Google Bard या ChatGPT? कौन बनेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सर्च का ‘किंग’?

गूगल ने अपने सालाना डेवलपर्स कांफ्रेंस में बार्ड एआई टूल को लॉन्च किया है। गूगल का यह चैटबॉट 180 देशों में उपलब्ध होगा, जिससे आप कोई भी सवाल पूछ सकेंगे। इसका सीधा मुकाबला माइक्रोसॉफ्ट के चैटजीपीटी से है।

Google Bard vs ChatGPT Who will become the King of Artificial Intelligence Search?

Google Bard vs ChatGPT: गूगल ने हाल में आयोजित सालाना डेवलपर्स कांफ्रेंस में जेनरेटिव Bard AI को 180 देशों में लॉन्च किया है। इसमें कई ऐसे फीचर्स जोड़े गए हैं, जो आपके हर दिन इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइसेज की रूपरेखा को बदल देंगे। आप बिना टाइप किए ही ई-मेल लिख पाएंगे। गूगल के इस टूल को माइक्रोसॉफ्ट के चैटजीपीटी का असली प्रतिद्वंदी माना जा रहा है। गूगल इसमें आने वाले कुछ साल में बड़ा निवेश करने वाला है।

दूसरी तरफ चैटजीपीटी में माइक्रोसॉफ्ट ने भारी निवेश किया है, जिसका मकसद बिंग सर्च इंजन के साथ यूजर्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक्सपीरियंस देना है। माइक्रोसॉफ्ट ने इसे पिछले साल नवंबर 2022 में पेश किया था। लॉन्च के साथ ही यह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इंसानों की तरह पूछे गए सवालों का जवाब देता है। यह टूल मशीन लैंग्वेज के आधार पर उत्तर जेनरेट करता है, जिसकी वजह से इसे जेनरेटिव AI कहा जाता है। माइक्रोसॉफ्ट के इस मास्टरस्ट्रोक से गूगल समेत कई टेक कंपनियों की टेंशन बढ़ गई।

गूगल ने माइक्रोसॉफ्ट को उसी के अंदाज में जबाब देने के लिए AI बेस्ड टूल Bard को लॉन्च किया है, जिसे जल्द ही सर्च इंजन के साथ जोड़ा जाएगा। पहले इसे ट्रायल के तौर पर अमेरिका और यूके में पेश किया गया था, लेकिन अब इसे दुनियाभर में उपलब्ध करा दिया गया है। क्या माइक्रोसॉफ्ट का ChatGPT पूरी दुनिया में गूगल सर्च इंजन की बादशाहत को खत्म कर पाएगा या फिर बार्ड के जरिए गूगल एक बार फिर से माइक्रोसॉफ्ट को नई टेक्नोलॉजी की रेस से बाहर कर देगा?

Google Bard AI

गूगल बार्ड को जब इस साल की शुरुआत में ट्रायल के तौर पर पेश किया गया तो इसमें कई खामियां निकल आईं थी। इसे आधिकारिक तौर पर ग्लोबली लॉन्च करने से पहले गूगल ने इसकी खामियों को दूर कर दिया है। फिर 10 मई 2023 को जेनरेटिव एआई का नया वर्जन पेश किया गया, जिसका लुक काफी हद तक ओपनएआई के चैटजीपीटी की तरह है। गूगल का कहना है कि यह चैटबॉट यूजर्स को बेहतर एक्सपीरियंस प्रदान करेगा। हालांकि, गूगल ने यह भी चेतावनी दी है कि फिलहाल इसमें ज्यादा भाषाओं का सपोर्ट नहीं है, जिसकी वजह से यह कुछ गलतियां भी कर सकता है। इस टूल को बेहतर बनाने के लिए गूगल के इंजीनियर्स लगातार काम करते रहेंगे। आने वाले समय में यह और बेहतर होता जाएगा।

