यूपी: फर्जी मर्डर केस बनाने वाले दो पुलिस अफसरों पर केस दर्ज, निर्दोष पिता को बचाने के लिए जिंदा लौटी थी बेटी

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश पुलिस अपनी करतूतों की वजह से लगातार खबरों में रहती है। इसी सप्ताह यूपी पुलिस के कुछ अफसरों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केस दर्ज किया है, उन पर आरोप है कि रात में बिना न्यायिक आदेश के ही उन्होंने रात में लखीमपुर खीरी जा रही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को गिरफ्तार किया। अक्टूबर में दिल्ली हाईकोर्ट ने यूपी की शामली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। दरअसल बालिग लड़की की अपनी मर्जी से शादी करने के केस में शामली पुलिस उसके ससुर और देवर को दिल्ली से रात में उठा ले गई थी और दोनों की गिरफ्तारी शामली में दिखाई थी। यूपी पुलिस का एक और कारनामा फर्रुखाबाद में सामने आया जिसमें एक निर्दोष पिता को बेटी के कत्ल के केस में तीन साल जेल में रहना पड़ा जबकि बेटी जिंदा थी। इस फर्जी केस में पिछले साल पिता की रिहाई के एक साल बाद अब दो पुलिस अफसरों समेत छह लोगों पर केस दर्ज किया गया है।

पुलिस की करतूत से तीन साल जेल में रहा निर्दोष

पुलिस की करतूत से तीन साल जेल में रहा निर्दोष

61 साल के किसान लाला राम को पुलिस ने बेटी के कत्ल का आरोपी बनाकर फर्जी सबूतों के आधार पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इस केस में लाला राम तीन साल तक जेल में बंद रहे थे। पिता के जेल में होने के बारे में जब बेटी ने जाना था तब उसने वापस लौटकर कोर्ट में अपने जिंदा होने का बयान दिया था। इसके बाद लाला राम को कोर्ट ने सभी आरोपों से मुक्त कर रिहा कर दिया था। रिहाई के एक साल बाद अब फर्रुखाबाद में दो पुलिस अफसरों और चार अन्य लोगों के खिलाफ लाला राम को झूठा मर्डर केस में फंसाने का केस दर्ज किया गया है। तत्कालीन मेरापुर थाना एसओ सुशील कुमार और सब इंस्पेक्टर मोहम्मद आसिफ ने इस केस की जांच कर लाला राम के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। इन दो पुलिस अफसरों के अलावा लाला राम के पड़ोसी संतोष कुमार, संतोषी देवी, ओंकार और अजब सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस अफसरों पर केस

कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस अफसरों पर केस

इस बारे में मेरापुर थाने के एसओ देवी प्रसाद ने बताया है कि कोर्ट के आदेश पर पुलिस अफसर सुशील कुमार, आसिफ और चार अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 166, 167 और 194 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने कानून का उल्लंघन कर फर्जी दस्तावेजों और फर्जी सबूतों के आधार पर लाला राम को केस में दोषी साबित करने की साजिश रची। आरोपी पुलिस अधिकारी सुशील कुमार फिलहाल सीआईडी हेडक्वार्टर क्राइम ब्रांच लखनऊ में तैनात है जबकि मोहम्मद आसिफ की पोस्टिंग आजमगढ़ में है।

2016 में हुई थी लाला राम की बेटी लापता

2016 में हुई थी लाला राम की बेटी लापता

2016 में मेरापुर थाना क्षेत्र के देवसैनी गांव निवासी लाला राम की 18 वर्षीय बेटी सोनी लापता हो गई थी। लाला राम ने बेटी की बहुत तलाश की लेकिन जब वह नहीं मिली तो पुलिस के पास गया था। पुलिस ने नहीं सुनी फिर उसने कोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट के निर्देश पर मेरापुर थाने में लाला राम के पड़ोसी संतोष कुमार, उसकी पत्नी संतोषी देवी, ओंकार और अजब सिंह के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज हुआ था। लाला राम ने इन चार पड़ोसियों पर बेटी के अपहरण करने का आरोप लगाया था। कुछ दिनों बाद एक लड़की की सड़ी हुई लाश मिली थी जिसकी शिनाख्त लाला राम की बेटी सोनी के तौर पर परिजनों ने की थी। इसके बाद तत्कालीन मेरापुर एसओ सुशील कुमार और सब इंस्पेक्टर आसिफ ने केस की जांच के दौरान लाला राम को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने दावा किया था कि लाला राम की बेटी सोनी किसी लड़के के साथ प्रेम संबंध में थी। लाला राम को यह बर्दाश्त नहीं था इसलिए उसी ने बेटी सोनी का कत्ल कर दिया था।

पिछले साल आरोपों से मुक्त हुआ था पिता

पिछले साल आरोपों से मुक्त हुआ था पिता

जेल में तीन साल बिताने के बाद लाला राम को कोर्ट से जमानत मिल गई थी और वह बाहर आ गया था। इसके बाद जब बेटी सोनी को पता चला कि उसके मर्डर के केस में पिता आरोपी है तो वह पिछले साल 2020 में वापस लौटकर आई। उसने पुलिस के सामने बयान दिया कि वह जीवित है और उसको यह मालूम नहीं था कि उसके कत्ल के आरोप में पिता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। कोर्ट में भी सोनी का बयान हुआ जिसके बाद लाला राम को सभी आरोपों से जज ने मुक्त कर दिया था। अब एक साल बाद उन पुलिस अफसरों और पड़ोसियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है जिन्होंने लाला राम को झूठे केस में फंसाने की साजिश रची थी।

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