Ghooskhor Pandit Controversy: मनोज बाजपेयी ने फिल्म की कॉन्ट्रोवर्सी पर दिया जवाब, मायावती ने बताया 'अपमनान'
नेटफ्लिक्स इंडिया द्वारा 2026 की फिल्मों और वेब सीरीज़ की घोषणा के बाद 'घूसखोर पंडित' गलत वजहों से चर्चा में आ गई। फिल्म के नाम और कथित कंटेंट को लेकर भावनाएं आहत होने के आरोप लगे, जिसके बाद निर्माताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पहले निर्देशक नीरज पांडे ने सफाई दी थी, अब फिल्म के लीड एक्टर मनोज बाजपेयी ने भी इस मुद्दे पर खुलकर बयान दिया है।

मनोज बाजपेयी का बयान
मनोज बाजपेयी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर नीरज पांडे के बयान को साझा करते हुए लिखा,लोगों द्वारा साझा की गई भावनाओं और चिंताओं का मैं सम्मान करता हूँ और उन्हें गंभीरता से लेता हूँ। जब आप जिस चीज़ का हिस्सा होते हैं, उससे कुछ लोगों को ठेस पहुँचती है, तो यह आपको रुककर उनकी बात सुनने के लिए मजबूर कर देता है। एक अभिनेता के रूप में, मैं किसी फिल्म में अपने द्वारा निभाए जा रहे किरदार और कहानी के माध्यम से ही प्रवेश करता हूं।
उन्होंने आगे लिखा, मेरे लिए, यह एक त्रुटिपूर्ण व्यक्ति और उसकी आत्म-साक्षात्कार की यात्रा को चित्रित करने के बारे में था। इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय के बारे में कोई टिप्पणी करना नहीं था। नीरज पांडे के साथ काम करने के अपने अनुभव में, मैंने देखा है कि वे अपनी फिल्मों के प्रति हमेशा गंभीरता और सावधानी बरतते हैं। जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, फिल्म निर्माताओं ने प्रचार सामग्री को हटाने का निर्णय लिया है। यह इस बात को दर्शाता है कि चिंताओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।
नीरज पांडे पहले ही दे चुके हैं सफाई
इससे पहले नीरज पांडे ने बयान जारी कर कहा था कि 'घूसखोर पंडित' पूरी तरह काल्पनिक कहानी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'पंडित' शब्द सिर्फ एक काल्पनिक किरदार का बोलचाल का नाम है। कहानी किसी व्यक्ति के कर्म और फैसलों पर आधारित है। इसका किसी जाति, धर्म या समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने माना कि शीर्षक से कुछ लोगों को ठेस पहुंची है और इसी कारण सभी प्रचार सामग्री हटाने का फैसला लिया गया है।
एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
- फिल्म की घोषणा के बाद से ही विरोध शुरू हो गया था।
- लखनऊ के हजरतगंज थाने में नीरज पांडे और निर्माताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई
- आरोप लगाया गया कि फिल्म का नाम और कंटेंट धार्मिक और जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं
- पुलिस का कहना है कि पहली नजर में शीर्षक एक खास समुदाय, खासकर ब्राह्मण समाज, को निशाना बनाता दिखता है
हाई कोर्ट और NHRC भी हुए सक्रिय
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस भेजा है। जिसमें उन्होंने इसे नेगेटिव रूढ़ियां फैलाने वाला बताया है। अधिवक्ता विनीत जिंदल के माध्यम से दिल्ली हाई कोर्ट में फिल्म की रिलीज रोकने के लिए याचिका भी दायर की गई है
पूर्व CM मायावती का बयान
उत्तर प्रदेश की पूर्व CM ने अपने सोशल मीडिया हैंडल में लिखा, यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी 'पंडत' को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। ऐसी इस जातिसूचक फिल्म (वेब सीरीज) 'घूसखोर पंडत' पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बी.एस.पी. की यह मांग। साथ ही, इसको लेकर लखनऊ पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना उचित कदम।
क्या है 'घूसखोर पंडित' की कहानी
मनोज बाजपेयी इस फिल्म में अजय दीक्षित उर्फ पंडित नाम के एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। कहानी दिल्ली में पनप रही एक बड़ी साजिश के बीच एक ऐसी रात पर केंद्रित है, जब उसकी योजनाएं उलझ जाती हैं और हालात तेजी से बदलते हैं। फिलहाल फिल्म की प्रमोशनल एक्टिविटी रोक दी गई है और रिलीज डेट भी सामने नहीं आई है।












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