Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

कौन थे राजस्थान के मेजर शैतान सिंह, जिनकी वीरता पर बन रही है फरहान अख्तर की फिल्म ‘120 बहादुर’?

Major Shaitan Singh Bhati Biopic: 18 नवंबर 1962 की सुबह, लद्दाख के बर्फीले रेज़ांग ला पास पर भारतीय सेना के केवल 120 जवानों ने चीन की लगभग 3000 सैनिकों की विशाल फौज का डटकर सामना किया था। हर ओर मौत बिछी थी, लेकिन भारतीय सैनिक पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे थे। क्योंकि उनके साथ एक ऐसा कमांडर था, जिसने अपने जवानों को सिर्फ लड़ना नहीं, मरते दम तक लड़ना सिखाया था। उनका नाम था मेजर शैतान सिंह भाटी। एक ऐसा योद्धा, जिसने आखिरी सांस तक बंदूक नहीं छोड़ी।

अब भारतीय सेना के इस अद्वितीय शौर्य और बलिदान की अमर कहानी को बड़े पर्दे पर उतारा जा रहा है फिल्म '120 बहादुर' के माध्यम से, जिसमें फरहान अख्तर मेजर शैतान सिंह की भूमिका निभा रहे हैं। यह सिर्फ एक युद्ध फिल्म नहीं, बल्कि उन 120 वीरों की श्रद्धांजलि है, जिन्होंने रेज़ांग ला को युद्धभूमि से भारत माता की वीरता की धरती बना दिया।

Major Shaitan Singh Bhati Biopic

फिल्म 120 बहादुर की रिलीज़ डेट 21 नवंबर 2025

मेजर शैतान सिंह पर बन रही फिल्म को लेकर दिया गया फरहान अख्तर का हाल ही का इंटरव्यू खूब वायरल हो रहा है, जिसमें फरहान अख्तर कह रहे हैं कि उन्होंने ''मेजर शैतान सिंह के रोल के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से भी गहन तैयारी की है।'' मेजर शैतान सिंह की बायोपिक '120 बहादुर' में एक्टर के साथ-साथ प्रोड्यूसर की भूमिका में भी फरहान अख्तर नजर आएंगे। फिल्म के डायरेक्टर रजनीश घई हैं, जो खुद आर्मी बैकग्राउंड फैमिली से हैं। फिल्म '120 बहादुर' 21 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

Major Shaitan Singh Bhati Biopic

मेजर शैतान सिंह: वीरता की अमर गाथा

राजस्थान के जोधपुर जिले के बनासर गांव में 1 दिसंबर 1924 को जन्मे मेजर शैतान सिंह भाटी न केवल एक वीर सैनिक थे, बल्कि भारतीय सैन्य इतिहास में सर्वोच्च बलिदान और असाधारण नेतृत्व का प्रतीक बन गए। सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मे मेजर शैतान सिंह के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल हेम सिंह भाटी प्रथम विश्व युद्ध में फ्रांस में लड़े थे और 'ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर' से सम्मानित हुए थे। अपने पिता की वीरता से प्रेरित होकर शैतान सिंह बचपन से ही भारतीय सेना में सेवा देने का सपना देखने लगे।

राजपूत हाई स्कूल, चोपासनी जोधपुर से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने जसवंत कॉलेज, जोधपुर से स्नातक की डिग्री ली। देश की आज़ादी के समय वे जोधपुर लांसर्स (हॉर्स स्क्वाड्रन) में शामिल हुए, और रियासत के भारत में विलय के बाद 7 अप्रैल 1949 को उन्हें कुमाऊं रेजिमेंट में स्थानांतरित कर दिया गया।

मेजर शैतान सिंह की बहादुरी, ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें सभी का सम्मान दिलाया। 25 नवंबर 1955 को उन्हें कैप्टन पद पर पदोन्नत किया गया। उन्होंने नागा हिल्स में कार्रवाई के साथ-साथ 1961 के 'ऑपरेशन विजय' में गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने में भी भाग लिया। फुटबॉल के शौकीन मेजर शैतान सिंह ने 'सर्विसेज टीम' और 'ड्यूरंड कप' में भी हिस्सा लिया था।

