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रावण की पांच ग‍लतियां यानी आपकी सफलता के पांच मंत्र

बेंगलुरु। दशहरा में रावण दहन काफी अहमियत रखता है और बुराई पर अच्‍छाई की जीत का प्रतीक यह मौका आपको काफी कुछ सीखा जाता है। रावण को बुराई तो भगवान राम को अच्‍छाई का प्रतीक माना जाता है।

लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि रावण सिर्फ बुराई का प्रतीक नहीं है। वह आपको आपकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में सफल होने के कुछ तरीके भी सिखा सकता है।

रामायण में इस तरह की काफी किस्‍से हैं जो रावण से जुड़े हैं और जिनसे सबक लेकर आप अपनी जिंदगी में सफल हो सकते हैं। रावण की कुछ गलतियां आपको सफलता का मंत्र दे सकती हैं।

दशहरे के मौके पर जानिए आप रावण की पांच गल‍तियों से कौन से पांच मंत्र सफलता के लिए ले सकते हैं।

चालाक बनिए लेकिन जिद्दी नही

चालाक बनिए लेकिन जिद्दी नही

सीता को हरण करने से पहले रावण को ऐसा न करने की सलाह दी गई थी। उसे कई और लोगों ने इस काम को गलत कहकर ऐसा करने से रोका था लेकिन रावण नहीं माना। अगर रावण ने ऐसा नहीं किया होता तो शायद वह एक बड़ा राजा बन सकता था और कई वर्षों तक सफलता से लंका पर राज कर सकता था।

टीम की सलाह मानने में भलाई

टीम की सलाह मानने में भलाई

जब भगवान राम अपनी सेना के साथ लंका पहुंचे तो रावण और उसके मंत्रियों को अंत करीब लगने लगा था। रावण ने अपने मंत्रियों और वरिष्‍ठ लोगों से सलाह मांगी और एक ही जवाब मिली अगर शुरुआत में उनकी बात मानकर सीता का हरण नहीं किया होता तो आज यह दिन नहीं आता। यानी अगर आपकी टीम आपको कुछ कह रही है तो उसे जरूर सुनिए।

लीडर बनिए डिक्‍टेटर नहीं

लीडर बनिए डिक्‍टेटर नहीं

रामायण की कहानी ही शायद इस मूल मंत्र में है। जब राम और रावण की लड़ाई शुरू हुई तो रावण ने अपने सारे अहम योद्धाओं को एक साथ मैदान में नहीं भेजा वहीं भगवान राम की सेना में सारे योद्धा एक साथ मैदान में थे। नतीजा एक डिक्‍टेटर के तौर पर नेतृत्‍व कर रहे रावण की सेना के सारे योद्धओं की मौत और युद्ध में पराजय।

हमेशा अपने ज्ञान का घमंड मत करिए

हमेशा अपने ज्ञान का घमंड मत करिए

रावण का अहम उसके विनाश का सबसे बड़ा कारण था। रावण ने जब भगवान राम की सेना को देखा था तो उसे अहसास हो गया था कि उसे हार मिलने वाली हैं। लेकिन अपने अहम की वजह से रावण जैसे ज्ञानी ने भगवान राम की ओर से आए शांतिदूत की भी बात मानने से इंकार कर दिया।

अपने करीबी साथी की सलाह मानिए

अपने करीबी साथी की सलाह मानिए

रावण को कई बार उसकी पत्‍नी और उसके नाना ने सलाह दी थी। ये दो लोग उसे काफी अच्‍छे से जानते थे। लेकिन उसने कभी भी इनकी बातों को नहीं माना, नतीजा उसका अंत।

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