दीपिका और संदीप रेड्डी की 'स्पिरिट' कॉन्ट्रोवर्सी पर राणा दग्गुबाती ने किया रिएक्ट, बोले- 'कुछ लोग महज 4 घंटे'
दीपिका पादुकोण पिछले कुछ दिनों से चर्चा में हैं। उन्हें संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'स्पिरिट' से हटना पड़ा। क्योंकि दीपिका ने जो डिमांड संदीप के सामने रखी थी, उन्होंने मानने से इनकार कर दिया था। इसकी वजहें फीस और काम के घंटें बताए गए। इस मामले में दोनों ने बिना नाम लिए अपनी अपनी बात कही है। इस मामले के बाद इंडस्ट्री के कई अन्य लोग भी अपना पक्ष रख रहे हैं। अब फिल्म 'बाहुबली' में भल्लालदेव का किरदार निभा चुके अभिनेता राणा दग्गुबाती ने इस बारे में अपनी राय रखी है।
राणा दग्गुबाती ने 'द लल्लनटॉप' के साथ बातचीत में कहा कि भारत अभी भी एक विकासशील देश है, पूरी तरह से विकसित नहीं। उन्होंने कहा कि अगर प्रति व्यक्ति आय के आधार पर देखें तो भारतीय अर्थव्यवस्था शायद दुनिया में 186वें नंबर पर है। भारत में 1.8 अरब लोग हैं, जिनमें से 70-80 फीसदी लोग प्रतिदिन केवल 100 रुपये कमाते हैं। इस बात को ध्यान में रखकर सोचने पर पता चलता है कि देश को अभी कितना आगे जाना है।

तेलुगु सिनेमा के मशहूर अभिनेता राणा ने बताया कि वर्क कल्चर सिर्फ प्रोफेशनल नहीं, बल्कि पर्सनल भी होता है। प्रभास के साथ काम कर चुके राणा ने कहा कि वे एक ऐसे इंडस्ट्री से आते हैं जो मद्रास से शुरू हुई थी। इसमें कुछ परिवार थे और सैकड़ों लोग दूसरे शहरों से आकर काम करने लगे। उनके लिए यह सिर्फ काम नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल है। सिनेमा के अनुसार वर्किंग कंडीशन कैसे बदलती है, इस बारे में बात करते हुए राणा ने कहा कि महाराष्ट्र में 12 घंटे की शिफ्ट होती है। जबकि तेलुगु सिनेमा में 8 घंटे की शिफ्ट होती है।
राणा ने आगे कहा कि महाराष्ट्र में काम सुबह 9 बजे शुरू होता है। वहीं,तेलुगु सिनेमा में सुबह 7 बजे शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि लोकेशन या स्टूडियो में होने पर और सेट पर शूटिंग करने पर समीकरण बदल जाते हैं, और चीजें हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। कोई किसी पर दबाव नहीं बना रहा है, यह एक नौकरी है। ठीक वैसे, जैसे आप पर कोई किसी शो को करने के लिए दबाव नहीं बनाता है। हमेशा आपकी अपनी चॉइस होती है। हर कोई तय करता है कि उसकी जिंदगी में क्या जरूरी है। ऐसे भी एक्टर हैं जो सिर्फ 4 घंटे काम करते हैं। उनका वही तरीका है।












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