भारत की पांच नदियां, जिसने लील लीं हजारों जानें
पिछले दो दिनों से भारी बारिश के चलते भागीरथी नदी में उफान पर है। इस समय वह 1102 मीटर खतरे के निशान से सिर्फ दो मीटर नीचे बह रही है। लिहाजा, यह देखते हुए बुधवार को उत्तरकाशी जिले मे अलर्ट जारी कर दिया गया।
अधिकारियों को इस पर नजर बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, यह साफ किया गया है कि प्रशासन पूरी तरह से चौकस है और किसी भी स्थिति का सामना करने को तैयार है।
भारत में नदियों को देवी का दर्जा दिया जाता है। लेकिन कई बार इन्हीं नदियों ने ऐसा रूद्र रूप धारण किया है कि हजारों लोगों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। देखते हैं भारत की पांच ऐसी नदियां जिसने इंसानों पर जम कर कहर बरपाया है और छीन लीं हजारों जान।

ब्यास
हिमाचल प्रदेश में मंडी शहर के करीब ब्यास नदी ने 24 इंजीनियर छात्रों को अपनी जलधारा के साथ बहा लिया। तमाम बचावकर्ता और राहत कार्य के बावजूद अभी तक सभी छात्रों का शव बरामद नहीं हो पाया है। कुछ ही दिनों पहली घटी इस दर्दनाक हादसे के लिेए प्रसाशन को दोषी ठहराया जा गया।

भागीरथी
गंगा की सहायक भागीरथी नदी का वीभत्स रुप उत्तराखंड त्रासदी के लोगों के सामने आया। जिसने केदार घाटी को तहस नहस कर डाला। साथ ही हजारों लोगों को बहा कर ले गई। घटना इतनी भयावह थी कि त्रासदी के बाद हजारों लाशें केदारनाथ मंदिर के मुख्य द्वार पर इकट्ठा हो गई थी। आज भी वहां कई लोग लापता हैं, जबकि कई विस्थापित होने को मजबूर हैं।
मौजूदा समय में भी भागीरथी उफान पर है और खतरे के निशान के बस दो मीटर नीचे बह रही है।

ब्रह्मपुत्र
वहीं, ब्रह्मपुत्र नदी में भी हुए कई हादसाओं ने अभी तक हजारों जिंदगी को बहा डाला। 2012 में असम में हुए नौका हादसे में 150 से ज्यादा लोग मारे गए थे। वहीं कई लोग लापता रह गए। ब्रह्मपुत्र नदी अपनी गहराई के लिए प्रचलित है।

गंगा
साल 2013 में हुए उत्तराखंड त्रासदी को भुलाया नहीं जा सकता। इस त्रासदी के खौफनाक मंजर के कहर से समस्त उत्तराखंड प्रभावित हुआ था। गंगा और इसकी सहायक नदियों ने अपना रौद्र रूप दिखाते हुए जहां उत्तराखंड के लाखों लोगों को बहा डाला। वहीं हजारों लोग बेघर हो गए। उत्तराखंड बाढ़ त्रासदी ने अपना ऐसा तांडव दिखाया था, जहां भागीरथी, गांधी सरोवर जैसी नदियों ने अपना विभत्स रुप दिखाते हुए कुछ ही घंटों में लाखों बूढ़े, बच्चे एवं महिलाओं की जान लील लीं।

कोसी
"बिहार का शोक" मानी जाने वाली कोसी नदी ने वर्ष 2008 में बिहार के लोगों पर कुछ इस कदर कहर बरपाया कि हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा तो हजारों बेघर हो गुमनाम की जिंदगी काट रहे हैं। मूसलाधार बारिश और तटबंध टूट जाने से आए कोसी के बाढ़ का वो भयावह मंजर आज भी बिहार के लोगों के ज़ेहन में ताजा है। इस बाढ़ से बिहार से उत्तरी इलाके समेत नेपाल भी प्रभावित हुआ था।
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