Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Prashant Tamang Dies: प्रशांत तमांग के निधन पर क्यों रो रहा नेपाल? वजह है काफी बड़ी और खास

Prashant Tamang Death News: इंडियन आइडल सीजन 3 के विजेता और मशहूर सिंगर-एक्टर प्रशांत तमांग का 43 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। दिल्ली में दिल का दौरा (Cardiac Arrest) पड़ने से उनका आकस्मिक निधन हो गया। इस खबर ने दार्जिलिंग से लेकर काठमांडू तक के फैंस को झकझोर कर रख दिया है।

प्रशांत तमांग भारतीय मूल के नेपाली बोलने वाले सिंगर थे। सिंगर के निधन की खबर पर एक नेपाली फैन ने भावुक होते हुए लिखा, 'प्रथम नेपाली इंडियन आइडल प्रशांत तमांग के निधन की खबर से स्तब्ध हूं, यह एक अपूरणीय क्षति है।'

prashant-tamang

प्रशांत ने शुरू में कोलकाता पुलिस में कांस्टेबल के तौर पर काम किया और पुलिस ऑर्केस्ट्रा का हिस्सा थे, जहां उन्होंने चुपचाप संगीत के प्रति अपने जुनून को पाला। उनकी सादगी और विनम्रता ने पूरे देश के दर्शकों के दिलों को छू लिया।

नेपाल के लिए क्यों 'खास' थे प्रशांत तमांग?

प्रशांत तमांग महज एक सिंगर नहीं थे, बल्कि वे नेपाल और भारतीय गोरखा समुदाय के बीच एक 'सांस्कृतिक पुल' थे। नेपाल के लोगों के उनके प्रति इस कदर जुड़ाव की 3 मुख्य वजहें हैं:

  • 1. 'पहाड़ का गौरव' (Pahad Ko Gaurav): जब 2007 में प्रशांत इंडियन आइडल के मंच पर थे, तब नेपाल में उनके लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए थे। वहां के लोगों ने चंदा इकट्ठा किया और उन्हें जिताने के लिए रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग की थी। वे नेपाल के लिए 'सांस्कृतिक अस्मिता' का प्रतीक बन गए थे।
  • 2. नेपाली सिनेमा के सुपरस्टार: गायकी में नाम कमाने के बाद प्रशांत ने नेपाल के फिल्म जगत में कदम रखा। उनकी फिल्म 'गोरखा पलटन' (2010) ब्लॉकबस्टर रही। इसके बाद 'परदेशी' और 'परदेशी 2' जैसी फिल्मों ने उन्हें नेपाल के हर घर का सदस्य बना दिया।
  • 3. सादगी और संघर्ष की कहानी: कोलकाता पुलिस के एक साधारण कांस्टेबल से 'इंडियन आइडल' बनने तक का उनका सफर हर नेपाली युवा के लिए प्रेरणा था। उनकी विनम्रता ने उन्हें सरहदों के पार भी 'जनता का कलाकार' बनाया।

पाताल लोक 2 से मिली थी नई पहचान

प्रशांत तमांग ने हाल ही में हिंदी वेब सीरीज 'पाताल लोक सीजन 2' में 'डेनियल लेचो' का अहम किरदार निभाया था। इस सीरीज के जरिए वे एक बार फिर चर्चा में आए थे और हिंदी दर्शकों के बीच अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया था।

भारतीय गोरखा परिसंघ और दार्जिलिंग के सांस्कृतिक संगठनों ने उनके निधन को संगीत और कला जगत के लिए एक काला दिन बताया है। दार्जिलिंग में जन्मे प्रशांत ने अपनी जड़ों को कभी नहीं छोड़ा और हमेशा नेपाली भाषा और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+