रेज़ांग ला की वीरगाथा: 18 नवंबर 1962

साल 1962 के भारत-चीन युद्ध में लद्दाख के चुशूल सेक्टर का रेज़ांग ला पोस्ट भारतीय सेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम था। यह क्षेत्र समुद्र तल से लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित था और दुश्मन की घुसपैठ को रोकने के लिए यह एकमात्र मोर्चा था। 13 कुमाऊं की 'सी कंपनी' की कमान मेजर शैतान सिंह के हाथों में थी, जिसे रेज़ांग ला की सुरक्षा सौंपी गई थी।

मेजर शैतान सिंह ने अपने सैनिकों को तीन प्लाटूनों में रणनीतिक रूप से तैनात किया। प्लाटून 7 (जेम सुरजा राम), प्लाटून 8 (जेम हरि राम) और प्लाटून 9 (जेम राम चंदर)। हर प्लाटून के पास सीमित संसाधन थे लेकिन आत्मबल असीमित था। 18 नवंबर की रात 2 बजे चीनी सेना ने पहली लहर में हमला बोला, जिसे भारतीय जवानों ने हिम्मत से रोका। इसके बाद एक के बाद एक सात हमले हुए।

सुबह 9 बजे तक हालात बेहद गंभीर हो चुके थे। इसी दौरान, जब मेजर शैतान सिंह अपने सैनिकों का नेतृत्व करते हुए फ्रंटलाइन की ओर बढ़ रहे थे, उन्हें चीनी मशीन गन की गोली लग गई। पेट और हाथ में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे मोर्चा छोड़ने को तैयार नहीं हुए। जब उनके जवान उन्हें बचाने आए तो उन्होंने आदेश दिया। "मुझे छोड़ दो, अपनी जान बचाओ।" और वहीं एक पत्थर के पीछे उन्होंने अपनी अंतिम सांसें लीं।

आखिरी सिपाही और आखिरी गोली तक लड़ने का संकल्प

रेज़ांग ला पोस्ट को भारतीय तोपों का समर्थन नहीं मिल सका क्योंकि वह क्षेत्र 'क्रेस्टेड' था, यानी आसपास की पहाड़ियों के कारण वहां तोपें काम नहीं कर सकती थीं। बावजूद इसके, मेजर शैतान सिंह और उनकी कंपनी ने अद्भुत साहस का परिचय दिया। कंपनी के 124 में से 114 शहीद हुए, 5 सैनिक बंदी बना लिए गए जिनमें से एक की मृत्यु बाद में हुई। दुश्मन की चार से पांच गुना अधिक क्षति हुई। चीन का चुशूल एयरफील्ड पर कब्जा करने का मंसूबा विफल हो गया।

तीन महीने बाद जब एक चरवाहे ने रेज़ांग ला की बर्फ से ढकी घाटी में वीर सपूतों के शव देखे, तो पता चला कि वहां अंतिम सांस तक लड़ने वाले जवान अभी भी वहीं थे। मेजर शैतान सिंह का शरीर भी उसी बर्फ में सुरक्षित मिला। उनके पार्थिव शरीर को जोधपुर लाकर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

अमर शहीद को सर्वोच्च सम्मान

मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह भारत का सर्वोच्च युद्ध कालीन वीरता पुरस्कार है। उनकी कंपनी के कई अन्य जवानों को भी "वीर चक्र" से सम्मानित किया गया। रेज़ांग ला वार मेमोरियल अहीर धाम, चुशूल में उनकी याद में बनवाया गया। राजस्थान ही नहीं बल्कि हरियाणा के रेवाड़ी और गुरुग्राम में भी स्मारक स्थापित किए गए हैं। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने उनके नाम पर "MT Major Shaitan Singh, PVC" नामक टैंकर लॉन्च किया, जो 25 वर्षों तक सेवा में रहा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+