South Korea Age: अजब-गजब! दक्षिण कोरिया के नागरिक हो गये जवान, सरकार ने ऐसे घटाई हर नागरिक की उम्र

28 जून 2023 से दक्षिण कोरिया का हर नागरिक से एक से दो साल जवान हो गया है या यूं कहे कि सबकी उम्र एक से दो साल छोटी हो गयी है। जी हां! यह कोई मजाक नहीं है।

दरअसल दक्षिण कोरिया में उम्र की गणना करने वाले परंपरागत तरीके को खत्म कर दिया गया है। अब दुनियाभर में जिस तरीके से उम्र की गणना की जाती है, उसे ही दक्षिण कोरिया में भी फॉलो किया जायेगा।

Citizens of South Korea became young, the government reduced the age of every citizen

दरअसल देश में उम्र से संबंधित एक नया कानून लागू हो चुका है। लोगों की उम्र में यह बदलाव तब हुआ जब दक्षिण कोरियाई संसद ने दिसंबर 2022 में उम्र गिनने की पारंपरिक पद्धति को खत्म करने के लिए एक कानून पारित किया था। कानून के अनुसार, 'कोरियन एज' सिस्टम को अब दस्तावेजों पर अनुमति नहीं दी जाएगी और सिर्फ मानकीकृत पद्धति ही मान्य रहेगी।

क्या है 'कोरियन एज सिस्टम'
'कोरियन एज सिस्टम' के मुताबिक कोरिया में जब कोई बच्चा पैदा होता है, तो उस बच्चे की आयु एक साल होती है। मतलब शून्य से नहीं बल्कि सीधा एक से शुरू होती है। इसके पीछे का लॉजिक यह दिया जाता था कि मां के गर्भ में बिताए हुए वक्त को भी गिना जाता है। इसलिए बच्चे की उम्र एक साल से गिनी जाती है।

कोरियन एज सिस्टम में एक पेंच भी है। दरअसल, बच्चे की उम्र उसके जन्मदिन पर नहीं बढ़ती बल्कि हर नये साल यानि 1 जनवरी के दिन सीधा एक साल बढ़ जाता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका जन्मदिन कब है।
इस व्यवस्था को थोड़ा विस्तार से समझते हैं। मान लीजिए कि कोई बच्चा 31 दिसंबर को पैदा होता है तो उसकी उम्र तो एक साल की हो गयी।

लेकिन, उसके अगले ही दिन 1 जनवरी को 'कोरियन एज सिस्टम' के हिसाब से वह बच्चा दो साल का हो जायेगा। मतलब यह कि एक दिन पहले जन्मा बच्चा अब दो साल का हो गया। इसलिए अब कोरिया में इस कानून को बदला गया और इसके तहत अब लोगों की उम्र जीरो से जोड़ी जायेगी, जिसके तहत नागरिकों की उम्र घट गयी है। रॉयटर्स की खबर के मुताबिक वैसे मेडिकल और लीगल मुद्दों पर साल 1960 के दशक से ही दक्षिण कोरिया 'डेट ऑफ बर्थ' सिस्टम ही अप्लाई करता रहा है।

कोरिया में उम्र की गणना के तीन तरीके
कानूनी और प्रशासनिक कामों के लिए दक्षिण कोरिया में अंतरराष्ट्रीय सिस्टम से ही उम्र की गणना की जाती है।
किसी बच्चे के जन्म के समय उसकी उम्र शून्य से मानी जाती है, लेकिन साल बदलते ही यानी एक जनवरी आते ही उसकी उम्र एक साल की हो जाती है। इसे 'ईयर एज सिस्टम' कहते हैं।

पारंपरिक नियम जो सब पर लागू होता था। किसी बच्चे के पैदा होते ही उसकी उम्र एक साल मानी जाती थी और नववर्ष यानि एक जनवरी आते ही उस बच्चे की उम्र में एक साल और जुड़ जाता था। यानी दिसंबर में जन्मा बच्चा जनवरी में दो साल का हो जाता था।

'ईयर एज सिस्टम' अभी भी रहेगा लागू
'ईयर एज सिस्टम' कुछ कंडिशन के साथ अभी भी लागू रहेगा। यह फिलहाल स्कूल, अनिवार्य मिलिट्री सर्विस, शराब और सिगरेट खरीदने और पीने की उम्र जैसे पहलुओं पर ही लागू रहेगा। हालांकि, कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 'कोरियन एज सिस्टम' में किये गये बदलावों के असर को देखते आने वाले समय में 'ईयर एज सिस्टम' को भी खत्म कर दिया जायेगा।

कब हुई बदलाव की मांग?
वैसे यह पहला मौका नहीं है, जब देश में इस बदलाव की कोशिश की गयी है। साल 2019 और 2021 में भी उम्र की व्यवस्था को एकरूप करने का बिल लाया गया था लेकिन उस वक्त कोरियाई असेंबली में बिल को समर्थन नहीं मिला था। ऐसा नहीं है कि देश में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नहीं थी लेकिन इसे कानूनी रूप अब जाकर मिला है। दरअसल उम्र की गिनती में बदलाव का मकसद कोरिया को बाकी दुनिया के देशों के बराबर लाना है।

'द कोरियन हेराल्ड' की एक खबर के मुताबिक दक्षिण कोरिया में उम्र की गणना के तरीके को बदलने की मांग साल 2022 में जनता के बीच जोर-शोर से उठी थी। जब स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोविड-19 वैक्सीन दिशानिर्देश और नीतियां बनाने के लिये अंतरराष्ट्रीय उम्र और कोरियाई उम्र का साथ-साथ इस्तेमाल किया था। इस उम्र के झमेले की वजह से कोरिया में बहुत ही भ्रम पैदा हो गया था।

इसके दौरान सितंबर, 2022 में कोरियाई सरकार ने एक सर्वे किया था जिसमें 86 प्रतिशत लोगों ने उम्र में अंतरराष्ट्रीय बदलाव को मानने पर सहमति जताई थी। हालांकि, राष्ट्रपति यूं सुक येओल ने पिछले साल जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ा था, तब उन्होंने भी इस 'कोरियन एज सिस्टम' में बदलाव की मांग की थी, जिसे जनता का पूरा समर्थन मिला था।

क्या अब लोगों को बदलने होंगे पूरे कागजात?
इस सिस्टम में बदलाव के बाद दक्षिण कोरियाई लोगों को किसी भी दस्तावेज या आईडी को अपडेट करने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि सरकारी फॉर्म के लिए उपयोग की जाने वाली उम्र इंटरनेशनल सिस्टम पर ही आधारित है।

किन-किन देशों में ऐसा नियम?
बता दें कि पूर्वी एशियाई देशों में उम्र की गणना करने के लिए अलग-अलग पारंपरिक तरीके हैं लेकिन ज्यादातर देशों में इन्हें अब खत्म कर दिया है। चीन, उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, जापान और वियतनाम में पारंपरिक तरीके से उम्र की गणना करने की परंपरा है। हालांकि, चीन के अलावा जापान ने 1950 और उत्तर कोरिया ने 1980 के दशक में उम्र गिनने के इस तरीके को खत्म कर इंटरनेशनल एज काउंटिंग सिस्टम को लागू कर दिया है। वहीं दक्षिण कोरिया ने अब इस पारंपरिक तरीके को खत्म किया है। जबकि वियतनाम में अभी भी उम्र की गणना के लिए ये पारंपरिक तरीका अपनाया जाता है।

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