'हम अपने भगवान को COOL दिखाना चाहते थे...', आदिपुरुष में विभीषण बनने वाले एक्टर ने फिल्म का किया बचाव
Adipurush actor Siddhant Karnick: निर्देशक ओम राउत की रामायण पर आधिरत फिल्म 'आदिपुरुष' को आलोचकों और दर्शकों से नकारात्मक समीक्षा मिली है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट गई है। घटिया वीएफएक्स से लेकर डायलॉग्स तक की आलोचनाएं हुई हैं।
अब आदिपुरुष' में 'विभीषण' की भूमिका निभाने वाले अभिनेता सिद्धांत कार्निक ने फिल्म का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि हम अपने भगवान को कूल दिखाना चाह रहे थे।

अभिनेता सिद्धांत कार्निक ने कहा, हमारे भगवान सुपरहीरो से भी कूल हैं। हमें बच्चों को उनकी ही भाषा में इसे पेश करना चाहिए। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में सिद्धांत कार्निक ने कहा कि , ''यह दिखाना जरूरी है कि 'हमारे भगवान सुपरहीरो से भी ज्यादा कूल हैं।''
सिद्धांत कार्निक ने कहा, ''हाल ही में उन्होंने आदिपुरुष फिल्म को देखने के दौरान थिएटर में एक 10 साल के बच्चे को नाचते हुए देखा था। ऐसा लग रहा था जैसे वह बच्चा अपने जीवन का सबसे अच्छा समय बिता रहा हो। और मुझे यह महसूस हुआ कि यह एक ऐसी फिल्म है जिसे बच्चों को हमारे महाकाव्यों और कहानियों से गहराई से परिचित होने के लिए जरूर देखना चाहिए।"
सिद्धांत ने फिल्म का बचाव करते हुए तर्क दिया कि हमें अब अपनी पौराणिक कहानियों को पॉप कल्चर के साथ मिक्स करके आज के जमाने के हिसाब से दिखाना चाहिए। बच्चों को पता होना चाहिए कि हमारे देवता आजकल के नकली सुपरहीरो की तुलना में ज्यादा कूल और शानदार थे।
सिद्धांत ने कहा, ''मैं अपने भतीजों और यहां तक कि अपने कुछ दोस्तों को सुपरहीरो टी-शर्ट पहने हुए देखता हूं, जो काफी हद तक स्पाइडरमैन और सुपरमैन जैसे नकली कैरेक्टर के हैं। दूसरी और हमारे पास असल के सुपरहीरो और देवताओं से भरा हुआ अपना खुद का इतना बड़ा इतिहास है। जिनकी कहानियां और छवियां अभी भी मौजूद है।''
सिद्धांत ने आगे कहा, ''हमें पॉप कल्चर की चतुराई से उपयोग करने की जरूरत है ताकि हम अपने देवताओं की कहानियों को अपने बच्चों की पीढ़ी तक पहुंचा सकें, उन्हें दिखा सकें कि हमारे देवता किसी भी नकली सुपरहीरो की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली और कूल हैं।''
उन्होंने आगे कहा, ''मैं यह नहीं कह रहा हूं हमें विदेशी फिल्मों और उनके सुपरहीरो से दूर रहना चाहिए। बिल्कुल नहीं, लेकिन अब समय आ गया है कि हम अपने देवताओं पर फोकस करना चाहिए और उनकी कहानियों को सुपरहीरो की उस भाषा में पेश करना चाहिए, जो आजकल के बच्चे समझते हैं।''












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