Wagner Group: क्या पुतिन को रूसी सेना से ज्यादा भरोसा क्रिमिनल्स के वैगनर ग्रुप पर है?

Wagner Group: रूस में गृहयुद्ध और तख्तापलट का खतरा फिलहाल टल गया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ बगावत करने वाली प्राइवेट सेना 'वैगनर' के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन ने अपने लड़ाकों को वापस छावनी में लौटने का आदेश दिया है।

दरअसल यूक्रेन के खिलाफ रूसी सेना के साथ मिलकर लड़ने वाले प्रिगोझिन ने अचानक विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था। वैसे प्रिगोझिन को राष्ट्रपति पुतिन का काफी खास माना जाता है, एक समय था जब उसे पुतिन का 'शेफ' भी कहा जाता था। हालांकि, बीते कुछ समय से प्रिगोझिन के देश के रक्षामंत्री सर्गेई शोइगू के साथ रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे हैं।

Does Putin trust the Wagner Group of Criminals more than the Russian Army?

पूरा मामला क्या है?

रूसी सेना और वैगनर ग्रुप के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। रूसी सेना इस वैगनर ग्रुप को अपने अधीन करने की कोशिशों में लगी है। जबकि येवगेनी प्रिगोझिन इसका विरोध कर रहे थे। इस आपसी खींचतान में यूक्रेन जंग के दौरान वैगनर ग्रुप के सैकड़ों लड़ाकों की जान चली गयी। यह हादसा यूक्रेन के बखमुत शहर पर रुसी कब्जे के दौरान हुआ। प्रिगोझिन ने इस नुकसान का जिम्मेदार रूसी सैन्य जनरलों और रक्षा मंत्रालय को बताया। उसका कहना था कि उन्हें जानबूझकर कम हथियारों की सप्लाई की गयी, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ।

प्रिगोझिन यही नहीं रुके और उन्होंने रूसी सेना की नाकामियों से भरा एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। उस वीडियो में उन्होंने रूस के रक्षामंत्री और सेनाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाये थे। दरअसल, इसी वीडियो ने तनाव बढ़ाने में एक प्रकार से आग में घी का काम किया।

वहीं रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे ऐसे ग्रुप्स को सरकार के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने होंगे। जबकि प्रिगोझिन ऐसे किसी भी अनुबंध से मना कर रहे थे। इसी बीच 23 जून को प्रिगोझिन ने एक और आरोप लगाया कि रूसी सेना ने पूर्वी यूक्रेन में वैगनर फील्ड शिविरों पर हमला किया था। इसलिए अब हम क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति भवन) से बदला लेंगे। यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के साथ उनकी कोई दुश्मनी नहीं है। हमारी लड़ाई उन लोगों से है जो इन हमलों के जिम्मेदार हैं। इसके अगले ही दिन वैगनर के लड़ाके यूक्रेन से मास्को के लिए रवाना हो गये। हालांकि एक दिन बाद ही यह मामला ठंडा पड़ गया।

कैसे सुलझाया गया मामला?

डेली मेल की खबर के मुताबिक इस विद्रोह को खत्म करने में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने रूस और प्रिगोझिन के बीच समझौता करवाया है। जिसके बाद प्रिगोझिन ने अपने लड़ाकों को वापस लौटने का आदेश दिया। इस समझौते के तहत क्रेमलिन की ओर साफ किया गया कि येवगेनी प्रिगोझिन और उनके लड़ाकों के खिलाफ विद्रोह के मामले में आरोप वापस लिये जायेंगे और उन पर केस नहीं होगा। साथ ही उनके लड़ाकों को रूसी सेना में शामिल होने के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर करने का मौका दिया जायेगा। वहीं येवगेनी खुद बेलारूस चले जायेंगे।

