Cervical Cancer: बढ़ रहे हैं सर्वाइकल कैंसर के आंकड़े, समय पर इलाज से हो सकता है लाभ

Cervical Cancer: विज्ञान की लाख प्रगति के बावजूद दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण सटीक उपचार समय पर उपलब्ध नहीं होना है। वैज्ञानिक अध्ययनों में पता चला है कि भारत में कैंसर से मरने वालों की संख्या बढ़ी है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद इस पर लगाम लगना दूर की कौड़ी साबित हो रही है। नाकाफी कोशिशों पर दोहरी मार यह कि देश में कैंसर से महिलाओं की मृत्यु दर पुरुषों के मुकाबले बढ़ गई है।

आंकड़ों में कैंसर से पुरुषों की मृत्यु दर में जहां 0.19 प्रतिशत सालाना की कमी आई है, वहीं कैंसर से होने वाली महिलाओं की मृत्यु दर में सालाना 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। यह स्टडी रिपोर्ट अमेरिकन सोसायटी आफ ऑंकोलॉजी से मान्यता प्राप्त जेसीओ ग्लोबल ऑंकोलॉजी में प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2000 से 2019 के बीच भारत में 12.85 मिलियन लोगों की मौत 23 अलग-अलग तरह के कैंसर की वजह से हुई थी।

Cervical cancer cases increasing, timely treatment can be beneficial

इस स्टडी रिपोर्ट को तैयार करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की शाखा इंटरनेशनल एजेंसी रिसर्च ऑन कैंसर की मदद भी ली गई है। इसके मुताबिक महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत में सर्वाइकल कैंसर के सबसे ज्यादा आंकड़े सामने आए हैं।

क्या होता है सर्वाइकल कैंसर

सर्वाइकल कैंसर का मतलब होता है गर्भाशय की ग्रीवा में होने वाला कैंसर। यह महिलाओं के लिए खतरनाक सूचना है कि आंकड़ों के अनुसार देश में सर्वाइकल कैंसर से हर 8 मिनट में एक महिला की मौत हो जाती है। यह आंकड़ा भी सामने आया है कि समय पर इलाज न पहुंच सकने की वजह से 15 से 44 वर्ष की आयु वर्ग (यानी प्रजनन सक्षम वर्ष) की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन रहा है। जबकि जागरूकता और समय पर डॉक्टर और उपचार की उपलब्धता से इस खतरनाक कैंसर को और मौत की आशंका को काफी कम किया जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में साल 2019 में 45000 से ज्यादा महिलाओं की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर से हो गई थी। वहीं, भारत सरकार के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 से 2022 के बीच भारत में कुल 23 लाख 67 हजार 990 लोगों की मौत कैंसर के चलते हो गई। इसका मतलब अपने देश में पिछले 22 सालों के दौरान डेढ़ करोड़ से भी अधिक लोग सिर्फ कैंसर की वजह से काल के गाल में समा गए। दूसरी ओर कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित करने की संसदीय समिति की सिफारिश कई महीने से सरकार के पास विचाराधीन है।

चेतावनी देते हैं मौत के आंकड़े

कैंसर से होने वाली मौत के आंकड़े डरा ही नहीं रहे हैं बल्कि चेतावनी दे रहे हैं कि दुनिया और देश के लोग खास तौर पर जागरूक हो जाएं, क्योंकि आने वाले 5 साल ज्यादा खतरे से भरे दिखाई दे रहे हैं। खासकर महिलाओं के लिए कैंसर को लेकर अधिक जागरूक होने की जरूरत है। क्योंकि उनकी इम्यूनिटी को लेकर हाल ही में वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौर में हमने देखा था कि वे स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक स्थिति से गुजर रही हैं।

वैश्विक तौर पर दिल की बीमारी से होने वाली मौत के बाद कैंसर दूसरी सबसे घातक गैर संचारी बीमारी है। दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौत में लगभग 9 फीसदी भारतीय आबादी होती है। आंकड़ों में देखें तो देश में कैंसर के लिए प्रति एक लाख आयु पर मानकीकृत मृत्यु का दर यानी एएसएमआर 63.01 है इसमें पुरुषों और महिलाओं की हिस्सेदारी क्रमशः 65.4 प्रतिशत और 61 प्रतिशत है।

अब हम सीधे-सीधे महिलाओं के सर्वाइकल कैंसर पर बात करते हैं। यह जानकर किसी को भी बड़ा धक्का लग सकता है कि महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत का सबसे बड़ा, प्रचलित और स्थापित कारण सर्वाइकल कैंसर है। प्रजनन सक्षम वर्ष यानी 15 से 44 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में कैंसर मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव कैसे

डॉक्टर कहते हैं कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन, उससे पहले वैक्सीनेशन के लिए जागरूकता और नियमित स्क्रीनिंग की जरूरत है। कई डॉक्टर यह सलाह देते हैं कि वजन को नियंत्रित रखने से और स्वस्थ जीवन शैली से खान-पान को ठीक रखने से भी सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है।

सर्वाइकल कैंसर को तभी रोका जा सकता है जब इसका पता जल्दी चल जाये और प्रभावी ढंग से इलाज शुरू हो जाए। इसकी जांच के लिए हाल ही में आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप फोटो स्पाईमेडेक्स ने डिवाइस तैयार की है जिससे कैंसर की पुष्टि करने के लिए मरीज के खून की जांच नहीं करनी पड़ेगी। यह ऑप्टिकल तकनीक की तरह त्वचा की स्क्रीनिंग कर लेजर के माध्यम से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर बीमारी को डायग्नोज कर सकेगा।

केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद से इसको मदद मिली है। आईआईटी के वैज्ञानिकों की देखरेख में तैयार, आकार में छोटी और पोर्टेबल डिवाइस का क्लिनिकल ट्रायल एम्स भुवनेश्वर सहित देश के कई अस्पतालों में जैसे जीबीजीएसबीएम मेडिकल कॉलेज, जेके कैंसर अस्पताल और आरएमएल लखनऊ में किया जा रहा है।

सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन

इंडियन जर्नल ऑफ गाइनोकोलॉजिक ऑंकोलॉजी (दिसंबर 2021) की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में एचपीवी टीकाकरण 2008 में शुरू किया गया था। फिलहाल इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाना बाकी है। विश्व स्तर पर लाइसेंस प्राप्त दो टीके भारत में उपलब्ध हैं। एक चतुर्भुज टीका (मर्क से गार्डासिल) और एक द्विसंयोजक टीका (ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन से सर्वारिक्स)। देश में बीते साल 2022 में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के वैक्सीन Cervavac को मार्केट ऑथराइजेशन के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) की मंजूरी मिली थी। यह भारत का पहला ह्यूमन पेपिलोमावायरस वैक्सीन (qHPV) वैक्सीन है। इसे राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण रणनीतियों में लागू किया जा सकता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+