इस तरह तो देश में गृहयुद्ध छिड़ सकता है, मोदी सरकार भी सीरियस नहीं: नसीरुद्दीन शाह
इस तरह तो देश में गृहयुद्ध छिड़ सकता है, मोदी भी सीरियस नहीं दिख रहे:
मुंबई, 29 दिसंबर: देश के लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल नसीरुद्दीन शाह ने हरिद्वार में धर्म संसद के नाम से हुए आयोजन में मुस्लिमों को लेकर की गई टिप्पणियों पर चिंता जाहिर की है। धर्म और जाति के नाम पर नरसंहार जैसी बातें कहे जाने को लेकर नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि इस तरह की बातों और कामों से देश गृह युद्ध में जा सकता है। इस तरह के कार्यक्रमों को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से प्रतिक्रिया ना होने को भी उन्होंने निराशाजनक कहा है। अपनी बेबाकी के लिए जाने वाले नसीरुद्दीन ने द वायर को इंटरव्यू दिया है। इंटरव्यू में पत्रकार करण थापर ने उनसे मुसलमानों और देश की राजनीति में बदलाव को लेकर कई सवाल किए हैं।

धर्म संसद पर खुलकर बोले नसीरुद्दीन शाह
उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर के बीच हिंदूवादी कट्टरपंथी संगठनों 'धर्म संसद' नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें मुसलमान और ईसाइयों के नरसंहार तक की बातें कही गईं। इस कार्यक्रम को लेकर नसीरुद्दीन शाह ने कहा, क्या वे (धर्म संसद में शामिल लोग) जानते भी हैं कि किस बारे में बात कर रहे हैं। ये लोग तो एक गृह युद्ध के लिए अपील कर रहे हैं। अल्पसंख्यकों को खत्म करने की बातें देश को गृहयुद्ध में धकेल देंगी।

20 करोड़ मुसलमान कहीं नहीं जाने वाला
नसीरुद्दीन ने आगे कहा, देश में 20 करोड़ मुसलमान हैं और इन 20 करोड़ लोगों के लिए यह मातृभूमि है। जिनका जन्म यहां हुआ और जिनके पुरखे यहां दफ्न हैं। ये करोड़ लोग ना खत्म होने वाले हैं और ना ही कहीं जाने वाले हैं। शाह ने कहा, मैं इस बात को लेकर निश्चिंत हूँ कि अगर अल्पसंख्यकों के खिलाफ कोई भी कदम उठाया जाएगा तो इसका कड़ा प्रतिरोध होगा और पूरा देश इसकी मुखालफत करेगा।
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मुसलमानों को हाशिए पर डालने की कोशिश ऊपर से
नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि मुसलमानों को हाशिए पर डालने की कोशिश ऊपर से हो रही है। सत्ताधारी पार्टी के लिए अलगाववाद नीति बन गया है। जिन्होंने मुसलमानों के ख़िलाफ हिंसा के लिए उकसाया, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह निराशाजनक है लेकिन इस सरकार से यही उम्मीद थी। इस तरह के उकसावों पर सरकार चुप्पी साध लेती है। मैं कहूंगा कि जिस तरह से चीजें हो रही हैं वो जितनी आशंकाएं थी, उससे भी बदतर हैं।












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