वैगनर ग्रुप और इसका इतिहास

अमेरिकी थिंकटैंक 'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' के मुताबिक वैगनर ग्रुप हजारों लड़ाकों वाला एक निजी सैन्य संगठन है। लेकिन इसका मैनेजमेंट और ऑपरेशन पूरी तरह से रूसी मिलिट्री और इंटेलीजेंस से जुड़ा हुआ है। वहीं अमेरिकी थिंकटैंक 'काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन' के मुताबिक यह समूह 2014 में पहली बार चर्चा में आया था। तब यह समूह पूर्वी यूक्रेन (क्रीमिया) में रूस समर्थक अलगाववादियों की मदद कर रहा था। उस समय यह रूस के लिए एक गुप्त संगठन की तरह था। तब से यह सीरिया समेत कम-से-कम आधा दर्जन अफ्रीकी देशों में सक्रिय है। अनुमान है कि पूरे अफ्रीका में इसके लगभग 5000 सदस्य तैनात हैं। इनमें पूर्व रूसी सैनिक, अपराधी और विदेशी नागरिक शामिल है। फिलहाल, वैगनर एक कंपनी के रूप में पंजीकृत है और इसका मुख्यालय सेंट पीटर्सबर्ग में ही है।

मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान द्वारा मई 2023 में छपे एक आलेख के मुताबिक इस वैगनर ग्रुप को प्रिगोझिन ने 2014 में अपने दम पर खड़ा किया था। यह संगठन जुलाई 2022 तक पूरी तरह से दुनिया की नजरों से छुपा रहा। हालांकि इसकी जानकारियां आती रहीं पर कौन इसे लीड करता है और कौन आदेश देता है, ये बातें पूरी तरह से गुप्त थीं। तब तक रूसी मीडिया में इस ग्रुप की उपस्थिति को स्वीकार नहीं किया था।

प्रिगोझिन का अपराधिक इतिहास

मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान द्वारा मई 2023 में छपे एक आलेख के मुताबिक वैगनर ग्रुप को पूर्व रूसी अधिकारी दिमित्री उतकिन और येवगेनी प्रिगोझिन ने मिलकर शुरू किया था। प्रिगोझिन रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग से हैं और विभिन्न अपराधों में संलिप्तता के चलते सोवियत संघ की जेलों में एक दशक बिता चुके हैं।

प्रिगोझिन को पहली आपराधिक सजा 1979 में 18 साल की उम्र में मिली। दो साल बाद, उन्हें डकैती और चोरी के लिए 13 साल की जेल की सजा सुनाई गयी। जेल से रिहा होने पर उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग में हॉटडॉग बेचने का काम शुरू किया। जल्द ही उनके व्यवसाय का विस्तार हुआ और प्रिगोझिन ने सेंट पीटर्सबर्ग के बड़े और कुलीन लोगों के साथ संपर्क स्थापित किया, जिसमें पुतिन भी शामिल थे।

इसके बाद उनकी कैटरिंग कंपनी कॉनकॉर्ड को क्रेमलिन में भोजन की आपूर्ति करने का ठेका मिल गया गया। यहां से उन्हें 'पुतिन का शेफ' कहकर बुलाया जाने लगा। बाद में प्रिगोझिन की कंपनियों को रूसी सैन्य और राज्य संचालित स्कूलों में भी भोजन आपूर्ति का ठेका मिल गया।

वैगनर और उसकी सैन्य क्षमता

संयुक्त राष्ट्र संघ ने 10 मार्च 2023 को एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा था कि वैगनर ग्रुप में कैदियों और अपराधियों की भर्तियां हो रही हैं। जंग में शामिल होने के बाद इन लोगों को छोड़ दिया जायेगा। इससे पहले दिसंबर 2022 में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा था कि वैगनर समूह के पास अनुमानित 50,000 लड़ाके हैं। जिसमें लगभग 10,000 ठेके पर और लगभग 40,000 रूसी जेलों में बंद अपराधी थे।

फरवरी 2022 में 'द टाइम्स' ने दावा किया कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की हत्या करने के लिए रूस ने 400 से अधिक विशेष लड़ाके भेजे हैं। ये लड़ाके वैगनर मिलिट्री ग्रुप के हैं। हालांकि, इस बात की पुष्टि न कभी इस ग्रुप ने की है और न कभी रूस ने।

प्रिगोझिन पर $250,000 डॉलर का इनाम

फरवरी 2021 से येवगेनी प्रिगोझिन का नाम एफबीआई की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में जोड़ा गया था। तब उन पर अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव और वहां की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोप लगे थे। जनवरी 2023 से अमेरिकी सरकार ने वैगनर ग्रुप को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन के रूप में नामित कर रखा है। फिलहाल अमेरिका ने येवगेनी प्रिगोझिन की गिरफ्तारी में मदद करने वाले को $250,000 डॉलर का इनाम देने की घोषणा कर रखी है।

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