Video: मिस यूनिवर्स गलती से लड़कों के चैट ग्रुप में हो गई ऐड, शेयर किए अश्लील मैसेज के स्क्रीनशॉट्स
सिडनी, 14 अगस्त। साल 2020 में मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने वालीं ऑस्ट्रेलिया की मारिया थट्टिल को अभद्र टिप्पणी का सामना करना पड़ा है। पेशे से लेखक, स्पीकर और क्रिएटर मारिया थट्टिल महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए हमेशा से आवाज उठाती रही हैं। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनके साथ भी कभी ऐसा हो सकता है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ चैट शेयर किए हैं जिसमें लोगों द्वारा मारिया थट्टिल और अन्य महिलाओं के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

2020 की मिस यूनिवर्स विजेता हैं मारिया थट्टिल
दरअसल, बीते दिनों मिस यूनिवर्स ऑस्ट्रेलिया 2020 की विजेता मारिया थट्टिल गलती से 19 साल के पुरुष युवाओं के चैट ग्रुप से जुड़ गईं। इस दौरान मारिया थट्टिल को कई बुरे अनुभवों से गुजरना पड़ा जिसका खुलासा उन्होंने इंस्टाग्राम पर किया है। महिलाओं के महिला सशक्तिकरण और लड़कियों के अधिकारों पर अक्सर बोलने वालीं मारिया थट्टिल उस समय हैरान रह गईं जब व्हाट्सएप ग्रुप में महिलाओं के प्रति लड़को सोच का पता चला।

'महिलाओं के समझते हैं मांस का लोथड़ा'
अपने सोशल मीडिया पोस्ट किए एक वीडियो में मारिया ने कहा कि उनके लिए जैसे हम महिलाएं एक 'मांस का टुकड़ा' हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने कुछ ऐसे मेसेजेज़ देखे...जिनसे लग रहा था कि महिलाएं यौन वस्तुओं से ज़्यादा कुछ भी नहीं हैं।" बकौल मारिया, उस ग्रुप के पुरुष महिलाओं को मांस का लोथड़ा समझते थे।' मारिया ने जब ग्रुप में इसका विरोध किया तो उन लड़कों ने उन पर भी गंदे कमेंट किए।

मारिया थट्टिल ने शेयर किया वीडियो
वीडियो में मारिया थट्टिल कहती हैं, लैंगिक भेदभाव सभी लिंग के व्यक्तियों को प्रभावित करता है लेकिन महिलाओं को इसका पांच गुना अधिक सहना पड़ता है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं कहीं ज्यादा लिंग रूढ़िवादिता और लिंग-आधारित उत्पीड़न के कारण पीड़ित हैं। उसने यह भी कहा कि ज्यादातर पुरुषों की सोच महिलाओं के प्रति बेकार होती है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस तरह के रवैये का विरोध करते हैं। मारिया थट्टिल ने कहा कि ग्रुप के लड़कों को अभी भी यही लगता है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया।

'यही लोग बड़े होकर हमारे नेता बनेंगे'
हाई स्कूल की कड़वी यादों को शेयर करते हुए 28 वर्षीय मारिया थट्टिल ने बताया कि उन दिनों भी उन्हें ऐसी ही विचारधारा से जूझना पड़ा था। 'लड़के तो लड़के ही रहेंगे' जैसे बयानों के साथ महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न को खारिज करने की प्रवृत्ति पर बोलते हुए मारिया ने कहा कि ऐसी विचारधारा के वजह से ही समाज में महिलाओं के लिए द्वेष, घृणा और अनादर पनपता है। इससे भी खतरनाक बात यह है कि यही लोग बड़े होकर हमारी नीतियां बनाने वाले राजनेता बनेंगे। इसलिए इस तरह के सेक्सिस्ट व्यवहार का दूरगामी प्रभाव पड़ता है।
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