Death News: मनोरंजन जगत पर दोहरी मार! जुबीन गर्ग के बाद असम को एक और झटका! महाराष्ट्र ने खोई 'Daya', जानें वजह
Daya Dongre Flute Artist Dipak Sarma Death Reason: मनोरंजन और सांस्कृतिक दुनिया इन दिनों शोक की लहर में डूबी हुई है। असम को जुबीन गर्ग के असामयिक निधन के सदमे से उबरने का मौका भी नहीं मिला कि एक और झटका लग गया-प्रसिद्ध बांसुरी वादक दीपक सरमा का निधन हो गया।
वहीं, महाराष्ट्र ने अपनी दिग्गज मराठी अभिनेत्री दया डोंगरे को खो दिया। ये नुकसान न सिर्फ क्षेत्रीय सिनेमा और संगीत को प्रभावित करेंगे, बल्कि लाखों प्रशंसकों के दिलों में खालीपन छोड़ जाएंगे। आइए जानें इन कलाकारों के सफर, योगदान और निधन की वजहों के बारे में विस्तार से जानें? आखिर कैसे हुई मौत...

Flute Virtuoso Dipak Sarma Death Reason: दीपक सरमा की मौत कैसे हुई?, जुबीन गर्ग की यादें ताजा
असम के संगीत प्रेमी अभी भी प्रसिद्ध गायक 52 वर्षीय जुबीन के निधन (19 सितंबर 2025) से सदमे में हैं। इसी बीच, एक और दुख का पहाड़ असम के संगीत प्रेमियों पर टूट पड़ा है। 3 नवंबर 2025 को एक और बुरी खबर आई-असम के बांसुरी वादक दीपक सरमा का चेन्नई के एक अस्पताल में निधन हो गया। 57 वर्षीय दीपक लंबे समय से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। जनवरी 2023 में उन्होंने फेसबुक पर लीवर सर्जरी के लिए आर्थिक मदद की अपील की थी। हाल ही में गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के बाद उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें चेन्नई शिफ्ट किया गया, जहां सुबह 6:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उनके इलाज के खर्च में मदद की थी।
Zubeen Garg Passed Away News: दो माह पहले गुजरे जुबीन गर्ग
आपको बता दें कि 52 वर्षीय जुबीन का निधन 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में एक स्कूबा डाइविंग हादसे के दौरान हो गया था। वे वहां नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में परफॉर्म करने गए थे, जहां लाजरस द्वीप पर स्विमिंग के दौरान दौरा पड़ने से वे डूब गए। उनकी पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने स्पष्ट किया कि यह स्कूबा डाइविंग से जुड़ा हादसा नहीं था, बल्कि दौरा ही मुख्य कारण था। असम सरकार ने उनके निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया, और लाखों प्रशंसक गुवाहाटी में उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। जुबीन ने असमिया, बंगाली और हिंदी फिल्मों में 40 से ज्यादा भाषाओं में गीत गाए, जिनमें 'या अली' जैसी हिट शामिल है। वे असम की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक थे।

Who Was Flute Virtuoso Dipak Sarma: कौन थे दीपक सरमा?
नलबाड़ी जिले के पानीगांव गांव में 1968 में जन्मे दीपक बचपन से ही बांसुरी के जादू में खोए रहते थे। उन्होंने असमिया लोक धुनों और भारतीय शास्त्रीय संगीत का अनोखा मिश्रण तैयार किया, जो पूर्वोत्तर भारत में उनकी पहचान बना। संगीत निर्देशन में भी सक्रिय, उन्होंने 'जुंकी पानाई', 'जटिंगा' और 'लुइतके वेटिब कोने' जैसी परियोजनाओं का निर्देशन किया। वे संगीत लेजेंड डॉ. भूपेन हजारिका के साथ भी सहयोग कर चुके थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परफॉर्मेंस करने वाले दीपक की धुनें दिल को छू जाती थीं। उनके निधन पर सीएम हिमंता ने ट्वीट किया, 'असम ने अपनी विरासत की एक और आवाज खो दी।' असम का सांस्कृतिक परिदृश्य अब जुबीन और दीपक के बिना और सुनसान हो गया है।
Marathi Actress Daya Dongre Death Reason: महाराष्ट्र का शोक: दया डोंगरे की विरासत, 'खाष्ट सासू' की यादें
महाराष्ट्र ने भी अपने एक धुरंधर कलाकार को खो दिया। दिग्गज मराठी अभिनेत्री दया डोंगरे (Marathi Actress Daya Dongre) का 3 नवंबर 2025 को 85 वर्ष की आयु में मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रही दया को हाल ही में भर्ती किया गया था, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए। निधन के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। फिल्म समीक्षक दिलीप ठाकुर ने लोकसत्ता को यह जानकारी दी।

Who Was Marathi Actress Daya Dongre: कौन थी दया डोंगरे? एक गायिका से अभिनेत्री तक का सफर
11 मार्च 1940 को जन्मी दया का नाम लेते ही मराठी सिनेमा में 'खाष्ट सासू' (चालाक सास) की छवि उभरती है। वे खलनायिका के रोल में मशहूर थीं, जिनकी नजरों से ही दर्शक कांप उठते थे। लेकिन उनका असली जुनून गायन था। 12 साल की उम्र में ही उन्होंने आकाशवाणी के कर्नाटक धारवाड़ केंद्र के उद्घाटन में शास्त्रीय और नाट्य संगीत प्रस्तुत किया। स्कूल के बाद पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में दाखिला लिया, जहां पुरुषोत्तम करंदक के वन-एक्ट कॉम्पिटिशन में अभिनय ने उनका रुझान बदला। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से नाटक में उच्च शिक्षा ली, जहां लीला गांधी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित हुईं।
Marathi Actress Daya Dongre Love Story: दया डोंगरे का कौन था पति?
उनका विवाह शरद डोंगरे से हुआ, जो भी कला प्रेमी थे (शरद का 2014 में निधन हो गया)। दया ने 'उम्बरठा', 'मायाबाप', 'नवरी मिले नवरियाला', 'खट्याल सासू नथल सुन' जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। 1990 के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली, लेकिन टीवी पर 'स्वामी' में गोपिकाबाई का रोल अमर हो गया। नाटकों में 'बृहद वजलम', 'चांपा गोवेकर', 'लेकुरे उदांड झाली' और 'संकेट मिलनाचा' जैसी रचनाओं में उन्होंने शांता आप्टे बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड जीता। उनकी मां यामुतााई मोदक और मौसी शांता मोदक भी अभिनेत्री-गायिका थीं, इसलिए कला उन्हें पारिवारिक विरासत थी। दो बेटियां संगीता (मुंबई) और अमृता (बेंगलुरु) हैं, जो नियमित रूप से मिलती रहती हैं। दया ने दिल्ली और मुंबई डूर्डर्शन के लिए 'गजरा', 'बंदिनी' और 'आवां' जैसे प्रोग्राम प्रोड्यूस किए। हिंदी सिनेमा से दूरी इसलिए बनाई क्योंकि वहां शूटिंग में देरी होती थी।
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अमिट छाप छोड़ गए
ये कलाकार (दीपक की बांसुरी की तानें और दया की दमदार एक्टिंग) अपने क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ गए। असम और महाराष्ट्र के अलावा पूरे भारत को इनकी कमी खलेगी। प्रशंसक सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं, जबकि सांस्कृतिक संस्थाएं विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रही हैं। ये नुकसान याद दिलाते हैं कि कला की दुनिया कितनी नाजुक है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।
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