बुक रिव्यू: 'मैं गुमशुदा' पाट्रिक मोदियानो
मैं गुमशुदा कहानी है अपने अतीत की तलाश कर रहे डिटेक्टिव गी रोलां की। अपने अतीत को लेकर उनकी जिज्ञासा और उस की खोज को लेकर उनके प्रयासों की कहानी है मै गुमशुदा। फ्रेंच के जाने-माने लेखक पाट्रिक मोदियानों ने 1978 में इस उपन्यास को लिखा, जिसे हिंदी में अनुवादित किया है मोनिका सिंह ने।

लेखक ने कहानी के मुख्य पात्र गी रोलां को किरदार को बखूबी उभारा है। गी रोलां जो अपनी याददाश्त खो चुके है, अपने अतीज और अपनी जिंदगी की हकीकत की तलाश में जुट जाते हैं। गी अपने जीवन के परतों को उभारने की कोशिश करते है। इस कोशिश में उनके सामने कई घटनाएं आती है, जो उसके अस्तित्व को तलाशने में मदद करती है। गी अपने अतीत की तलाश की शुरूआत पेरिस से करते है, जो कई देशों से गुजरता हुआ प्रशांत महासागर में एक द्वीप पर जाकर खत्म हो जाता है।
इस तलाश के दौरान गी कई किरदारों और पात्रों से मिलते हैं। उनके साथ कई अनूठी घटनाएं होती है। उनके सामने कई बार ऐसी परिस्थितियां आती है, जिसे देखकर गी भी संशय में पड़ जाते है। कहानी के कई किरदार ऐसे हैं, जो खुद अपने जीवन की उलझनों में उलझे हुए हुए हैं। गी उनसे मिलकर अलग-अलग अहसासों से गुजरते हैं।
गी के द्वारा लेखक ने अपनी कहानी में मानवीय संबंधों, संवेदनाओं, भवनात्मक संबंधों के साथ-साथ स्थान के हिसाब से बदल ती मानवीय मनोदशाओं का चित्रण बखूबी किया है। भावनाओं को व्यक्त करने के लिए लेखक द्वारा चुने गए किरदार कहानी क और दमदार बनाते हैं। अपने अतीत से अंजान एक व्यक्ति कैसी-कैसी भवनाओं से गुजरता है, इस बात को लेखक ने बखूबी समझाने का प्रयास किया है। गी के मन के भीतर चल रहे द्वंद को पाठकों तक पहुंचाने के लिए लेखक ने बहुत गहनता से अनुभव करते हुए शब्द दिए हैं। अगर सारांश के तौर पर कहा जाए तो पाद्रिक मोदियानों ने एक बार फिर पाठकों को अपनी किताब से बांधे रखने में कामियाबी हासिल की है।
पुस्तक: मैं गुमशुदा
मुख्य उपन्यास: मिसिंग पर्सन
लेखक: पाट्रिक मोदियानो,
हिंदी अनुवाद: मोनिका सिंह
मूल्य: 245 रूपए
प्रकाशक: राजपाल एंड संस, दिल्ली
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