इकबाल के बदले बोल, कहा- अयोध्या में 5 एकड़ जमीन देना चाहते हैं तो उसी 67 एकड़ में से दें

फैजाबाद। अयोध्या के भूमि विवाद में मुस्लिमों की ओर से पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सुर बदल दिए हैं। इकबाल ने कहा है कि फैसले में हमें जो 5 एकड़ जमीन दिए जाने की बात कही गई है, उसे हमें उस अधिगृहीत 67 एकड़ भूमि में से दें, जो सरकार के नियंत्रण में है। यदि सरकार ये नहीं चाहती तो हम भी जमीन नहीं लेंगे।''

इससे पहले जब 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था, उस दौरान इकबाल अंसारी ने कहा था कि हमें कोर्ट का फैसला मंजूर है। इस पर कोई आपत्ति नहीं है और सबको इसका स्वागत करना चाहिए। किंतु मंगलवार को इकबाल ने नई बात कही। उन्होंने सरकार के नियंत्रण वाली 67 एकड़ जमीन में ही से मस्जिद बनवाने के लिए 5 एकड़ जमीन मांगी है।

मुस्लिम पक्ष ने 67 एकड़ भूमि में से मांगा अपना हक

मुस्लिम पक्ष ने 67 एकड़ भूमि में से मांगा अपना हक

बता दें कि, अयोध्या में कुल 67 एकड़ भूमि में से 2.77 एकड़ भूमि पर ​ढांचे को लेकर विवाद था। इसी विवाद के निपटारे की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी। शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन से मुस्लिम पक्ष के दावे को खारिज कर दिया। वह जमीन रामलला विराजमान पक्ष के लिए सरकार को दे दी गई। अभी वह जमीन सरकार के रिसीवर के पास है। उसके अलावा 64 एकड़ जमीन भी सरकार के पास है, जिसका अधिग्रहण केंद्र सरकार ने विवादित क्षेत्र के साथ 1991 में किया था। मुस्लिम पक्ष के अगुओं का कहना है कि वे अपनी सहूलियत के हिसाब से जमीन की मांग करेंगे।

इकबाल अंसारी ने दिए ये तर्क

इकबाल अंसारी ने दिए ये तर्क

अंसारी ने अपनी मांग को जायज ठहराते हुए कहा कि उस 67 जमीन पर कई कब्रिस्तान और सूफी संत काजी कि़दवा की दरगाहें हैं। अन्य मुद्दई हाजी महबूब ने भी कहा कि हम झुनझुना स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार को साफ तौर पर बताना होगा कि वह हमें कहां जमीन देने जा रही है। मौलाना जमाल अशरफ ने कहा कि मुसलमान मस्जिद बनाने के लिए अपने पैसे से जमीन खरीद सकते हैं और वे इसके लिए केंद्र सरकार पर निर्भर नहीं हैं। हमें 5 एकड़ देना ही चाहते हैं तो उस अधिग्रहीत भूमि में से ही दें।

'ओवैसी के बयान नहीं सुनता, पक्षकार मैं हूं'

'ओवैसी के बयान नहीं सुनता, पक्षकार मैं हूं'

अंसारी से जब कहा गया कि हैदराबाद के असदुद्दीन ओवैसी कह रहे हैं कि हमें भीख में जमीन नहीं चाहिए। लड़ाई उसी 2.77 एकड़ जमीन के लिए थी जो अयोध्या में हिंदूओं को दे दी गई है।' तो अंसारी ने कहा कि अयोध्या विवाद में मुस्लिमों के पक्षकार हम हैं। कोई क्या कह रहा है, हम सुनते भी नहीं हैं। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि मैं पुनर्विचार याचिका नहीं डालूंगा।एक फैसला आने में सत्तर साल लग गए, जबकि सारे गवाह और सबूत हमने दिए। अब हम चाहेंगे कि हिंदू-मुस्लिम भाईचारा बना रहे।''

हाशिम अंसारी ने सालों तक लड़ा था केस

हाशिम अंसारी ने सालों तक लड़ा था केस

बता दें कि, इकबाल अंसारी मुस्लिमों के पहले पक्षकार हाशिम अंसारी के बेटे हैं। हाशिम अंसारी का 3 साल पहले निधन हो चुका है। हाशिम अंसारी चाहते थे कि उनके रहते ही अयोध्या मामले का निपटारा हो जाए। मगर, सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अक्टूबर में ही सुनवाई शुरू की। अब हाशिम के बेटे इकबाल अंसारी मानते हैं कि उनके पिता अगर आज जिंदा होते तो वो भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते।'

ओवैसी ने दिए ऐसे भड़काऊ भाषण

ओवैसी ने दिए ऐसे भड़काऊ भाषण

वहीं, अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से तेलंगाना में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी लगातार कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ओवैसी का कहना है कि वहां 500 साल से मौजूद मस्जिद को हिंदूओं ने तोड़ा था, हमें वो जमीन नहीं दी गई और हिंदूओं को दे दी गई। हमें 5 एकड़ जमीन अलग से देने का क्या मतलब है, हमारी लड़ाई लीगल राइट्स को लेकर थी। हमें मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन की खैरात की जरूरत नहीं है। मैं खुद मुस्लिम पक्षकारों से कहूंगा कि वो 5 एकड़ जमीन न लें। रिव्यू पिटीशन दाखिल करें।'' ओवैसी ने कई भड़काऊ बातें भी कहीं। जिनके लिए दो राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।

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