कर सकी थी। ये शत्रु संपत्तियां कस्टोडियन के नियंत्रण में ही चली आ रही थीं।

बांग्लादेश में लागू है 'वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट'
जहां तक बांग्लादेश का संबंध है, पाकिस्तान सरकार के निर्देश पर तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में स्थित भारत सरकार एवं भारतीय नागरिकों की जिन संपत्तियों को पाकिस्तान सरकार ने अपने नियंत्रण में लिया था, 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद भले ही बांग्लादेश ने शत्रु संपत्ति अधिनियम रद्द कर दिया हो, मगर उसने एक अन्य कानून 'वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट' लाकर इस संपत्ति को अब तक सरकारी नियंत्रण में ही रखा है। अधिग्रहित संपत्ति को भारत सरकार या भारतीय नागरिकों को वापस लौटाने के लिए बांग्लादेश सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।

शत्रु संपत्ति पर सांप्रदायिक राजनीति
महमूदाबाद रियासत के राजा मोहम्मद आमिर अहमद खान भारत के बंटवारे के बाद 1957 में पाकिस्तान चले गए। उनकी पत्नी और एक बेटा मोहम्मद खान भारत में ही रह गए। 1973 में मोहम्मद आमिर अहमद खान की मृत्यु हो गई। पिता की मौत के बाद भारत में स्थित उनकी संपत्ति का अधिकार उनके बेटे मोहम्मद खान को मिल गया। मगर केंद्र सरकार ने उनकी संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया था। महमूदाबाद के राजा के बेटे का दावा था कि वह भारत के नागरिक हैं, इसलिए उनकी पुश्तैनी जायदाद पर उनका कानूनी अधिकार है।

साल 1980 में मोहम्मद खान ने अपनी संपत्ति की वापसी के लिए प्रयास तेज किए। तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के व्यक्तिगत प्रभाव के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यह पेशकश की थी कि भारत सरकार उन्हें कस्टोडियन द्वारा ली गई संपत्ति में से एक चौथाई हिस्सा वापस करने के लिए तैयार है, मगर उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। 1981 में मोहम्मद खान ने अपनी संपत्ति की वापसी के लिए लखनऊ की एक अदालत में मुकदमा दायर किया, जिसे वे जीत गए। फिर हाईकोर्ट में वह केस हार गए।

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया। 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद खान के पक्ष में अपना निर्णय सुना दिया। इस निर्णय के कारण सरकार को वह संपत्ति मोहम्मद खान को वापस लौटानी पड़ी, जो कि शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत कस्टोडियन ने अपने नियंत्रण में ली थी।

इस फैसले का लाभ उठाने के लिए अनेक लोगों ने शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत कस्टोडियन द्वारा ली गई संपत्ति की वापसी के लिए अदालत की शरण लेनी शुरू कर दी। इस पर 2 जुलाई 2010 को राष्ट्रपति ने एक अध्यादेश जारी किया, जिसमें यह प्रावधान किया गया कि यदि शत्रु संपत्ति कानून के तहत संपत्ति को कस्टोडियन अपने नियंत्रण में लेता है तो, उसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। अक्टूबर 2010 में राजनीतिक दबाव के कारण तत्कालीन यूपीए सरकार ने संसद में पेश विधेयक में यह संशोधन किया कि शत्रु संपत्ति अधिनियम के बारे में 2 जुलाई 2010 से पूर्व अदालतों ने जो फैसले दिए हैं, उन पर यह कानून लागू नहीं होगा। साफ है कि यह संशोधन सिर्फ राजा महमूदाबाद को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। हालांकि, विपक्षी दलों के विरोध के कारण यह विधेयक संसद से पारित नहीं हो पाया।

2017 में शत्रु संपत्ति अधिनियम में हुआ संशोधन
2017 में इस कानून में संशोधन करके इसे और भी कड़ा किया गया है। इस कानून के तहत अब वे लोग भी शत्रु हैं, जो भले ही भारत के नागरिक हैं, लेकिन उन्हें विरासत में ऐसी संपत्ति मिली है, जोकि किसी पाकिस्तानी नागरिक के नाम है। इसी संशोधन ने सरकार को ऐसी संपत्ति को बेचने का भी अधिकार दे दिया है। यानी अब शत्रु संपत्ति का मालिकाना हक भारत सरकार के पास है। इसी बदलाव के कारण अब राजा महमूदाबाद की सारी संपत्ति भारत सरकार की हो गई है।

देश में कितनी हैं शत्रु संपत्तियां?
19 जुलाई 2022 को सांसद ढाल सिंह बिसेन के प्रश्न के जवाब में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि कस्टोडियन ऑफ एनेमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया (सीपीआई) के संरक्षण में 12,611 शत्रु संपत्तियां देश में मौजूद हैं। इनमें से 12,485 संपत्तियां पाकिस्तानी नागरिकों से और 126 संपत्तियां चीनी नागरिकों से संबंधित हैं।

उन्होंने इस संबंध में राज्यवार शत्रु संपत्तियों का ब्योरा प्रस्तुत किया, जिसके अनुसार, उत्तर प्रदेश में शत्रु संपत्तियों की संख्या 6255 हैं। जबकि पश्चिम बंगाल में 4088, दिल्ली में 659, गोवा में 295, महाराष्ट्र में 208, तेलंगाना में 158, गुजरात में 151, त्रिपुरा में 105, बिहार में 94, मध्य प्रदेश में 94, छत्तीसगढ़ में 78 और हरियाणा में 71 शत्रु संपत्तियां मौजूद हैं।

इसके अतिरिक्त, केरल में 71, उत्तराखंड में 69, तमिलनाडु में 67, मेघालय में 57, असम में 29, कर्नाटक में 24, राजस्थान में 22, झारखंड में 10, दमन और दीव में चार, आंध्र प्रदेश में एक और अंडमान और निकोबार में एक शत्रु संपत्ति की पहचान की गई है।

यह भी पढ़ेंः India Japan: नेहरू ने जापान को दी थी 'इंदिरा' तोहफे में, जाने दोनों देशों के संबंधों का संक्षिप्त इतिहास

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+