Income Tax: जानिये, किन देशों में है जीरो इनकम टैक्स और कहां है सबसे ज्यादा?
भारत में साल 2023-24 का बजट पेश कर दिया गया है। सबसे ज्यादा चर्चा इनकम टैक्स में छूट को लेकर है लेकिन, दुनियाभर में कई ऐसे देश भी हैं जहां एक रुपया टैक्स भी नहीं देना होता है।

Income Tax: बजट 2023-24 को पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स धारकों को बड़ी राहत दी है। अब 7 लाख रुपये तक की आमदनी पर लोगों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। दरअसल, अभी तक 5 लाख रुपये तक आमदनी पर कोई आयकर नहीं देना पड़ता था लेकिन अब इस कैप को सरकार ने बढ़ाकर 7 लाख रुपये तक कर दिया है।
वहीं इसके अलावा सरकार ने टैक्स स्लैब के रेट में भी बदलाव किया है। अब टैक्स की सीधी छूट 2.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख कर दी है। 3 से 6 लाख तक की कमाई पर 5% और 6 से 9 लाख तक की कमाई पर 10% टैक्स देना होगा। इसके अलावा 9 से 12 लाख तक 15% टैक्स लगेगा तो 12 से 15 लाख तक की कमाई पर 20% इनकम टैक्स देना होगा और 15 लाख से ज्यादा कमाई हो रही तो 30% के स्लैब में आएंगे।
हर देश के विकास में टैक्स एक बहुत महत्वपूर्ण कारक है। टैक्स से मिलने वाली रकम से सरकार अपने नागरिकों के लिए बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा पर होने वाले आर्थिक खर्च के लिए सक्षम बनती है। वहीं अब गौर करने वाली बात ये है कि दुनिया में ऐसे देश भी हैं जहां लोगों को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता है। या फिर वैसे देश जहां दुनिया में सबसे ज्यादा टैक्स लोगों को देना पड़ता है। आइये, आज हम इसी पर जानकारी देते हैं।
सबसे ज्यादा टैक्स लेने वाले देश
फिनलैंड (56.95%) - फिनलैंड में दुनिया भर में व्यक्तिगत टैक्स सबसे ज्यादा है। यहां राज्य टैक्स, नगरपालिका टैक्स के साथ-साथ चर्च टैक्स भी शामिल है। नगरपालिका टैक्स की दरें 16.5 और 23.5% के बीच इलाकों और कमाई के हिसाब से भिन्न होती हैं। वहीं कोई शख्स फिनिश राज्य चर्च का सदस्य है, तो चर्च टैक्स 1 से 2% भी देय हो सकता है। मतलब कुल मिलाकर 56.95% (सरकारी टैक्स 31.25% + नगरपालिका टैक्स 23.5% + चर्च टैक्स 2.2%) देना होता है। वहीं बीमारी बीमा योगदान और सामाजिक टैक्स 1.18 और 0.68% शामिल हैं। वैसे मार्जिनल टैक्स दर 78,500 यूरो की आय के साथ शुरू होती है।
डेनमार्क (55.89%) - डेनमार्क सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति आय वाला देश है। यहां पर भी केंद्र टैक्स, राज्य टैक्स (नगरपालिका व अन्य) और चर्च टैक्स देना होता हैं।
जापान (55.95%) - जापान में परमानेंट रेजिडेंट टैक्स पेयर पर दुनियाभर में कमाई के आधार पर टैक्स लगाया जाता है। जो नॉन रेजिडेंट टैक्स पेयर्स होते हैं उन पर जापान से हुई आय पर ही टैक्स लगाया जाता है। यहां बता दें कि 40,000,000 जापानी येन के साथ व्यक्तिगत मार्जिनल टैक्स दर 45.945% ही है लेकिन स्थानीय लोगों को नगरपालिका और प्रांत का अतिरिक्त 10% टैक्स देना होता है जो मिलाकर 55.95% हो जाता है।
ऑस्ट्रिया (55%) - सालाना एक मिलियन यूरो की कमाई पर इस देश में 55 प्रतिशत तक टैक्स देना होता है। वहीं 11 से 18 हजार यूरो पर 20%, 18 से 31 हजार यूरो पर 35%, 31 से 60 हजार यूरो पर 42%, 60 से 90 हजार पर 48%, 90 हजार से 1 मिलियन पर 50% और उससे ऊपर कमाई पर 55% टैक्स देने का प्रावधान हैं।
अरुबा (52%)- आधिकारिक तौर पर अरूबा देश नीदरलैंड साम्राज्य का एक संघटक देश है जो कैरेबियन सागर के मध्य-दक्षिण में स्थित है। परागुआना के वेनेजुएला प्रायद्वीप के उत्तर में लगभग 29 किलोमीटर और कुराकाओ से 80 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। यहां पर AWG 141,783 की सलाना आय वालों को 52% का टैक्स देना होता है।
इन देशों में अपनी कमाई पर नहीं देना होता है टैक्स
KPMG 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक इन देशों में जीरो इनकम टैक्स होता है। इन देशों में एंगुइला, एंटीगुआ और बारबुडा, बहामास, बहरीन, बरमूडा, ब्रुनेई दारुस्सलाम, केमैन आइलैंड्स, कांगो, कुवैत, ओमान, कतर, सेंट किट्स एंड नेविस, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। वैसे गौर करने वाली बात यह है कि कुछ ऐसे देश इनमें हैं जहां इनकम टैक्स तो जीरो है लेकिन कुछ अन्य टैक्स वहां जरूर लगते हैं।
बहामास - बहामास में इनकम टैक्स तो नहीं लगाया जाता है लेकिन इम्पोर्ट ड्यूटी, राष्ट्रीय बीमा और संपत्ति कर अस्तित्व में हैं। उसी तरह बरमूडा के लोगों को भी कोई इनकम टैक्स नहीं लगता है। हालांकि, यहां नागरिकों को पे-रोल टैक्स, सामाजिक सुरक्षा, संपत्ति, कस्टम ड्यूटी पर 25% टैक्स लगाया जाता हैं। कुवैत में भी इनकम टैक्स जीरो है लेकिन यहां भी सामाजिक सुरक्षा में योगदान देना अनिवार्य है।
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बहरीन के नागरिकों को अपनी कमाई का 7 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक सुरक्षा में जमा कराना पड़ता है। यहां मकान किराए पर देने से प्राप्त आय पर टैक्स देना पड़ता है, साथ ही एंप्लायमेंट टैक्स, स्टैम्प ड्यूटी पर और रियल एस्टेट के ट्रांसफर पर भी टैक्स लगता है। इसके अलावा, सऊदी अरब में नागरिकों को वैसे तो कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। फिर भी यहां सामाजिक सुरक्षा के नाम पर कुछ राशि वसूली जाती है।
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