Adipurush के खिलाफ अब अयोध्या के संतों का 'हल्ला बोल', श्रीराम सेना ने दर्शकों को हॉल से निकला...शो कराया बंद
Adipurush controversy: 500 करोड़ के भारी-भरकम बजट से बनी प्रभास और कृति सेनन स्टारर फिल्म 'आदिपुरुष' रिलीज के साथ ही विवादों में घिर गई और फिल्म पर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आदिपुरुष फिल्म को लेकर देश के अंदर बैन किए जाने की मांग उठने लगी है।
आदिपुरुष फिल्म को लेकर उठे विवाद की आंच अब श्रीराम की नगरी अयोध्य तक भी पहुंच गई है। अयोध्या के साधु-संतों ने अब फिल्म पर तत्काल बैन लगाने की मांग उठाई है। राम जन्मभूमि के प्रमुख पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि यदि हिंदू देवी-देवताओं का अपमान ऐसे ही होता रहा तो हमें मजबूर होकर सड़कों पर उतरना होगा।

राम जन्मभूमि के प्रमुख पुजारी कहा कि इस फिल्म देखकर खून खौल उठता है। महंत कमलनयन ने दर्शकों से अपील भी करते हुए कहा कि फिल्म देखकर पाप के भागीदार न बनें। क्योंकि, फिल्म निर्माताओं ने रामायण के पात्रों को गलत तरीके से पेश किया है और हिंदू देवी-देवताओं को 'विकृत' तरीके से दिखाया है।
तो वहीं, श्रीराम सेना और हिंदू संगठनों ने अयोध्या के एक मात्र सिनेमा घर में लगी फिल्म आदिपुरुष का शो सोमवार 19 जून को बंद करा दिया। इस दौरान वो झंडे लहराते हुए सिनेमाघर में घुसे और 'जय श्री राम' के नारे लगाए। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, श्रीराम सेना ने पुलिस की मौजूदगी में फिल्म का प्रसारण बंद करा दिया।
फिल्म आदिपुरुष का शो बंद करने पहुंचे श्रीराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिने सिंह ने कहा, गलत फिल्म बनाई गई है। हमारी संस्कृति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे अयोध्या के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे। अयोध्या में आदिपुरुष किसी भी कीमत पर नहीं चलेंगी।
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वहीं, अयोध्या के सांधु-संतो ने भी फिल्म के डायलॉग्स पर आपत्ति जाते हुए फिल्म को बैन किए जाने की मांग उठाई है। राम जन्मभूमि के प्रमुख पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, फिल्म आदिपुरुष के डायलॉग्स शर्मनाक हैं और इस फिल्म पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
फिल्म में भगवान राम, भगवान हनुमान और साथ ही रावण को पूरी तरह से अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इस फिल्म को लेकर हनुमान गढ़ी मंदिर के पुजारी राजू दास ने भी प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कहा, "बॉलीवुड हिंदू धर्म को बर्बाद करने पर तुला हुआ है। फिल्म आदिपुरुष इस बात का सबसे सही उदाहरण है कि इनके लिए हिंदू भावनाएं सबसे कम मायने रखती है।"












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