ChatGPT

वहीं दूसरी तरफ चैटजीपीटी को भी अपग्रेड किया जा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई ने अब तक इसके चार वर्जन पेश किए हैं। हालांकि, चैटजीपीटी में भी एक बड़ी खामी है, क्योंकि इसमें कई जानकारियां 2021 तक की ही अपडेटेड है। ऐसे में सवाल पूछने पर यह 2021 तक के डेटा के आधार पर उत्तर देता है। माइक्रोसॉप्ट के इस टूल को इसी वजह से इटली में बैन किया गया था, क्योंकि यह टूल गलत जानकारी उपलब्ध करा रहा था और इसमें डेटा प्राइवेसी की शिकायतें थीं। हालांकि, बाद में चैटजीपीटी से लगा बैन हट गया है। ओपनएआई ने इस टूल में यूजर द्वारा पूछे गए सवाल की हिस्ट्री को डिलीट करने वाला फीचर जोड़ दिया है।

BardAI Vs ChatGPT

इन दोनों जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल के बीच के अंतर की बात करें तो चैटजीपीटी से पूछे गए सवालों के जबाब में आपको ह्यूमन टच मिलता है। यानी इसके द्वारा दिए गए जवाब काफी हद तक इंसानी लगते हैं, जबकि गूगल बार्ड का रिस्पॉन्स लैंग्वेज कम्प्यूटर की तरह ही है। इससे आप अगर कोई सवाल पूछेंगे तो उसके द्वारा दिए गए जबाब को देखकर लगेगा कि किसी प्रोग्रामिंग के जरिए यह रिस्पॉन्स मिला है।

अगर इन दोनों एआई टूल के यूजर इंटरफेस की बात करें तो इसमें भी चैटजीपीटी, गूगल बार्ड के मुकाबले बेहतर है। इसके टाइपिंग स्टाइल से लेकर रिस्पॉन्स में लगने वाले समय तक में यह गूगल बार्ड के मुकाबले अच्छा है। हालांकि, ये सारी खूबियां चैटजीपीटी के पेड वर्जन यानी GPT-4 में मिलेंगी यानी इस सुविधा के लिए आपको पैसे खर्च करने पड़ेंगे। वहीं, गूगल का टूल फिलहाल फ्री-टू-एक्सेस है यानी इसके इस्तेमाल के लिए आपको पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। भविष्य में गूगल भी इसके लिए चार्ज की घोषणा कर सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट ने चैटजीपीटी को अपने बिंग सर्च इंजन में इंटिग्रेट कर दिया है। इसकी वजह से बिंग सर्च इंजन में आपको ज्यादा डिटेल के साथ जानकारी मिल सकती है। इसे इसके मोबाइल और वेब दोनों वर्जन के लिए रोल आउट किया जा चुका है। बार्ड को अभी गूगल सर्च के साथ इंटिग्रेट किया जाना है। कंपनी का मुख्य फोकस मोबाइल यूजर्स पर है। इसलिए गूगल अपने अगले एंड्रॉइड 14 में बार्ड बेस्ड फीचर्स जोड़ने की घोषणा कर चुका है। इस टूल को एंड्रॉइड 14 के साथ-साथ गूगल की सर्विसेज जैसे सर्च इंजन, मैप्स, जीमेल और यूट्यूब आदि में भविष्य में जोड़ा जा सकता है।

शुरू हुई AI की जंग?

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    इन दोनों एआई टूल के लॉन्च होने के बाद यह कहा जा सकता है कि गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के बीच AI को लेकर नयी जंग छिड़ चुकी है। इसका फायदा भविष्य की टेक्नोलॉजी को मिलने वाला है। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के साथ-साथ कई और कंपनियां भी इसके लिए दांव लगाने को तैयार दिख रही है। चीनी सर्च इंजन कंपनी Baidu (बायडू) ने भी पिछले दिनों एआई चैटबॉट लॉन्च करने की घोषणा की थी। एमआईटी जैसे कई इंस्टीट्यूट भी जेनरेटिव एआई टूल पर रिसर्च कर रहे हैं। आने वाले कुछ सालों में इस रेस में कई भारतीय कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं।

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