Review: महानायक 'आदि शंकराचार्य' के जीवन पर प्रकाश डालती है ओंकारनाथ की सीरीज, पढ़िए रिव्यू
कलाकार: अर्नव खानिजो, संदीप मोहन, गगन मलिक, सुमन गुप्ता, योगेश महाजन, राजीव रंजन, मनीष बिस्ला
निर्देशक: ओंकार नाथ मिश्रा
रेटिंग: 3.5
भारत में आदि शंकराचार्य बहुत प्रासंगिक हो गए हैं। आठवीं शताब्दी में सनातन धर्म को संगठित करने वाले आदि शंकराचार्य आख़िर कौन थे इसको जानने के लिए नई पीढ़ी काफी इच्छुक होते जा रही है। ऐसे में श्री श्री रविशंकर जी की संस्था ने आदि शंकराचार्य पर आधारित वेब सीरीज बनाई है। दिवाली पर यह सीरीज आर्ट ऑफ लिविंग ऐप पर रिलीज हो रही हैं। इसे ओंकार नाथ मिश्रा ने डायरेक्ट किया है।
भारत के महान सम्राटों की अदूरदर्शिता और सनातन के प्रति उदासीनता से क्षेत्रीय, धार्मिक और विदेशी आक्रमण से छिन्न भिन्न होते सांस्कृतिक मूल्यों को खोते भारतवर्ष की यह कहानी आठवी सदी से शुरू होती हैं। भारत के स्वर्णकाल से जब इस देश की सीमाएं दूर देशों तक फैली हुई थी और समाज में बौद्ध धर्म सहित अन्य संप्रदायों का प्रादुर्भाव होना शुरू हुआ था। कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने अहिंसा का मार्ग चुना और बौद्ध धम्म के प्रचार प्रसार मे व्यस्त हो गए। सम्राट का धर्म प्रजा और साम्राज्य कि रक्षा करना होता है पर सनातनी मूल्यों का त्याग सम्राट अशोक को अदूरदर्शी बना देता है और समाज अलग अलग धर्मों और संप्रदाय में बँटने लगता है। समाज में वैमान्यस्यता, जात पात, महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के विरुद्ध अपराध बढ़ने लगता है। कहानी में जो साक्ष्य उपलब्ध हैं, वही दिखाया गया है।

अर्नव का काम है उम्दा
एक्टिंग की बात करें तो इस वेब सीरीज में सभी कलाकार ने अच्छा काम किया है। आदि शंकराचार्य के किरदार में अर्नव खानिजों एकदम फिट बैठते हैं। उनको देखकर लगता है कि आदि शंकर अपने बालक रूप में ऐसे ही दिखते होंगे। उन्होंने बड़े ही सरल और सौम्य तरीके से किरदार पेश किया है। पिता शिवगुरु के किरदार में संदीप मोहन का काम काफी प्रभावशाली है। उनके काम में एक्सपीरियंस दिखता है। माता के किरदार में सुमन गुप्ता प्रभावित करती हैं और उन्होंने अपने उम्दा अभिनय से अपने किरदार से साथ पूरा न्याय किया है। उनको टीवी पर किये गए अपने काम का पूरा फायदा मिला है। अभिनेता राजीव रंजन आचार्य विभूति का किरदार निभाया है जिसमें उन्होंने अपने संजीदा अभिनय से प्रभावित करते हैं।
लेखन और निर्देशन ने बांधा समा
सीरीज ओंकारनाथ मिश्रा ने इस सीरीज को लेखन और निर्देशन से रोमांचित बनाया है। सिनेमॅटोग्राफी दर्शकों को कहानी में खींच के उसका रियल एक्सपिरिअन्स देती है। बैकग्राउंड और रंगों का चुनाव भी उम्दा है। सीरीज का ये पहला सीजन है। इममें कुल 10 एपिसोड हैं। हर एपिसोड को ऐसे नाम दिए गए हैं जो उस एपिसोड में निहित कथानक को बताते हैं। इसके अलावा सीरीज के 3 और सीजन आने हैं।












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