Rajkumar: दमदार डायलॉग्स वाले राजकुमार, जिनके नखरों से घबराते थे साथी कलाकार
Rajkumar: 'जानी हम तुम्हें मारेंगे और जरुर मारेंगे, लेकिन वो बंदूक भी हमारी होगी, गोली भी हमारी होगी और वक्त भी हमारा होगा', 'हम तुम्हें वो मौत देंगे, जो ना तो किसी कानून की किताब में लिखी होगी और न ही कभी किसी मुजरिम ने सोची होगी', और 'ये बच्चों के खेलने की चीज नहीं, हाथ कट जाए तो खून निकल आता है' जैसे अपने दमदार डायलॉग्स की बदौलत बॉलीवुड और फैन्स के दिलों पर राज करने वाले अभिनेता राजकुमार की खनकती आवाज के फिल्म दर्शक आज भी कायल हैं। राजकुमार फिल्मों में ही नहीं बल्कि असल जिदगी में भी अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते थे। वह किसी को कुछ भी बोल दिया करते थे। स्वतंत्रता दिवस हो या गणतंत्र दिवस, उनकी फिल्म 'तिरंगा' (1993) टेलीविजन पर आज भी लोगों की पसंदीदा फिल्मों में से एक है।
शुरुआती जीवन व फिल्मी करियर
'रंगीली' फिल्म से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले राजकुमार का जन्म 8 अक्टूबर 1926 को बलूचिस्तान में हुआ था। उस वक्त उनका नाम कुलभूषण पंडित था, जिसे उन्होंने बाद में बदलकर राजकुमार कर लिया। भारत विभाजन के समय इनका परिवार मुंबई आ गया। इसके बाद राजकुमार ने पुलिस सर्विस ज्वाइन की। जहां इनकी ड्यूटी थी वहां पर फिल्मी लोगों का आना जाना लगा रहता था। थाने में काम करते हुए ही उन्हें उनकी दमदार आवाज और बातचीत के तरीके से फिल्म का ऑफर आ गया था।

दरअसल, एक बार फिल्म निर्माता बलदेव दुबे उनसे मिलने आये और उन्हें राजकुमार का बात करने का तरीका काफी पसंद आया। इसके बाद बलदेव दुबे ने राजकुमार को अपनी फिल्म का ऑफर दिया। राजकुमार ने भी ऑफर कबूल करते हुए तुरंत नौकरी से इस्तीफा दे दिया। राजकुमार को अपनी करियर में असल पहचान 'मदर इंडिया' फिल्म से मिली, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके जानने वालों का कहना है कि उनके बारे में फेमस था कि यदि उन्हें किसी फिल्म के डायलॉग पसंद नहीं आते थे तो वह कैमरे के सामने ही उसे बदल देते थे। हालांकि अपने अक्खड़ स्वभाव की वजह से वह असल जिंदगी में किसी से ज्यादा घुल मिल नहीं पाते थे और इस कारण इंडस्ट्री में उनके ज्यादा दोस्त भी नहीं थे।
जब तिरंगा फिल्म के लिए कोई नहीं माना
तिरंगा फिल्म को डायरेक्ट कर चुके मेहुल कुमार ने एक इंटरव्यू में ये किस्सा बताया था। उन्होंने बताया कि राजकुमार के व्यक्तित्व की वजह से कई एक्टर दूर से ही हाथ जोड़ लेते थे। इंस्पेक्टर शिवाजी राव वागले के रोल के लिए मुझे एक अभिनेता की तलाश थी। पर जिसके पास जाता था वह राज साहब का नाम सुनकर ना कर देते थे। उन्होंने बताया कि इस रोल के लिए वह नसीरुद्दीन शाह के पास गए तो उन्होंने कहा कि फिल्म में काम तो मैं कर लूंगा लेकिन राजकुमार के साथ तो काम करने से रहा।
सुपरस्टार रजनीकांत ने भी कुछ ऐसा ही रिस्पांस दिया था। मेहुल ने बताया कि जैसे तैसे उन्होंने नाना पाटेकर को मनाया। इसके बाद राजकुमार जी से बात हुई तो जब उनको बताया कि इंस्पेक्टर शिवाजी राव वागले के लिए नाना को फाइनल किया गया है तो राजकुमार ने कहा कि उसका दिमाग बहुत खराब रहता है। लोग भी यही कहने लगे थे कि मेहुल भाई तुमने तो ईस्ट और वेस्ट दोनों को साथ में साइन कर लिया है। पता नहीं सेट पर क्या होगा। इसके बाद छह महीने में यह फिल्म बनकर रिलीज हुई और सुपरहिट हो गई।
राज साहब का जलवा
राज साहब उन अभिनेताओं में से थे जो अपनी शर्तों पर काम किया करते थे। वह फिल्में फ्लॉप होने पर भी अपनी फीस बढ़ा देते थे। राजकुमार का कहना था कि वह अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करते हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि फिल्में फ्लॉप हो सकती है लेकिन मैं नहीं। उनकी कई फिल्में काफी हिट रही थी लेकिन कुछ ऐसी भी थीं जो फ्लॉप हुईं। वहीं उनके डायलॉग आज भी लोगों में काफी मशहूर है। इनमें फिल्म पाकिजा का उनका डायलॉग 'आपके पांव देखे, बहुत हसीन हैं, इन्हें जमीन पर मत रखिएगा मैले हो जाएंगे' काफी फेमस है।
सौदागर फिल्म के उनके कई डायलॉग मशहूर हुए थे। जैसे, 'जब राजेश्वर दोस्ती निभाता है तो अफसाने लिखे जाते हैं और जब दुश्मनी करता है तो तारीख बन जाती है'। फिल्म बेताज बादशाह का डायलॉग 'हम अपने कदमों की आहट से हवा का रुख बदल देते हैं'। अंतिम दिनों में अभिनेता राजकुमार को गले में कैंसर हो गया था। उस दौरान उन्हें खाने पीने से लेकर सांस तक लेने में तकलीफ होने लगी थी। और 3 जुलाई 1996 को राजकुमार ने दुनिया को अलविदा कह दिया।












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