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Bipin Rawat: भारतीय सेना ‘ढाई मोर्चों’ पर जंग के लिए तैयार, बिपिन रावत के इस बयान से बौखलाया था चीन

जनरल बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ थे। उनका जन्म 16 मार्च 1958 को देहरादून में हुआ था। 8 दिसम्बर 1921 को एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में सीडीएस रावत का निधन हो गया था।

General Bipin Rawat Birth Anniversary Remembering Bipin Rawat India’s first CDS

Bipin Rawat: जनरल बिपिन रावत के पिता एलएस रावत आर्मी में लेफ्टिनेंट जनरल थे। बिपिन रावत की शुरूआती पढाई सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला में हुई। उसके बाद उन्होंने इंडियन मिल्ट्री एकेडमी में एडमिशन लिया और देहरादून चले गए। इसके बाद बिपिन रावत अमेरिका चले गये। यहां उन्होंने सर्विस स्टाफ कॉलेज में ग्रेजुएशन किया और साथ में उन्होंने यहां पर हाई कमांड कोर्स भी किया। 16 दिसंबर 1978 को बिपिन रावत को गोरखा 11 राइफल्स की 5वीं बटालियन में शामिल किया गया। यहीं से उनका सैन्य सफर शुरू हुआ। उन्होंने कांगो के यूएन मिशन में हिस्सा लिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सेवाएं दी।

जनरल बिपिन रावत को 31 दिसंबर 2016 को जनरल दलबीर सिंह सुहाग का उत्तराधिकारी बनाया गया। वे भारतीय सेना के 27वें प्रमुख बने। उन्होंने इस पद की कमान 1 जनवरी 2017 को संभाली थी। इसके बाद 31 दिसंबर 2019 को बिपिन रावत ने भारतीय सेना के प्रमुख पद से इस्तीफा दिया और देश के पहले सीडीएस की कमान संभाली।

"क्या मैं ये कहूंगा कि इंतजार करो और मर जाओ"

2017 में जनरल बिपिन रावत ने एक कार्यक्रम में मेजर लीतुल गोगोई को सम्मानित किया था। बता दें कि मेजर लीतुल गोगोई वो जवान थे जिन्होंने कश्मीर में पत्थरबाजी कर रहे एक युवक को अपनी जीप के आगे बांधकर ढाल की तरह इस्तेमाल किया था।

इसके बाद जनरल बिपिन रावत ने एक इंटरव्यू में कहा था कि "कश्मीर में हमारी सेना जिस तरह के हालातों का सामना कर रही है, उससे निपटने के लिए ऐसे इनोवेटिव तरीके ही जरूरी हैं। उन्होंने कहा था कि वहां लोग हम पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंक रहे हैं। ऐसे में अगर मेरे जवान मुझसे पूछते हैं कि सर क्या किया जाए? तो क्या आर्मी चीफ नाते मैं अपनी टीम से ये कहूंगा कि इंतजार करो और मर जाओ। तुम्हारे पार्थिव शरीर सम्मान के साथ घर पहुंचाए जाएंगे। याद रखिए, मुझे अपनी टीम का मनोबल ऊंचा रखना है।"

"हमारी सेना ढाई मोर्चों पर एक साथ जंग लड़ने के लिए तैयार"

जून 2017 को जनरल बिपिन रावत ने आर्मी चीफ रहते हुए एक बयान दिया था कि हमारी सेना ढाई मोर्चों पर एक साथ जंग लड़ने के लिए तैयार है। जनरल बिपिन रावत के इस बयान से पाकिस्तान और चीन दोनों देशों में हड़कंप मच गया था।

बिपिन रावत का कहना था कि भारतीय सेना चीन, पाकिस्तान और आतंकवाद से एक साथ निपटने में सक्षम है। बौखलाए हुए चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' में उस वक्त लिखा गया था कि रावत का बयान दिखाता है कि भारतीय सेना में कितना अहंकार भरा है। जनरल बिपिन रावत अक्सर कहा करते थे कि सेना को आधुनिक बनाने की जरूरत है और काफी हद तक वो इसमें सफल भी हुए थे।

सेना में रिटायर्मेंट को लेकर बिपिन ने रखा था ये प्रस्ताव

बिपिन रावत ने सेना अध्यक्ष व सीडीएस रहते हुए भारतीय सेना के लिए कई कार्य किए हैं। डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स के माध्यम से जनरल बिपिन रावत ने सरकार के समक्ष कर्नल और भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना में कर्नल की समकक्ष रैंक के लिए सेवानिवृत्ति की आयु में 54 से 57 वर्ष, ब्रिगेडियरों की 56 से 58 और मेजर जनरलों की 58 से 59 तक एक साथ वृद्धि का प्रस्ताव रखा था।

यह प्रस्ताव उन्होंने अक्तूबर 2020 में दिया था। वहीं भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनमें असीम ऊर्जा थी। जब मैं तेजपुर में था तो हमें एक्सरसाइज के लिए तवांग जाना था। मौसम अच्छा नहीं था। पर उन्होंने कहा कि हम वहां जरुर जाएंगे। हम रात को ड्राइव करेंगे और अगली सुबह फिर से शुरू करेंगे। जनरल रावत अपने दृढ निश्चय पर अड़े रहे और 14 घंटे गाड़ी चलाकर वहां पहुंचे।

हर जवान का सम्मान करते थे बिपिन रावत

सैनिकों से जुड़ी कहानियों पर किताब लिखने वाली लेखिका रचना बिष्ट रावत ने जनरल बिपिन रावत के बारे में लिखा कि कैसे एक आर्मी चीफ अपने एक सैनिक की भी इज्जत करते थे। वो किस्सा यूं हुआ कि बिपिन रावत गैर सैन्य वेशभूषा में अपनी निजी कार से दोस्त के घर पहुंचे थे। उस समय वो आर्मी चीफ थे। दिन भर की ड्यूटी के बाद जनरल रावत सादी पोशाक में थे।

जैसे ही उनकी कार कैंट के दरवाजे पर पहुंचती है तो उन्हें एक जवान रोक लेता है। बिपिन रावत ने जवान को बताया कि उनका आर्मी का एक दोस्त यहां रहता है वे उससे मिलने आए हैं। इसके बाद जवान पूछता है कि आप कौन हैं और इतनी रात को आर्मी एरिया में क्या कर रहे हैं। ऐसे में बिपिन रावत ने उसे बताया कि वो आर्मी चीफ बिपिन रावत हैं। जवान गार्ड जनरल बिपिन रावत को पहचानने से इनकार कर देता है। साथ ही जवान ने बिपिन रावत से कहा कि वो जिस दोस्त से मिलने आएं हैं उन्हें फोन कर गेट पर बुलाएं।

जनरल बिपिन रावत फोन करते हैं और अपने दोस्त को गेट पर आने के लिए कहते हैं। उनके दोस्त ने गेट पर तैनात सिक्योरिटी ऑफिसर से पूछा कि क्या तुम इन्हें नहीं पहचानते हो। तुम्हारे सामने थल सेनाध्यक्ष खड़े हैं। तब बिपिन रावत उस जवान की पीठ थपथपाते हैं और कहते हैं कि ये तो अपना काम कर रहा था जो सेना के जवान का सबसे बड़ा फर्ज है। साथ ही इसके बाद बिपिन रावत ने सेना मुख्यालय को चिट्ठी लिखकर जवान की तारीफ की थी।

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