'राइटर बाप होता है', इस डायलॉग पर विनीत कुमार सिंह ने किया दिलचस्प खुलासा

विनीत कुमार सिंह, जो अपनी दमदार और गहरी एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। अब सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव में एक और यादगार किरदार निभा रहे हैं। रीमा कागती की इस मच अवेटेड फिल्म में वो मालेगांव के छोटे बजट में बड़े सपने देखने वाले फिल्ममेकर्स की अनोखी दुनिया का हिस्सा हैं। हाल ही में मल्टी-स्टारर फिल्मों में अपनी जबरदस्त परफॉर्मेंस से तारीफें बटोरने वाले विनीत इस बार फरोघ का रोल निभा रहे हैं, जो एक स्ट्रगलिंग राइटर है और सिनेमा के लिए जीता है। लेकिन ये किरदार उनके लिए किसी नई दुनिया में जाने जैसा नहीं था, बल्कि एकदम अपने जैसा था।

सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव में विनीत कुमार सिंह का किरदार फरोघ जितना स्क्रीन पर असली लगेगा, उतना ही उनकी खुद की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी है। असल में, विनीत सिर्फ एक बेहतरीन एक्टर ही नहीं, बल्कि लिखने की दुनिया से भी गहराई से जुड़े रहे हैं। एक्टिंग में अपनी पहचान बनाने से पहले उन्होंने खुद भी एक लेखक के तौर पर संघर्ष किया था, जिससे उन्हें क्रिएटिव एक्सप्रेशन की चुनौतियों को करीब से समझने का मौका मिला। यही अनुभव अब उनके किरदार में एक अलग ही गहराई और असलियत भर रहा है।

Vineet Kumar Singh

जुनून और हताशा के बीच बैलेंस बनाना, अपने ख्वाब को हकीकत में बदलने की जी-जान से कोशिश करना और फिर अपने काम को दुनिया के सामने रखने का डर - ये सब क्रिएटिव लोगों की जिंदगी का हिस्सा होता है। विनीत कुमार सिंह इसे अच्छे से समझते हैं। वो बताते हैं, "मैंने अपनी बहन के साथ मिलकर 'मुक्काबाज़' लिखी थी, और जब भी मौका मिलता है, आज भी लिखने की कोशिश करता हूं। इसीलिए 'फरोघ' के किरदार में मैंने अपनी खुद की ज़िंदगी के कई हिस्से जोड़ दिए। इसके अलावा, असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने से मुझे 'फिल्म के अंदर फिल्म' बनाने का आईडिया समझने में भी मदद मिली। लेकिन असली चैलेंज 20 साल के किरदारों की दुनिया में फिट होना था, एक ऐसा जेनरेशन जिससे मैं नहीं आता हूं, जबकि मैं खुद उन सबसे 7-8 साल बड़े हूं। स्क्रीन पर दोस्ती और यारी नैचुरल लगे, इसके लिए उम्र का फर्क ज्यादा झलकने ना दूं, यही सबसे मुश्किल चीज़ थी।"

'राइटर बाप होता है' - सुपरबॉयज़ ऑफ़ मालेगांव के ट्रेलर में ये डायलॉग सुनते ही लोगों की एक्साइटमेंट और भी बढ़ गई। लेकिन इस पंचलाइन के पीछे की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। विनीत कुमार सिंह ने इसका खुलासा करते हुए बताया, "मुझे कई बार खुद-ब-खुद कुछ सीन में इंप्रोवाइज़ करने की आदत है। ये वाला सीन पहले से ही शानदार लिखा गया था और फिल्म के लिए काफी अहम भी था। लेकिन जब मैंने इसे परफॉर्म किया, तो ये लाइन अपने आप निकल आई-बिल्कुल नेचुरल तरीके से। मैंने रीमा से पूछा कि इसे रख सकते हैं क्या, और जब उन्होंने इसे सुना, तो उन्हें भी बहुत पसंद आया। बस, फिर ये डायलॉग फाइनल कट में आ गया।"

सुपरबॉयज़ ऑफ़ मालेगांव सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक जुनून है, जो मालेगांव की अनोखी DIY फिल्ममेकिंग कल्चर के बैकग्राउंड में बुनी गई है। ये कहानी सिर्फ़ सिनेमा की नहीं, बल्कि उन सपनों, दोस्ती और क्रिएटिविटी की भी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद भी उड़ान भरने का हौसला रखते हैं।

रीमा कागती के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंह और शशांक अरोड़ा जैसे बेहतरीन एक्टर्स अहम किरदार निभा रहे हैं। सुपरबॉयज़ ऑफ़ मालेगांव पहले ही इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सर्किट में अपनी जगह बना चुकी है, खासतौर पर 2024 के टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इसे जबरदस्त सराहना मिली। अमेज़न MGM स्टूडियोज, एक्सेल एंटरटेनमेंट और टाइगर बेबी के बैनर तले बनी इस फिल्म को रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर, ज़ोया अख्तर और रीमा कागती ने प्रोड्यूस किया है। वरुण ग्रोवर द्वारा लिखे गए, इस सिनेमा का जादू अब बड़े पर्दे पर बिखरने को तैयार है, जो 28 फरवरी को भारत, अमेरिका, यूके, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में रिलीज़ होगी।

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