अफगानिस्तान में जन्मी वरीना हुसैन का छलका दर्द, कहा-'महिलाएं तो सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन बन जाएंगी'
अफगानिस्तान में जन्मी वरीना हुसैन का छलका दर्द, कहा-'महिलाएं तो सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन बन जाएंगी'
मुंबई, 23 अगस्त: फिल्म 'लवयात्री' से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत करने वाली वरीना हुसैन का जन्म अफगानिस्तान में हुआ था। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद दुनियाभर में चिंता का माहौल है। वहां के नागरिक किसी भी हालत में देश को छोड़ना चाहते हैं। इन सब हालतों को देखकर अफगानिस्तान में जन्मी वरीना हुसैन का दर्द छलका है। वरीना हुसैन ने अफगानिस्तान में बिगड़े हालात पर चिंता जताई है। वरीना हुसैन के पिता इराकी और मां अफगानिस्तानी हैं। 23 फरवरी 1999 को काबुल में जब तालिबान का कब्जा हुआ था तो वरीना हुसैन के परिवार ने देश छोड़ दिया था और उज्बेकिस्तान चला गया था। जिसके 10 साल बाद वरीना हुसैन भारत आईं और यहीं रहने लगीं। वरीना हुसैन ने कहा है कि तालिबान के कब्जे के बाद वह वहां के हालात को अच्छे से समझ सकती हैं। वरीना ने कहा, 20 साल तालिबान के कब्जे की वजह से ही मेरा परिवार अफगानिस्तान से भागने के लिए मजबूर हो गया था।

वरीना बोलीं- 'हर एक अफगानी में खुद को देख रही हूं...'
वरीना हुसैन ने बॉम्बे टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा है, '' मैंने अपने आप को हर अफगानी व्यक्ति में देख पा रही हूं, समझ सकती हूं कि वहां से जान बचाकर भागने के लिए वह विमानों में ना बैठने को लेकर कैसा महसूस कर रहे हैं। मेरा जिंदगी भी उनकी तरह, एक युद्धग्रस्त देश से पलायन का ही नतीजा है। एक बेहतर जीवन की तलाश में मेरा परिवार एक देश से दूसरे देश बस भागता रहा है। अंत में हम भारत पहुंचे, एक उदार और प्यार करने वाला देश जिसने हमारा स्वागत किया और हमने इसे अपना घर बना लिया। इसलिए पिछले कुछ दिनों से मैं सिर्फ यही सोच रहा हूं कि अफगान के लोग वहां कैसे जिंदा रहेंगे। ''

'महिलाएं तो सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन बन जाएंगी'
वरीना हुसैन ने कहा, ''तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान ने पिछले जितने भी सालों में जो भी विकास किया है, वह सब बेकार चला गया है। अफगानिस्तान की महिलाओं पर बात करते हुए वरीना कहती हैं, मुझे डर है कि इतने सालों में जो प्रगति हुई है वह सब बर्बाद हो गया है। सालों की लड़ाई के बाद महिलाओं को जो अधिकार मिले हैं वह खत्म हो जाएंगे और वह एक बार फिर से दूसरे दर्जे की नागरिक के रूप में हो जाएंगी जिन्हें बुनियादी अधिकार नहीं मिलेंगे। तालिबान के राज में अफगानिस्तान में महिलाएं केवल बच्चा पैदान करने की मशीन बन जाएंगी''

'अफगानिस्तान में एक लड़की रात को बाहर नहीं जा सकती'
वरीना हुसैन ने कहा, जब भी हम 20 साल पहले की बात सोचते हैं, जब हमने अफगानिस्तान छोड़ा था, अतीत की क्रूर यादें अभी भी हमारी रीढ़ को झकझोर देती हैं। हां, मैं अफगानिस्तान में रही हूं, मैं वहां पारिवार के साथ पिकनिक और आजादी की महक का भी वहां आनंद लिया। लेकिन तालिबान के कब्जे के बाद वहां सब बदल गया था। एक लड़की रात में अकेले बाहर नहीं जा सकती थी। कई बार मैं अपनी बीमार मां के लिए दवा लेने के लिए रात में अकेले बाहर नहीं निकल पाती थी। यह कई वर्षों के युद्ध का नतीजा है, जिसने लोगों के विचारों को कलंकित किया है।

'एक वक्त था जब अफगानिस्तान की महिलाएं फैशन में आगे थीं...'
वरीना हुसैन ने कहा, ''अगर हम वास्तव में एक शांतिपूर्ण अफगानिस्तान के बारे में बात करना चाहते हैं, तो हमें अपनी दादी और उनके पूर्वजों के समय में वापस जाना होगा, जब काबुल अपने फैशन, कला और संस्कृति, पर्यटन, व्यापार और स्वतंत्रता के लिए जाना जाता था, ये सभी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे। एक वक्त था जब अफगानिस्तान की महिलाएं फैशन में आगे थीं, अब तो महिलाओं को अधिकार भी नहीं मिलेंगे। नेतृत्व की बात करें तो, अब समय आ गया है कि अफगानिस्तान के लोगों को अपना नेता चुनने की बुनियादी स्वतंत्रता हो।''

'शरिया कानून के नाम पर महिलाओं के साथ जो हो रहा है...'
वरीना हुसैन ने कहा, 'मैं एक एक्ट्रेस हूं या नहीं, मैं कभी भी किसी ऐसे देश में नहीं जाना चाहूंगी, जहां महिलाओं की स्वतंत्रता प्रतिबंधित हो।' शरिया कानून पर बात करते हुए वरीना ने कहा, पैगंबर मुहम्मद की पत्नी खदीजा ने सबसे पहले शरिया स्वीकार करने से मना कर दिया था। महिलाओं की सुरक्षा के लिए धार्मिक कानून बनाया गया था और आज उसी धर्म के नाम पर महिलाओं के साथ गलत हो रहा है। मैंने सुना है कि लड़कियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध उनके घरों से बाहर निकलने पर मजबूर किया जाता है ताकि वे उन पुरुषों से शादी कर सकें जिन्हें वे अपने योग्य नहीं समझती हैं। लोगों को शरिया कानून का पालन करने के लिए कहते हुए उन्हें बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है।''

वरीना हुसैन ने अमेरिका से की ये अपील
वरीना हुसैन ने कहा, मुझे विश्वास है कि दशकों से अफगानिस्तान का दोस्त रहा भारत अपना काम करेगा। हालांकि, मैं अमेरिका से इसमें कदम रखने की अपील करती हूं। लेकिन अफगानियों का दर्द बहुत ज्यादा है। वह वहां से निकल भी गए तो अपनी पहचान के लिए जिंदगी भर लड़ते रहेंगे। इस सवाल का जवाब देने के लिए हमेशा संघर्ष करना होगा, 'क्या हम सब एक दुनिया नहीं हैं?'

'आखिर अफगानी कब तक भागते रहेंगे'
वरीना हुसैन ने कहा, ''जब से अफगानिस्तान में युद्ध शुरू हुआ है, अपनी जिंदगी बचाने के लिए लोग वहां से बस निकलना चाहते हैं। लेकिन सवाल ये है कि अफगानी कब तक भागते रहेंगे। अगर देश में लंबे समय तक यही माहौल रहा तो मैंने जो सहा है, जो मेरी मां ने झेला है, और जो अब दूसरों का सामना कर रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कहानी बन जाएगी।''












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