Mannu Kya Karegga Review: प्यार, दोस्ती और जिंदगी की एक प्यारी झप्पी, पढ़ें रिव्यू

Mannu Kya Karegga Movie Review: शुक्रवार आते ही हर सिनेप्रेमी को नई फिल्मों के रिलीज़ का बेसब्री से इंतज़ार रहता है। जहां पिछले कुछ समय से लगातार बड़ी, भारी-भरकम और हाई बजट फिल्में सिनेमाघरों में दस्तक दे रही थीं। वहीं इस हफ्ते एक बिलकुल अलग तरह की फिल्म आई है, 'मन्नू क्या करेगा'। ये फिल्म ना तो जोर-शोर से प्रमोट की गई, ना ही इसमें कोई चमक-दमक है। लेकिन फिर भी ये अपने सादेपन में एक ख़ास मिठास लेकर आई है।

Mannu Kya Karegga Movie Review

कहानी है मानव चतुर्वेदी उर्फ मन्नू की, जो देहरादून के कॉलेज में पढ़ाई करता है। वो हर चीज़ में अच्छा है, खेल, पढ़ाई, टेक्नोलॉजी और ड्रामा में। लेकिन अपने करियर को लेकर बिल्कुल साफ़ नहीं है। यही उलझन उसकी सबसे बड़ी परेशानी भी है। फिर उसकी ज़िंदगी में आती है, जिया रस्तोगी। एक स्मार्ट, फोकस्ड और बेहद क्लियर सोच वाली लड़की, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी से ट्रांसफर होकर आई है और स्टैनफोर्ड या हार्वर्ड जैसे बड़े सपनों को लेकर बिल्कुल सीरियस है। जिया को लगता है कि मन्नू अपने करियर को लेकर फोकस नहीं है... और खुद को साबित करने की जल्दबाज़ी में मन्नू एक झूठ बोल देता है, "Nothing" नाम का एक फेक स्टार्टअप बना लेता है। जो सिर्फ दिखावे के लिए होता है। यह झूठ धीरे-धीरे उसके रिश्ते और ज़िंदगी दोनों को उलझा देता है। और जब सच्चाई सामने आती है, तो मन्नू के पास बचता है दिल का टूटना, परिवार की नाराज़गी, और खुद से संघर्ष।

लेकिन यहां फिल्म का सबसे खूबसूरत मोड़ आता है - मन्नू के प्रोफेसर डॉन (विनय पाठक) उसे Ikigai के कॉन्सेप्ट से मिलवाते हैं - "ज़िंदगी का असली मकसद"। यहीं से मन्नू का असली सफर शुरू होता है, खुद की तलाश का।

व्योम यादव मन्नू के रोल में दिल जीत लेते हैं। वो मन्नू की मासूमियत, उलझन, और अंत की परिपक्वता को बेहद नैचुरल ढंग से निभाते हैं। साची बिंद्रा ने जिया के किरदार में गरिमा और ठहराव लाया है। दोनों की केमिस्ट्री सहज और खूबसूरत है। कुमुद मिश्रा और चारु शंकर मन्नू के माता-पिता के रोल में शानदार हैं। वो बेचैनी, वो चिंता, और वो बेपनाह प्यार सबकुछ बेहद रियल लगता है।विनय पाठक एकदम जानदार हैं। डॉन के किरदार में वो प्रोफेसर बन जाते हैं जो हर किसी की ज़िंदगी में होने चाहिए। राजेश कुमार, बृजेंद्र काला, नमन गोर, आयत मेमन, डिंपल शर्मा, और लवीना टंडन - सभी सह कलाकारों ने अपने-अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी बखूबी निभाई है।

देहरादून की हर लोकेशन एक अहसास देती है। कॉलेज की गलियां, पहाड़ी सड़कों पर बाइक चलाना, सब कुछ बेहद ऑर्गैनिक है। फिल्म का संगीत तो जैसे कहानी की आत्मा बन जाता है। "फना हुआ", "हमनवा", "तेरी यादें", और टाइटल ट्रैक "मन्नू तेरा क्या होगा" सिर्फ गाने नहीं, भावनाओं की एक्सप्रेशन हैं। हर गाना एक मोमेंट को कैरी करता है, उसे गहराई देता है।बैकग्राउंड म्यूज़िक भी ना ज़्यादा लाउड है, ना कम बिल्कुल सटीक।

संजय त्रिपाठी का निर्देशन बिना किसी बनावटीपन के एक सहज बहाव के साथ चलता है। उन्होंने कहानी को एक ऐसा फ्लो दिया है कि दर्शक खुद को मन्नू के साथ चलते हुए पाते हैं। सौरभ गुप्ता और राधिका मल्होत्रा की राइटिंग सटीक है, नाटकीयता से दूर, लेकिन असरदार।शरद मेहरा द्वारा निर्मित यह फिल्म, क्यूरियस ऑय फिल्म्स के तहत बनी है - और यह साफ़ झलकता है कि इस फिल्म में कमर्शियल हल्ले से ज़्यादा दिल से काम किया गया है। यह एक ऐसी फिल्म है जो दिखाती है कि छोटे बजट और नए चेहरों के साथ भी, एक अच्छी कहानी कितना कुछ कह सकती है।

'मन्नू क्या करेगा' एक सीधी-सादी, दिल को छू लेने वाली कहानी है। जो सादगी में ही अपनी गहराई बिखेरती है। ये सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं है, ये एक ऐसा संदेश देती है जो आज की युवा पीढ़ी के लिए बेहद ज़रूरी है। अपनी पहचान, अपने लक्ष्य और अपने अंदर छिपे हुनर को समझने की जो जद्दोजहद हर युवा महसूस करता है, वो इस फिल्म में बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है।

फिल्म रिव्यू- Mannu Kya Karegga
डायरेक्टर - संजय त्रिपाठी
कास्ट - व्योम, साची बिंद्रा, कुमुद मिश्रा, विनय पाठक, चारु शंकर
रेटिंग - 3.5

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